जयपुर में आयोजित 1008 कुण्डीय हनुमान महायज्ञ और 77वें जन्मदिन महोत्सव के अवसर पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद राजस्थान को एक ब्राह्मण बालक मुख्यमंत्री मिला है, जो स्वयं और उनकी धर्मपत्नी दोनों धर्म आचरण वाले हैं। जगद्गुरु ने मुख्यमंत्री के उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक क्षितिज लंबे समय तक जगमगाता रहेगा। यह कार्यक्रम जयपुर के सीकर रोड स्थित नींदड़ आवासीय योजना में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में संत, साधु और श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी पत्नी के साथ इस जन्मदिन महोत्सव में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री के लिए कही प्रेरणादायक बातें
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक भविष्य अत्यंत सुंदर और प्रभावशाली है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आलोचनाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन मुख्यमंत्री को इन सबसे अप्रभावित होकर अपने कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने प्रसिद्ध सूक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे हाथी अपने मार्ग पर चलता है और कुत्ते भौंकते रहते हैं, उसी तरह मुख्यमंत्री को भी अपने लक्ष्य पर अडिग रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि गलता गादी के अधिपति कृष्ण दास परिहारी और मुख्यमंत्री के बीच बनी त्रिवेणी की सेवा का सौभाग्य स्वयं मुख्यमंत्री को प्राप्त हुआ है, जिससे वे व्यक्तिगत रूप से बहुत प्रसन्न हैं।
गलता तीर्थ को लेकर मुख्यमंत्री से संवाद
जन्मोत्सव के दौरान गलता तीर्थ को लेकर भी चर्चा हुई। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि उन्होंने सोचा था कि राजस्थान के मुख्यमंत्री इस अवसर पर कोई अपूर्व घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं खड़े हुए और उन्होंने आश्वासन दिया कि महाराज जी ने जो आदेश दिया है, वह पहले ही पूरा हो चुका है और गलता तीर्थ को लेकर किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जयपुर में गौशाला और तुलसी पीठ की स्थापना को लेकर जो संकल्प जगद्गुरु ने लिया है, वह राम की कृपा से अवश्य पूरा होगा।
रामलला के बाद काशी और मथुरा का उल्लेख
इस जन्मोत्सव में साध्वी ऋतम्भरा भी शामिल हुईं। उनके संबोधन के बाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1984 के बाद शुरू हुआ यह आंदोलन उस समय केवल एक संभावना मात्र था। उन्होंने कहा कि साध्वी ऋतम्भरा और अन्य संतों के सामूहिक प्रयास से रामलला का मंदिर साकार हो पाया। उन्होंने आगे कहा कि अब काशी विश्वनाथ और कृष्ण जन्मभूमि मथुरा का लक्ष्य शेष है और इस दिशा में भी वे जीवन भर प्रतिबद्ध रहेंगे।
सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर तीखे बयान
रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी उम्र 76 वर्ष हो चुकी है, लेकिन अभी बहुत कार्य शेष हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पाक अधिकृत कश्मीर भारत को वापस नहीं मिल जाता, जब तक प्रत्येक हिंदू अपने सम्मान की रक्षा करने में सक्षम नहीं हो जाता और जब तक लव जिहाद से बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक वे विश्राम नहीं करेंगे। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से भी आह्वान किया कि इस दिशा में सभी को सजग और सक्रिय रहना होगा।
ओम शांति से ओम क्रांति तक का संदेश
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि अब समय बदल चुका है। उन्होंने कहा कि ओम शांति-शांति बहुत सुना जा चुका है और अब ओम क्रांति-क्रांति का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि उनका जन्म मकर संक्रांति के दिन हुआ है और वे इस परिवर्तन को युग परिवर्तन के रूप में देखते हैं।
हिंदू चेतना और सांस्कृतिक जागरण पर जोर
अपने वक्तव्य के अंतिम हिस्से में उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं शताब्दी हिंदुओं की है और यह शताब्दी उनके लिए वरदान सिद्ध होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह धार्मिक आयोजनों में नेतृत्व की भूमिका निभाई जाती है, उसी तरह सांस्कृतिक चेतना की इस यात्रा में भी संतों की भूमिका अग्रणी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हिंदू समाज अब किसी से डरने वाला नहीं है और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहेगा।


