शोभना शर्मा। भारतीय शेयर बाजार ने पिछले सप्ताह लगातार छह हफ्तों से जारी गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए मजबूती दिखाई। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों प्रमुख इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुए। इस रिकवरी के पीछे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की मजबूत खरीदारी बड़ी वजह रही। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बिकवाली जारी रखी और कैश मार्केट में लगभग 10,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। इसके विपरीत DII ने करीब 19,000 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सपोर्ट दिया।
फार्मा और ऑटो सेक्टर ने दिखाई मजबूती
पिछले सप्ताह फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों और नए प्रोडक्ट लॉन्च की उम्मीदों से इन सेक्टर्स में निवेशकों का भरोसा बढ़ा। वहीं, एफएमसीजी शेयर दबाव में रहे। विश्लेषकों का मानना है कि कंज्यूमर सेक्टर में अभी भी डिमांड पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौटी है, जिसके चलते एफएमसीजी कंपनियों में निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
ट्रंप-पुतिन मुलाकात से सकारात्मक संकेत
इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हो सकता है। अलास्का में हुई इस बैठक में युद्धविराम की घोषणा तो नहीं हुई, लेकिन यूक्रेन संघर्ष को लेकर प्रगति के संकेत जरूर मिले हैं। अगर आने वाले दिनों में इस मोर्चे पर कोई ठोस नतीजा निकलता है, तो इसका असर वैश्विक बाजारों पर सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है। चूंकि भारतीय बाजार वैश्विक संकेतों से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं, इसलिए निवेशकों की नजर इस बैठक के नतीजों पर टिकी रहेगी।
मोदी सरकार का GST 2.0 सुधार पैकेज
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी 2.0 सुधारों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि दिवाली तक रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स दरों को घटाकर व्यवस्था को अधिक उपभोक्ता-अनुकूल और व्यावसायिक बनाया जाएगा। इस घोषणा को निवेशकों ने सकारात्मक नजरिए से देखा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि टैक्स स्ट्रक्चर सरल होने से उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा, जिससे एफएमसीजी और रिटेल सेक्टर को फायदा होगा। साथ ही, इसका असर मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन पर भी दिखाई देगा।
वॉल स्ट्रीट और वैश्विक संकेत
पिछले सप्ताह अमेरिकी बाजार मिश्रित संकेतों के साथ बंद हुए। डॉव जोन्स हरे निशान में रहा, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक पर दबाव बना रहा। मजबूत रिटेल सेल्स डेटा ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन कमजोर औद्योगिक उत्पादन आंकड़ों ने टेक शेयरों पर असर डाला। भारतीय बाजार पर भी इसका परोक्ष प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि आईटी कंपनियों का बड़ा हिस्सा अमेरिकी क्लाइंट्स पर निर्भर है।
FII और DII का रुझान रहेगा अहम
भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली की प्रवृत्ति बरकरार रखी थी। इसके बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने जोरदार खरीदारी से बाजार को स्थिरता दी। विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में भी अगर DII सपोर्ट देते रहे तो बाजार को गिरावट से बचाया जा सकता है। हालांकि, एफआईआई का रुख बदलना बाजार के लिए और बड़ी मजबूती लेकर आएगा।
कॉर्पोरेट एक्शन से बनेगा मूवमेंट
इस सप्ताह 100 से ज्यादा कंपनियां डिविडेंड, राइट्स इश्यू, स्टॉक स्प्लिट और बोनस शेयर जैसे कॉर्पोरेट एक्शन ला रही हैं। इससे स्टॉक-विशेष हलचल तेज हो सकती है। शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए यह अच्छा मौका होगा कि वे इन शेयरों पर ध्यान दें और सही समय पर पोजिशन बनाएं।
कच्चे तेल की कीमत से मिली राहत
कच्चे तेल की कीमतें पिछले सप्ताह नरम हुई हैं। ट्रंप-पुतिन वार्ता के बाद इसमें और गिरावट देखने को मिली। भारत जैसे आयातक देश के लिए यह राहत की खबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो रुपए की मजबूती बनी रहेगी और आयात लागत घटेगी। इसका फायदा सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई के स्तर पर भी दिखेगा।
निवेशकों के लिए रणनीति
एनालिस्ट मानते हैं कि इस समय बाजार को लेकर सतर्कता जरूरी है। निफ्टी को 22,000 और सेंसेक्स को 72,500 के स्तर पर सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, ऊपर की ओर 22,700 और 73,500 के स्तर पर रेजिस्टेंस दिख सकता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बड़े फैसले लेने से पहले वैश्विक घटनाक्रमों और सरकार की आर्थिक घोषणाओं पर पैनी नजर बनाए रखें।


