राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने सदन में कई महत्वपूर्ण और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया। अपने वक्तव्य के दौरान उन्होंने नगरपालिकाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार, ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण, बिजली और पानी की समस्याओं सहित कई विषयों पर सरकार को घेरा। इस दौरान भाटी ‘Save Oran’ संदेश वाली शर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे, जिसने सदन में मौजूद सदस्यों और बाहर लोगों का भी ध्यान आकर्षित किया। उनके इस प्रतीकात्मक कदम को ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास माना गया।
भाटी ने अपने भाषण में कहा कि विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक व्यवस्थाओं को बचाना भी उतना ही जरूरी है। यदि इन मुद्दों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
खेल विश्वविद्यालय पर चर्चा में खिलाड़ियों के हितों की पैरवी
विधानसभा में महाराणा प्रताप खेलकूद विश्वविद्यालय से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान रवींद्र सिंह भाटी ने खेल और खिलाड़ियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सभापति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह विधेयक महत्वपूर्ण है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसके नाम को लेकर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि “खेलकूद विश्वविद्यालय” के स्थान पर इसे “स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी” या “खेल विश्वविद्यालय” कहा जाना चाहिए ताकि इसके उद्देश्य और स्वरूप को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।
भाटी ने राजस्थान में खेलों की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि हाल ही में आयोजित ओलंपिक प्रतियोगिता में लगभग 117 भारतीय खिलाड़ी भाग लेने गए थे, लेकिन उनमें राजस्थान के केवल दो खिलाड़ी ही शामिल थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश अक्सर हरियाणा से प्रतिस्पर्धा की बात करता है, लेकिन उसी स्तर की खेल सुविधाएं और ढांचा भी उपलब्ध कराना होगा। उन्होंने कोचों की कमी को भी गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि यदि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन नहीं मिलेंगे तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को अवसर देने की जरूरत
रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और सही मंच उपलब्ध कराने की है। उन्होंने अपने क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि बाड़मेर जिले के सुथारों का वास क्षेत्र में जूडो के खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा पिछले दो वर्षों में बास्केटबॉल के 28 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं।
उन्होंने बताया कि समदड़ी का सलोर क्षेत्र वॉलीबॉल खिलाड़ियों के लिए जाना जाता है, जबकि इन्द्रोई और चूली गांव की हॉकी टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है। इसी तरह हरसाणी, मलटाला, गड़ा और महाबार क्षेत्रों में हैंडबॉल के खिलाड़ी उभर रहे हैं। भाटी ने कहा कि रोहिड़ी और सुंदरा साइकिलिंग के लिए प्रसिद्ध हो रहे हैं, जबकि गिराब और सुंदरा क्षेत्र में कबड्डी की प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने खेल मंत्री से आग्रह किया कि सीमा क्षेत्र के खिलाड़ियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए ताकि वे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
जोधपुर में आईपीएल मैच कराने की मांग
विधानसभा में बोलते हुए रवींद्र सिंह भाटी ने यह भी कहा कि आने वाले समय में इंडियन प्रीमियर लीग यानी Indian Premier League के मैच आयोजित होने वाले हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जोधपुर में भी आईपीएल मैच आयोजित करवाने का प्रयास किया जाए। भाटी के अनुसार यदि जोधपुर में आईपीएल मैच आयोजित होते हैं तो इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी। साथ ही इससे क्षेत्र में खेल संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी।
नगरपालिका संशोधन विधेयक पर उठाए सवाल
राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान भाटी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि शहरों का विकास केवल दिखावे से नहीं बल्कि स्पष्ट दृष्टि और मजबूत इच्छाशक्ति से संभव है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई शहरों में मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर लगातार कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहरी विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक भूमि व्यवस्थाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
भाटी ने विशेष रूप से ओरण और गोचर भूमि के तेजी से समाप्त होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि इन भूमियों का संरक्षण नहीं किया गया तो गायों और अन्य पशुओं के लिए चराई की जमीन खत्म हो जाएगी, जिससे पशुपालन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
जमीन आवंटन और बिजली परियोजनाओं पर आरोप
विधायक भाटी ने विकास परियोजनाओं के नाम पर भूमि आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर किसानों की जमीनों का अनैतिक तरीके से आवंटन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बिजली परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को न तो पर्याप्त बिजली मिल रही है और न ही उन्हें रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इसके अलावा किसानों को उचित मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है। भाटी के अनुसार विकास योजनाओं में स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है ताकि विकास और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बना रहे।
खेजड़ी संरक्षण कानून को लेकर सरकार से जवाब मांगा
भाटी ने सदन में यह भी कहा कि इसी बजट सत्र के दौरान खेजड़ी संरक्षण से संबंधित विधेयक लाने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि सत्र के अंतिम दिन तक यह बिल प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहती तो निजी सदस्य विधेयक को आधार बनाकर भी इस विषय पर कानून बना सकती थी। इसके लिए केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
पानी, हीटवेव और छात्रसंघ चुनावों का मुद्दा भी उठा
अपने वक्तव्य के अंत में रवींद्र सिंह भाटी ने प्रदेश में बढ़ते हीटवेव और पेयजल संकट का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि गर्मियों के मौसम में कई क्षेत्रों में पानी की समस्या गंभीर हो जाती है, लेकिन इसके समाधान के लिए कोई स्पष्ट रणनीति सामने नहीं आ रही है। इसके साथ ही उन्होंने छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से बंद होने का मुद्दा भी उठाया। भाटी ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें बंद रखने से युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए छात्रसंघ चुनाव फिर से शुरू करने पर विचार किया जाए। उनके अनुसार यदि सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देती है तो इससे प्रदेश के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकती है।


