राजस्थान की शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी शुक्रवार को एक पुराने प्रकरण में पेशी के लिए उदयपुर की अदालत पहुंचे, जहां उन्होंने कोविड-19 काल के दौरान छात्र हितों को लेकर किए गए आंदोलन से जुड़े मामले में अपना पक्ष रखा। इस दौरान कोर्ट परिसर में उनके समर्थकों की भारी भीड़ देखने को मिली, जिससे पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना दिया।
कोर्ट में पेशी के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए भाटी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया और उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, वह पूरी तरह से छात्रों के हितों की रक्षा के लिए किया गया था। कोविड-19 महामारी के दौरान जब देशभर में स्कूल और कॉलेज बंद थे, तब ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में उन्होंने छात्रों की फीस माफी और अन्य राहतों की मांग को लेकर आवाज उठाई थी।
भाटी ने बताया कि उस समय उन्होंने और उनके साथियों ने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें विधानसभा का घेराव भी शामिल था। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के माध्यम से सरकार का ध्यान छात्रों की समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया था। हालांकि, उनके अनुसार प्रशासन ने इस आंदोलन को दबाने के लिए उनके खिलाफ और अन्य युवाओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए, जो पूरी तरह से अनुचित था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीण इलाकों के अधिकांश छात्र आर्थिक रूप से कमजोर थे और उनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद उनसे पूरी फीस वसूली जा रही थी, जो न्यायसंगत नहीं था। भाटी ने कहा कि उन्होंने इन्हीं मुद्दों को उठाने के लिए आंदोलन किया था, लेकिन अब उसी को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और इसे कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
इस दौरान उन्होंने न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अदालत में उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आएगी और यह साबित होगा कि उन्होंने जो कुछ किया, वह पूरी तरह से जनहित में था। उन्होंने अपने समर्थकों से भी संयम बनाए रखने और कानून का सम्मान करने की अपील की।
हाल ही में सोशल मीडिया पर चल रहे विवादों और पुराने वीडियो के वायरल होने के सवाल पर भाटी ने संतुलित और संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद होना एक सामान्य बात है, लेकिन समाज में मनभेद नहीं होने चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी समाज की ताकत उसकी एकता, प्रेम और भाईचारे में होती है, और इसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
भाटी ने यह भी संकेत दिया कि वे अब विवादों को बढ़ाने के बजाय समाज में सामंजस्य और एकता को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि उसे विभाजित करना। उन्होंने सभी वर्गों और समुदायों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यही वास्तविक विकास का रास्ता है।
इस दौरान जब बाड़मेर में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना को लेकर उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने इस विषय पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी। भाटी ने कहा कि इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा को अपना परिवार बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों के विकास के लिए सभी ने मिलकर प्रयास किए हैं और अब समय आ गया है कि इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि रिफाइनरी परियोजना जल्द ही धरातल पर उतरेगी, जिससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। भाटी ने कहा कि यह परियोजना केवल औद्योगिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के युवाओं के लिए एक नई उम्मीद भी है।


