मनीषा शर्मा। उदयपुर में आयोजित विद्या प्रचारिणी सभा और बीएन संस्थान के 104वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज देश की राजनीति और नेताओं के प्रति विश्वास का संकट पैदा हो गया है। इस संकट को स्वीकार कर उसे चुनौती के रूप में लेना होगा। उन्होंने कहा कि जब नेताओं के शब्द और व्यवहार में अंतर आता है, तभी जनता में अविश्वास बढ़ता है।
राजनाथ सिंह ने 2030 तक भारत के टॉप-3 इकोनॉमी बनने का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहा है। पहले दुनिया भारत की बातों को गंभीरता से नहीं लेती थी, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। अब जब भारत बोलता है, तो पूरी दुनिया सुनती है।
उन्होंने दिल्ली में हुए बम धमाके का उदाहरण देते हुए कहा कि लाल किले के पास हुए धमाके में ऐसे लोगों के नाम आए, जो व्हाइट कॉलर पेशे से जुड़े थे। डॉक्टर अपनी पर्ची पर RX लिखते थे, लेकिन उनके पास से RDX मिला। इससे साबित होता है कि केवल ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कार भी उतने ही जरूरी हैं।
राजनीति में आना एक संयोग — राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री ने कहा कि राजनीति में उनका आना पूरी तरह एक संयोग था। उन्होंने इसे “हर-हर गंगे” की कहावत से जोड़ा। जैसे कोई व्यक्ति गंगा में स्नान नहीं करना चाहता, लेकिन अचानक फिसलकर गिर जाता है और वह भी हर-हर गंगे बोल देता है, वैसा ही कुछ उनके साथ भी हुआ।
उन्होंने कहा कि वह अपने राजनीतिक जीवन में बिना सोचे-समझे वादे नहीं करते, क्योंकि झूठे आश्वासन विश्वास के संकट को और बढ़ा देते हैं।
सैनिक स्कूल के मुद्दे पर आश्वासन
उदयपुर में सैनिक स्कूल की मांग पर उन्होंने बताया कि बीएन संस्थान के दोनों स्कूलों की निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आई है। इस मामले को वह व्यक्तिगत रूप से देखेंगे और जितना संभव होगा, उतना प्रयास करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह बिना सोचे-समझे वादा नहीं करते।
नई शिक्षा नीति और संस्कार पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति ज्ञान, कौशल और मूल्यों को साथ लेकर चलती है। शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। 2018 की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 54 प्रतिशत माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षक बनाना चाहते हैं, क्योंकि शिक्षक का सम्मान हमेशा सर्वोपरि रहता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में संस्कार का बहुत महत्व होता है। जो झुकना जानता है, वही आगे बढ़ता है।
भारतीय परंपरा और सेना की संस्कृति का जिक्र
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना में सामूहिक भोजन की परंपरा social bonding का प्रतीक है। वे स्वयं प्रोटोकॉल से परे जाकर सैनिकों के बीच सहज बातचीत करना पसंद करते हैं। भारत अपने इतिहास, परंपराओं और मूल्यों पर गर्व करता है और यही उसकी असली ताकत है।
मंच पर मिली सकारात्मक ऊर्जा
कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि मंच पर बैठते ही उन्होंने सकारात्मक ऊर्जा महसूस की। देश की 60 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज़ में जाने के बाद भी ऐसा अनुभव कम ही हुआ है।
मेवाड़ से आया सख्त संदेश
कार्यक्रम में पूर्व राजपरिवार के सदस्य और विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने बिना नाम लिए कहा कि महापुरुषों के नाम का राजनीति में दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। जो लोग उनके बारे में हल्के तरीके से बोलते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसे हाल ही में राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम के बाद राजनाथ सिंह सिटी पैलेस पहुंचे, जहां लक्ष्यराज सिंह ने उनका स्वागत किया।


