शोभना शर्मा। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार शाम छह बजे राजस्थान के जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेंगे। उनका यह दो दिवसीय दौरा भारत की पश्चिमी सीमा की सुरक्षा, सेना के आधुनिकीकरण और संगठनात्मक सुधारों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। हाल ही में संपन्न हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां रक्षा मंत्री भारतीय सेना की तैयारियों और पश्चिमी मोर्चे की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।
पहला दिन: आर्मी स्टेशन और वॉर म्यूजियम का दौरा
जैसलमेर पहुंचने के बाद रक्षा मंत्री सबसे पहले आर्मी स्टेशन जाएंगे। यहां वे आर्मी वॉर म्यूजियम का दौरा करेंगे, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध की ऐतिहासिक झलकियां प्रदर्शित करता है। इस मौके पर वे एक नए ‘लाइट एंड साउंड शो’ का उद्घाटन भी करेंगे, जिसमें युद्ध की वीरगाथाओं को तकनीकी माध्यम से जीवंत रूप में दिखाया जाएगा। इसके बाद राजनाथ सिंह भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों से संवाद करेंगे। वे जवानों का हौसला बढ़ाने और सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात सैनिकों की जरूरतों व चुनौतियों को समझने के लिए सीधे बातचीत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री इस दौरान सीमा सुरक्षा को और सुदृढ़ करने से जुड़े नए निर्देश भी जारी कर सकते हैं।
दूसरा दिन: तनोट माता मंदिर और लोंगेवाला का दौरा
दौरे के दूसरे दिन राजनाथ सिंह तनोट माता मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। यह मंदिर भारत-पाक सीमा के पास स्थित है और 1971 के युद्ध के दौरान यहां गिरे बमों के न फटने की कथाएं आज भी श्रद्धा से जुड़ी हैं। तनोट में बीएसएफ के जवान इस मंदिर की सेवा करते हैं, इसलिए यह स्थल सेना और जनमानस दोनों के लिए आस्था का केंद्र है। इसके बाद रक्षा मंत्री लोंगेवाला सीमा चौकी का निरीक्षण करेंगे। लोंगेवाला वही ऐतिहासिक स्थल है, जहां 1971 के युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के टैंकों को रोककर अद्भुत विजय हासिल की थी। राजनाथ सिंह वहां शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देंगे और सीमा की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेंगे। वे करीब एक घंटे तक लोंगेवाला में रहेंगे और सेना के उच्च अधिकारियों से बातचीत करेंगे।
आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस: सुधार और नई रणनीति पर चर्चा
रक्षा मंत्री आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में भी शामिल होंगे, जो जैसलमेर आर्मी स्टेशन में आयोजित की जाएगी। इस बैठक का थीम है – “ईयर ऑफ रिफॉर्म्स”। इस कॉन्फ्रेंस में भारतीय सेना में चल रहे संरचनात्मक सुधारों (Structural Reforms), आधुनिक युद्ध की तकनीकी चुनौतियों और भविष्य की सैन्य जरूरतों पर गहन मंथन किया जाएगा। इस बैठक में शीर्ष कमांडर्स सेना की नई कार्यनीतियों, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Defence Manufacturing) और साइबर एवं ड्रोन युद्ध जैसी उभरती चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। रक्षा मंत्री का यह संदेश साफ होगा कि भारत की सेना को भविष्य के लिए टेक्नोलॉजिकल और टैक्टिकल रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।
रणनीतिक दृष्टि से अहम दौरा
राजस्थान का पश्चिमी इलाका, विशेषकर जैसलमेर, तनोट और लोंगेवाला, भारत की पश्चिमी सीमा रक्षा रणनीति के केंद्र में हैं। पाकिस्तान से लगती इस सीमा पर भारतीय सेना और बीएसएफ की तैनाती सुरक्षा की पहली पंक्ति मानी जाती है। राजनाथ सिंह का यह दौरा न केवल सैनिकों का मनोबल बढ़ाने वाला है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भारत किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके साथ ही, सरकार “थिएटर कमांड सिस्टम” और “सैन्य आधुनिकीकरण” की दिशा में जो कदम उठा रही है, उसे इस दौरे से और बल मिलेगा। रक्षा मंत्री की मौजूदगी से संकेत साफ है कि केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और रक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
लोंगेवाला से मिली प्रेरणा और राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा
1971 का लोंगेवाला युद्ध भारतीय सेना की शौर्य गाथा का प्रतीक है, जिसमें मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के नेतृत्व में एक छोटी टुकड़ी ने पाकिस्तान के भारी टैंक दस्ते को रोका था। राजनाथ सिंह का लोंगेवाला दौरा उस ऐतिहासिक विजय की याद को ताजा करने के साथ यह संदेश भी देगा कि भारत की सेना उसी वीरता और समर्पण की भावना के साथ आगे बढ़ रही है।आधुनिक तकनीक और ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर
रक्षा मंत्री इस दौरान आधुनिक हथियार प्रणालियों, इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स और देश में विकसित किए जा रहे हथियारों की प्रगति पर भी चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों की समीक्षा भी इस दौरे का हिस्सा है।


