latest-newsजयपुरराजस्थान

जयपुर के झालाना में दिखा दुर्लभ ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू, वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी

जयपुर के झालाना में दिखा दुर्लभ ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू, वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी

राजधानी जयपुर के झालाना वन क्षेत्र से वन्यजीव प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। यहां एक दुर्लभ शीतकालीन प्रवासी पक्षी ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू की मौजूदगी दर्ज की गई है। हाल ही में इस उल्लू को देखे जाने की पुष्टि वन्यजीव विशेषज्ञ रोहित गंगवाल ने की है। यह प्रजाति मुख्य रूप से पूर्वी एशिया के देशों में पाई जाती है और भारत में इसका दिखाई देना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।

पूर्वी एशिया से भारत तक का सफर

ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू मुख्य रूप से पूर्वी एशिया के देशों जैसे चीन, जापान, कोरिया और आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता है। सर्दियों के मौसम में यह सीमित संख्या में दक्षिण एशिया की ओर प्रवास करता है। भारत में इसकी उपस्थिति बहुत कम स्थानों पर ही दर्ज की गई है, इसलिए राजस्थान जैसे शुष्क और अर्ध-शहरी क्षेत्र में इसका दिखाई देना अपने आप में एक महत्वपूर्ण वन्यजीव रिकॉर्ड माना जा रहा है।

2017 के बाद दोबारा दर्ज हुई मौजूदगी

वन्यजीव विशेषज्ञ रोहित गंगवाल के अनुसार, उन्होंने इस प्रजाति को पहली बार वर्ष 2017 में झालाना वन क्षेत्र में रिकॉर्ड किया था। इसके बाद कुछ वर्षों तक यह उल्लू यहां नियमित रूप से दिखाई देता रहा। हालांकि पिछले दो वर्षों से इसकी कोई भी पुष्टि नहीं हो पाई थी। लंबे अंतराल के बाद इस दुर्लभ उल्लू का फिर से दिखना न केवल पक्षी प्रेमियों के लिए बल्कि शोधकर्ताओं के लिए भी बेहद खास माना जा रहा है।

शहरी वन क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि झालाना जैसे शहरी वन क्षेत्र में ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू की वापसी इस बात का संकेत है कि यहां का पर्यावरण और जैव विविधता अब भी प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल बनी हुई है। जयपुर शहर के बीच स्थित होने के बावजूद झालाना वन क्षेत्र ने अपनी प्राकृतिक विशेषताओं को काफी हद तक संरक्षित रखा है, जिससे यहां दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियां भी आश्रय पा रही हैं।

पहचान में क्यों होती है मुश्किल

ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू आमतौर पर घने पेड़ों में छिपकर रहना पसंद करता है। इसका रंग और आकार भी आसपास के वातावरण में आसानी से घुल-मिल जाता है, जिससे इसकी पहचान करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। यही कारण है कि यह उल्लू अक्सर मौजूद होने के बावजूद नजर नहीं आता और इसकी रिकॉर्डिंग दुर्लभ हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार इसकी मौजूदगी का दर्ज होना एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण भी है।

राजस्थान के लिए अहम वन्यजीव रिकॉर्ड

राजस्थान में ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू का दर्ज होना राज्य की जैव विविधता के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। आमतौर पर राजस्थान को रेगिस्तानी और शुष्क क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, लेकिन झालाना जैसे वन क्षेत्र यह साबित करते हैं कि यहां विभिन्न प्रकार के प्रवासी और दुर्लभ पक्षियों के लिए भी अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं।

संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत

वन विभाग और पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों का दिखाई देना झालाना वन क्षेत्र में किए जा रहे संरक्षण प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में यहां वन्यजीव संरक्षण, गश्त, मानव हस्तक्षेप को नियंत्रित करने और प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसका सकारात्मक परिणाम अब प्रवासी पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी के रूप में सामने आ रहा है।

शोध और जागरूकता के नए अवसर

ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू की मौजूदगी से शोधकर्ताओं को इस प्रजाति के व्यवहार, प्रवास पैटर्न और आवास संबंधी जरूरतों को समझने का एक और अवसर मिलेगा। साथ ही यह आम लोगों और पर्यटकों में भी पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह संरक्षण के प्रयास जारी रहे, तो भविष्य में और भी दुर्लभ प्रजातियां झालाना वन क्षेत्र में देखी जा सकती हैं।

जैव विविधता के संरक्षण की जरूरत

झालाना में इस दुर्लभ उल्लू की वापसी यह भी याद दिलाती है कि शहरीकरण के बीच प्राकृतिक वन क्षेत्रों का संरक्षण कितना जरूरी है। ऐसे वन क्षेत्र न केवल वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय प्रदान करते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ओरिएंटल स्कॉप्स उल्लू की यह मौजूदगी राजस्थान के वन्यजीव इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज की जाएगी।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading