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गिरल मजदूर आंदोलन पर रविन्द्र सिंह भाटी का सरकार पर हमला

गिरल मजदूर आंदोलन पर रविन्द्र सिंह भाटी का सरकार पर हमला

राजस्थान के बाड़मेर जिले में पिछले करीब डेढ़ महीने से जारी गिरल लिग्नाइट माइंस मजदूर आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी चर्चा के केंद्र में आ गया है। मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे इस आंदोलन के बीच शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी  ने प्रदेश की भजनलाल सरकार  पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक वीडियो संदेश में विधायक भाटी ने न केवल मजदूरों की मांगों का समर्थन किया, बल्कि अपने निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) के निलंबन को लेकर भी सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है और जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाने के लिए राजनीतिक साजिशें रची जा रही हैं।

विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि 19 मई को हुई घटना का हवाला देते हुए उनके पीएसओ तखत सिंह को निलंबित कर दिया गया, जबकि उनके अनुसार संबंधित अधिकारी किसी भी प्रकार की गलती के दोषी नहीं हैं। भाटी ने कहा कि यह कार्रवाई केवल दबाव बनाने और संदेश देने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है। उन्होंने इस कदम को अनुचित बताते हुए कहा कि सरकार को वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, न कि उन लोगों को निशाना बनाने की जो जनता की समस्याओं को सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं।

भाटी ने कहा कि गिरल लिग्नाइट माइंस से जुड़े मजदूर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। उनके अनुसार मजदूरों की कई मांगें न्यायसंगत हैं और उन पर सकारात्मक विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। यदि मजदूर लगातार आंदोलन कर रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि उनकी समस्याओं का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है।

अपने संबोधन में विधायक ने यह भी कहा कि उन्हें जनता ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनकर विधानसभा भेजा है और इसलिए जनता की आवाज उठाना उनका नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता ने अपना प्रतिनिधि बनाया है। ऐसे में गरीब, मजदूर, वंचित, शोषित वर्ग, युवाओं और महिलाओं की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक दायित्व नहीं बल्कि राजधर्म और नैतिक कर्तव्य भी बताया।

रविन्द्र सिंह भाटी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि प्रशासन और सरकार को यह लगता है कि मुकदमे दर्ज कराकर, जेल भेजकर, सुरक्षा व्यवस्था हटाकर या अन्य दबाव बनाकर किसी जनप्रतिनिधि को चुप कराया जा सकता है, तो यह उनकी गलतफहमी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने से वे पीछे नहीं हटेंगे और किसी भी प्रकार के दबाव के बावजूद अपनी बात मजबूती से रखते रहेंगे।

अपने वीडियो संदेश में भाटी ने लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना या जनता की समस्याओं को उठाना किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता। यदि कोई व्यक्ति सरकार की नीतियों या प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, तो उसका उत्तर संवाद और समाधान के माध्यम से दिया जाना चाहिए, न कि दमनात्मक कार्रवाई के जरिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान परिस्थितियों में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को विभिन्न प्रकार के दबावों का सामना करना पड़ सकता है।

भाटी ने यह भी कहा कि सरकार के सामने दो रास्ते होते हैं। पहला रास्ता बंद कमरों में बातचीत और औपचारिक संवाद का है, जबकि दूसरा रास्ता जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को उठाने का है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा दूसरा रास्ता चुना है क्योंकि वह सीधे जनता से जुड़े रहना चाहते हैं। उनका कहना था कि यदि जनता की समस्याओं को खुले मंच पर नहीं उठाया जाएगा तो उनका समाधान भी प्रभावी रूप से नहीं हो पाएगा।

उन्होंने राज्य सरकार की ओर से अक्सर किए जाने वाले रामराज्य और अंत्योदय के उल्लेख पर भी टिप्पणी की। भाटी ने कहा कि रामराज्य की अवधारणा का अर्थ यह है कि यदि राज्य का कोई भी व्यक्ति दुखी, परेशान या पीड़ित है तो शासक को उसकी चिंता होनी चाहिए। वहीं अंत्योदय का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और न्याय पहुंचाना है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मजदूर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है, तो इन आदर्शों का वास्तविक अर्थ क्या रह जाता है।

गौरतलब है कि गिरल लिग्नाइट माइंस से जुड़े मजदूर पिछले कई सप्ताह से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। मजदूरों का कहना है कि उनकी रोजगार, वेतन, सेवा शर्तों और अन्य श्रम संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे लगातार धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन को स्थानीय स्तर पर व्यापक समर्थन भी मिला है और कई सामाजिक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों ने मजदूरों की मांगों के प्रति सहानुभूति जताई है।

इस आंदोलन के दौरान कई बार प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी बनी। विशेष रूप से 19 मई को बाड़मेर कूच के दौरान विरोध प्रदर्शन तेज हो गया था। उसी दौरान रविन्द्र सिंह भाटी ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए विरोध स्वरूप पेट्रोल छिड़ककर प्रदर्शन किया था। घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और किसी भी अप्रिय घटना को टाल दिया।

इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और कथित सुरक्षा चूक के आधार पर विधायक के पीएसओ के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि भाटी इस कार्रवाई को अनुचित मानते हुए लगातार विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि वास्तविक मुद्दा मजदूरों की समस्याओं का समाधान है, जबकि ध्यान अन्य विषयों की ओर मोड़ा जा रहा है।

फिलहाल गिरल लिग्नाइट माइंस मजदूर आंदोलन जारी है और मजदूर अपनी मांगों पर कायम हैं। वहीं विधायक रविन्द्र सिंह भाटी भी आंदोलनरत श्रमिकों के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार, प्रशासन और आंदोलनकारी पक्षों के बीच किसी सहमति का रास्ता निकलता है या नहीं। बाड़मेर का यह मुद्दा अब केवल श्रमिक आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति और लोकतांत्रिक संवाद के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन चुका है।

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