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राजस्थान में भारी बारिश से हाहाकार: कोटा-बूंदी में रेड अलर्ट

राजस्थान में भारी बारिश से हाहाकार: कोटा-बूंदी में रेड अलर्ट

शोभना शर्मा।  राजस्थान में मानसून इस बार लगातार अपना प्रकोप बरपा रहा है। पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। मौसम विभाग ने साफ चेतावनी जारी की है कि यह बरसात का दौर अभी थमने वाला नहीं है और 25 अगस्त तक इसी तरह तेज बारिश जारी रह सकती है। इससे पूरे प्रदेश में अलर्ट घोषित कर दिया गया है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।

कोटा-बूंदी में सबसे गंभीर हालात

हाड़ौती क्षेत्र, विशेषकर कोटा और बूंदी, इस बारिश से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इन जिलों में स्थिति गंभीर होने के बाद रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है। हालात बिगड़ने पर सेना को राहत और बचाव कार्यों में लगाया गया है। बीसलपुर और कोट बैराज जैसे प्रमुख बांधों के गेट खोल दिए गए हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी का दबाव और बढ़ गया है। प्रशासन का कहना है कि हालात लगातार मॉनिटर किए जा रहे हैं और नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।

टोंक में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन

टोंक जिले में भी भारी बारिश का असर साफ दिखाई दिया है। जिले के ADM राम रतन सौंकरिया ने बताया कि टोंक और आसपास के इलाकों में अब तक 500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। उनियारा शहर के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। लोहार समाज के कई लोग पानी में फंसे हुए थे, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। इसके अलावा कई घरों में पानी घुसने से परिवारों को निकालकर अस्थायी राहत शिविरों में ठहराया गया है। प्रशासन ने उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी की है।

परिवहन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित

भारी बारिश का असर यातायात व्यवस्था पर भी देखने को मिला है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर जगह-जगह पानी भर जाने से गाड़ियों की रफ्तार थम गई है। जयपुर से गुजरने वाली कई रेल सेवाएं भी बाधित हुई हैं। राजधानी जयपुर में शनिवार सुबह से लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई जगहों पर जलभराव और जाम की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

जयपुर की सड़कों की हालत तो और भी खराब हो गई है। जुलाई में हुए हादसों से कोई सबक न लेते हुए नगर निगम की लापरवाही एक बार फिर उजागर हो गई है। पॉश कॉलोनियों से लेकर साधारण मोहल्लों तक, हर जगह पानी जमा हो गया है। सीवर जाम होने से हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा और कई गाड़ियां पानी में बंद हो गईं।

बारिश से मिली थोड़ी राहत भी

हालांकि, इस भारी बारिश ने एक राहत भी दी है। गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों को पिछले 48 घंटों में तापमान में 5 डिग्री तक की गिरावट से राहत महसूस हुई है। दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे चला गया है, जिससे गर्मी से परेशान लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं।

भारी बारिश का कारण

मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इस बार की भारी बारिश का मुख्य कारण साइक्लोनिक सर्कुलेशन है। यह सिस्टम पिछले 48 घंटों से मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर सक्रिय था, जो अब दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान की ओर बढ़ गया है। मानसून ट्रफ लाइन वर्तमान में गंगानगर, चूरू, ग्वालियर, सतना और डालटनगंज से होती हुई बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर सिस्टम तक जा रही है। यही कारण है कि प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार भारी बारिश हो रही है और अगले 2-3 दिन तक यह स्थिति बनी रह सकती है।

प्रशासन की बड़ी चुनौती

राजस्थान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब प्रभावित जिलों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की है। खासतौर पर कोटा, बूंदी और टोंक जैसे इलाकों में जहां बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है, वहां बाढ़ की आशंका और बढ़ गई है। सेना और SDRF की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। वहीं, मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

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