राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने बहुप्रतीक्षित RAS 2024 का अंतिम परिणाम जारी कर दिया है। परिणाम जारी होते ही प्रदेशभर में चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई। आयोग ने सफल उम्मीदवारों की सूची के साथ टॉपर्स की रैंक भी जारी की है। इस बार परिणाम केवल अंकों की सूची भर नहीं रहा, बल्कि संघर्ष, मेहनत, पारिवारिक सपनों और आत्मविश्वास की कई प्रेरक कहानियां भी सामने लेकर आया है। प्रदेश को अब जल्द ही 1096 नए प्रशासनिक अधिकारी मिलने जा रहे हैं, जो आने वाले समय में शासन व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे। इस भर्ती प्रक्रिया में राज्य सेवा के 428 पद और अधीनस्थ सेवा के 668 पद शामिल हैं। खास बात यह रही कि वैकेंसी जारी होने से लेकर अंतिम परिणाम आने तक पूरी प्रक्रिया केवल एक साल सात महीने और सत्रह दिन में पूरी कर ली गई। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिहाज से यह अवधि काफी कम मानी जा रही है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों को समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया का संदेश मिला है।
अजमेर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र के उजोली गांव निवासी हरियश राजपुरोहित ने इस परीक्षा में 17वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। साधारण परिवार से आने वाले हरियश वर्तमान में कॉपरेटिव सेवा में कार्यरत हैं। उनके पिता रामभरोस सिंह राजपुरोहित प्रतिष्ठित मार्बल व्यवसायी हैं। नौकरी के साथ कठिन प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी कर शीर्ष रैंक लाना युवाओं के लिए प्रेरणा माना जा रहा है।
अजमेर जिले की भीनाय तहसील के शिवचरण जाट ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 557वीं रैंक प्राप्त की है। शिवचरण पिछले चार वर्षों से गांव प्रतापपुरा में सरकारी शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। किसान परिवार से आने वाले शिवचरण ने सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने बताया कि इससे पहले वे 11 सरकारी सेवाओं में चयनित हो चुके हैं। उन्होंने रद्द हुई एसआई भर्ती परीक्षा में भी भाग लिया था, जिसमें उन्हें 476वीं रैंक मिली थी। उनकी सफलता यह साबित करती है कि निरंतर प्रयास का परिणाम एक दिन जरूर मिलता है।
अजमेर जिले के सरवाड़ तहसील स्थित स्यार गांव के भूपेंद्र सिंह राठौर की कहानी संघर्ष और धैर्य का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। उन्होंने इस बार 342वीं रैंक हासिल की है, जबकि वर्ष 2023 में उनकी रैंक 705 थी। लगातार मेहनत से उन्होंने अपनी स्थिति में बड़ा सुधार किया। भूपेंद्र ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्हें निजी जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। गांव में जमीन विवाद को लेकर मुकदमे दर्ज हुए, दबाव बनाए गए और मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी और अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा। उनकी सफलता युवाओं को विपरीत हालात में भी डटे रहने की सीख देती है।
भीलवाड़ा जिले के गुलाबपुरा निवासी नवनीत शर्मा ने तीसरी रैंक हासिल कर प्रदेशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वर्तमान में वे अजमेर में तहसीलदार प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उनके पिता मुकेश शर्मा ग्रेड थर्ड शिक्षक हैं। नवनीत ने मुख्य परीक्षा में 282.50 अंक और इंटरव्यू में 60 अंक हासिल किए, जिससे उनका कुल स्कोर 342.50 रहा। उनकी उपलब्धि बताती है कि निरंतर अध्ययन और सटीक रणनीति से शीर्ष स्थान प्राप्त किया जा सकता है।
चूरू जिले के अभिनव सैनी ने 89वीं रैंक हासिल की है। वे वर्तमान में अजमेर में तहसीलदार प्रशिक्षण ले रहे हैं। अभिनव की कहानी खास इसलिए है क्योंकि उन्होंने लाखों रुपये के सालाना पैकेज वाली निजी नौकरी छोड़कर प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना। उन्होंने चूरू के सुजानगढ़ में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, फिर चंडीगढ़ से बीटेक किया और बाद में आईआईटी दिल्ली से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उनकी नौकरी एक मल्टीनेशनल कंपनी में लग गई थी।
अभिनव ने बताया कि उनके माता-पिता का सपना था कि वे उन्हें आरएएस अधिकारी के रूप में देखें। राजस्थान से जुड़ाव और परिवार की इच्छा ने उन्हें नौकरी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित किया। यह उनका दूसरा प्रयास था और इस बार उन्होंने सफलता हासिल कर परिवार का सपना पूरा कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि इंटरव्यू की तैयारी में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली, जिससे संभावित प्रश्नों को समझने और उत्तरों को बेहतर बनाने में सहायता मिली।
इंटरव्यू के अनुभव साझा करते हुए अभिनव ने बताया कि बोर्ड ने उनसे पिछले परिणाम के बारे में पूछा और यह भी जानना चाहा कि सफलता मिलने पर सबसे ज्यादा खुशी किसे हुई। उन्होंने उत्तर दिया कि उनकी मां सबसे अधिक खुश हुईं। जब उनसे पूछा गया कि प्रशासन में मां से क्या सीखेंगे, तो उन्होंने करुणा और संवेदनशीलता को सबसे बड़ी सीख बताया। वरिष्ठ नागरिकों के लिए योजनाओं पर सुझाव मांगने पर उन्होंने पेंशन, स्वास्थ्य और केयर होम जैसी सुविधाओं के लिए एक समग्र ढांचे की बात रखी।
सज्जनगढ़ की आकांक्षा पटेल ने ऑल राजस्थान में 689वीं रैंक और टीएसपी वर्ग में 24वीं रैंक प्राप्त की है। उन्होंने लगातार दूसरी बार आरएएस परीक्षा में सफलता हासिल की है। इससे पहले आरएएस 2023 में चयनित होकर वे तहसीलदार सेवा में आई थीं और वर्तमान में अजमेर स्थित राजस्व अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षु नायब तहसीलदार के रूप में प्रशिक्षण ले रही हैं। दो बार सफलता हासिल करना उनकी निरंतर क्षमता और मेहनत का प्रमाण है।
इस बार 17 अप्रैल को इंटरव्यू प्रक्रिया समाप्त हुई थी और उसके बाद परिणाम जारी होने की उम्मीद जताई जा रही थी। अब परिणाम जारी होने के बाद सफल उम्मीदवारों में उत्साह है, जबकि अन्य अभ्यर्थियों की नजर अब आरएएस 2026 की नई भर्ती पर टिक गई है।


