मनीषा शर्मा। राजपुरोहित सेवा न्यास, जोधपुर की ओर से समाज की प्रतिभाओं को शिक्षा के साथ संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह ने समाज में नई प्रेरणा का संचार किया। यह कार्यक्रम शनिवार को मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर पॉलिटेक्निकल कॉलेज परिसर में हुआ, जहां देशभर से आई 600 से अधिक प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। समारोह का मुख्य उद्देश्य केवल पुरस्कार देना नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों और अभिभावकों को यह समझाना था कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह संस्कार और जिम्मेदारी के साथ जुड़ी हो।
कार्यक्रम में सरकारी सेवाओं से जुड़े अनुभवी अधिकारियों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और उन्हें मेहनत, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया। ब्रह्मधाम आसोतरा के वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम महाराज का आशीर्वचन कार्यक्रम की मुख्य विशेषता रहा। उनके सानिध्य में समारोह का वातावरण आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बना रहा।
समारोह में ACP बोरानाडा आनंद सिंह राजपुरोहित ने आज के समय में बच्चों पर मोबाइल और गैजेट्स के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों को तकनीक उपलब्ध तो कराते हैं, लेकिन कई बार उसका दुरुपयोग हो जाता है। उन्होंने सलाह दी कि अभिभावक बच्चों के मोबाइल और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें, क्योंकि गलत कंटेंट बच्चों के मन और दिशा दोनों को प्रभावित कर सकता है। उनका मानना था कि मोबाइल में अच्छाई और बुराई दोनों मौजूद हैं, इसलिए बच्चों को सही उपयोग सिखाना ही सबसे बड़ा समाधान है।
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों के लिए आज के समय में IT-friendly होना जरूरी है, लेकिन इसके साथ संतुलन भी उतना ही आवश्यक है। ऑनलाइन क्लासेज, पढ़ाई और जानकारी के लिए मोबाइल उपयोगी है, परंतु अनियंत्रित उपयोग बड़े नुकसान की वजह बन सकता है। उन्होंने बताया कि कई बच्चे फोन लॉक कर रखते हैं, सोशल मीडिया पर गलत संगत में पड़ जाते हैं और धीरे-धीरे परिवार से दूरी बनाने लगते हैं। इसलिए छोटी-छोटी बातें, जैसे बच्चों के अकाउंट और कंटेंट पर ध्यान देना, उन्हें भटकाव से बचा सकती हैं।
ACP ने परिवार और बच्चों के बीच संवाद की कमी को भी बड़ी समस्या बताया। उन्होंने ऐसे मामलों का जिक्र किया, जहां कम उम्र के बच्चे पढ़ाई छोड़ प्रेम विवाह या लिव-इन में चले जाते हैं और अदालत से सुरक्षा मांगते हैं। ऐसे समय माता-पिता की बेबसी देखने लायक होती है। उनका कहना था कि गलती केवल बच्चों की नहीं, बल्कि समाज और परिवार की भी है, जो कमाई की दौड़ में बच्चों को समय नहीं दे पा रहे।
उन्होंने माता-पिता से यह भी अपील की कि बच्चों पर अनावश्यक अपेक्षाएं न थोपें, ताकि वे दबाव और अवसाद का शिकार न हों। बच्चों को प्यार, मार्गदर्शन और निगरानी—तीनों की बराबर जरूरत होती है।
समारोह में वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम महाराज ने शिक्षा और संस्कार के गहरे संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिग्री और योग्यता तभी उपयोगी है जब उसके साथ चरित्र, विनम्रता और मानवता जुड़ी हो। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ज्ञानवान होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणी होना अधिक महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार परिवार में नियमित रूप से भजन-कीर्तन और रामायण पाठ जैसी परंपराएँ परिवार के वातावरण को सकारात्मक बनाती हैं और जीवन में स्थिरता लाती हैं।
उन्होंने गुरुकुल परंपरा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जरूरत है कि शिक्षा-व्यवस्था में नैतिक मूल्यों को फिर से केंद्र में रखा जाए। केवल पढ़ाई से नहीं, बल्कि आचरण से भी समाज का निर्माण होता है।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि RTS अधिकारी डॉ. भावना पिलौवनी ने बालिका शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेटियों को अवसर दिए जाएं, आत्मनिर्भर बनाया जाए और उन्हें स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उनके अनुसार शिक्षित बालिका ही आने वाले समय का मजबूत समाज तैयार करती है।
समारोह में ADM सुरेंद्र सिंह पुनायता और डॉ. सज्जन सिंह बासनी मनना सहित कई अतिथियों ने भी अपने विचार रखे। सभी ने एक स्वर में कहा कि समाज की प्रतिभाओं को पहचानना और सम्मानित करना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का सबसे प्रभावी तरीका है।
न्यास अध्यक्ष महेंद्र सिंह तिंवरी ने बताया कि इस अवसर पर समाज के भामाशाहों का भी सम्मान किया गया, जिन्होंने शिक्षा और सामाजिक कार्यों में सहयोग दिया है। कार्यक्रम के दौरान डूंगर सिंह राजपुरोहित चामुंडा, शेर सिंह बिकरलाई, पृथ्वी सिंह धांगड़वास सहित कई दानदाताओं को सम्मानित किया गया।
समारोह में बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठ जन, मार्गदर्शक, युवा और अभिभावक उपस्थित रहे। मंच संचालन चंदन सिंह और महेंद्र सिंह खींचन ने किया। पूरे कार्यक्रम ने इस बात का संदेश दिया कि यदि शिक्षा के साथ संस्कार जुड़े रहें, तो समाज और आने वाली पीढ़ियाँ दोनों सुरक्षित और सुदृढ़ बनती हैं।


