Ram Mandir: अयोध्या में लोहे और स्टील के बिना बना राम मंदिर, दुनिया का पहला भूकंपरोधी मंदिर

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। यह मंदिर न केवल हिंदू धर्म के लिए बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसे लोहे और स्टील का उपयोग किए बिना बनाया गया है।ऐसा पहली बार है कि किसी मंदिर के निर्माण में लोहे और स्टील का उपयोग नहीं किया गया है।

राम मंदिर को बनाने में सबसे अच्छी क्वालिटी वाले ग्रेनाइट, बलुआ पत्थर और संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। इसको जोड़ने के लिए सीमेंट और चूने का उपयोग नहीं किया गया बल्कि, एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे मंदिर के पत्थर आपस में मजबूती से जुड़े हुए हैं।

राम मंदिर को 2500 साल तक भूकंप से सुरक्षित रखने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इसके लिए मंदिर की नींव को बेहद मजबूत बनाया गया है। मंदिर की नींव 15 मीटर की गहराई तक है। नींव में 12-14 मीटर तक इंजीनियर्ड मिट्टी बिछाई गई है। इसके ऊपर डेढ़ मीटर मोटी एम-35 ग्रेट मेटल प्री कंक्रीट राफ्ट बिछाया गया है। इसके बाद दक्षिण भारत से निकाले गए 6.3 मीटर मोटे ठोस ग्रेनाइट पत्थर को बिछाकर नींव को और मजूबत बनाया गया है।

राम मंदिर के निर्माण में शामिल इंजीनियरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मंदिर दुनिया का पहला भूकंपरोधी मंदिर होगा। यह मंदिर भूकंप की तीव्रता 8 तक भी झेल सकता है। राम मंदिर के निर्माण से न केवल हिंदू धर्म बल्कि दुनिया भर के लोगों को आशा और प्रेरणा मिली है। यह मंदिर एक ऐसा प्रतीक है, जो शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देता है।

विशेष विवरण:

  • 22 जनवरी 2024 को पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की।
  • मंदिर की ऊंचाई 161 फीट है।
  • मंदिर का कुल क्षेत्रफल 2.7 एकड़ है।
  • मंदिर की नींव 15 मीटर की गहराई तक है।
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