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सोना-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट: निवेशकों में हड़कंप, दो दिनों में 10,000 रु तक टूटा सोना

सोना-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड गिरावट: निवेशकों में हड़कंप, दो दिनों में 10,000 रु तक टूटा सोना

शोभना शर्मा।   पिछले दो सत्रों में सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट ने पूरे बाजार को चौंका दिया है। घरेलू वायदा बाजार MCX (Multi Commodity Exchange) पर सोना जहां कुछ दिन पहले तक ₹1,32,294 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर था, वहीं अब यह गिरकर ₹1,22,800 रुपये के आसपास पहुंच गया है। यानी ऊंचाई से करीब ₹10,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की भारी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार और मंगलवार को आई यह गिरावट पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी रही। बुधवार सुबह के कारोबार में सोने में हल्की रिकवरी देखने को मिली, जब यह ₹979 रुपये की तेजी के साथ ₹1,22,836 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में स्थिर तेजी के संकेत अभी भी कमजोर हैं।

चांदी में भी जबरदस्त गिरावट, दो दिनों में ₹25,000 रुपये तक नीचे

केवल सोना ही नहीं, बल्कि चांदी (Silver) के दामों में भी दो दिनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कुछ सत्र पहले MCX पर चांदी ₹1,70,415 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, लेकिन अब यह गिरकर लगभग ₹1,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रही है। यानी चांदी में करीब ₹25,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट आई है। हालांकि बुधवार को मामूली तेजी दर्ज हुई, जब यह ₹732 रुपये बढ़कर ₹1,46,290 रुपये पर पहुंची, लेकिन कुल मिलाकर ट्रेंड कमजोर ही बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही स्थिति रही। COMEX पर चांदी का भाव $54 प्रति औंस के ऊपर से करीब $4 नीचे फिसल गया। यह 2021 के बाद की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट मानी जा रही है।

ग्लोबल मार्केट में भी भारी दबाव, 2013 के बाद सबसे बड़ी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें अपने लाइफ हाई से लगभग $300 नीचे आ चुकी हैं। बीते मंगलवार को ग्लोबल मार्केट में जो इंट्राडे गिरावट दर्ज हुई, वह 2013 के बाद की सबसे बड़ी मानी गई है। सोमवार को सोना $4,398 प्रति औंस के हाई तक पहुंचा था, जिसके बाद लगातार दो दिनों तक तेज मुनाफावसूली (profit booking) देखी गई। विश्लेषकों का कहना है कि ग्लोबल जोखिम धारणा (risk sentiment) में सुधार और डॉलर की मजबूती के चलते निवेशकों ने सेफ असेट्स यानी सोना-चांदी से पैसे निकालकर इक्विटी और रिस्क एसेट्स में शिफ्ट किया है।

क्यों टूटा सोना-चांदी का बाजार?

  1. मुनाफावसूली का दबाव:
    पिछले कई हफ्तों से लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है। सोना-चांदी दोनों में ही भाव रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ी।

  2. डॉलर की मजबूती:
    डॉलर इंडेक्स अब 99 अंक के ऊपर पहुंच गया है, जिससे ग्लोबल मार्केट में सोना और चांदी पर दबाव बढ़ा है। मजबूत डॉलर के कारण इन धातुओं में विदेशी निवेश घटता है।

  3. ट्रेड रिलेशंस में सुधार:
    अमेरिका और चीन के बीच संभावित ट्रेड डील और भारत-अमेरिका के बीच नई व्यापारिक साझेदारी की उम्मीदों ने बाजार में अनिश्चितता को कम किया है। इससे सेफ-हेवन डिमांड कमजोर हुई है।

  4. ग्लोबल इन्फ्लेशन और ब्याज दरों की उम्मीदें:
    अमेरिकी महंगाई दर में स्थिरता और ब्याज दरों के घटने की संभावना ने भी सोने की कीमतों को नीचे धकेला है। निवेशक अब बॉन्ड और इक्विटी में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं।

आने वाले दिनों में क्या रुझान रह सकता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, कम अवधि में सोने में और गिरावट संभव है, लेकिन दीर्घकाल में यह अब भी मजबूत एसेट माना जा रहा है। निवेशकों को इस समय घबराने की बजाय सावधानी से निवेश करने की सलाह दी जा रही है। ग्लोबल स्तर पर बाजार की नजर अब शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी मुद्रास्फीति (inflation) के आंकड़ों पर है। अगर आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो डॉलर और मजबूत हो सकता है, जिससे सोने पर और दबाव बनेगा। वहीं, अगर अमेरिका में ब्याज दर घटाने के संकेत मिलते हैं, तो सोने की कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति रखें?

  • अल्पकाल में सोना ₹1,21,500–₹1,22,000 के सपोर्ट लेवल पर टिके रह सकता है।

  • ₹1,24,500 का रेजिस्टेंस लेवल ब्रेक होने पर ही ऊपर की दिशा बन सकती है।

  • निवेशकों को फिजिकल गोल्ड की बजाय एसआईपी या गोल्ड ईटीएफ में निवेश पर विचार करना चाहिए।

सोना-चांदी के बाजार में चल रही तेज गिरावट से अल्पकालिक निवेशक जरूर प्रभावित हुए हैं, लेकिन दीर्घकाल में यह मूल्य स्थिरता के संकेत भी हो सकते हैं। वैश्विक आर्थिक संकेतकों और डॉलर की दिशा पर नजर बनाए रखना फिलहाल सबसे अहम रहेगा।

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