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सीकर में मंच पर साथ दिखे राजेंद्र राठौड़ और गोविंद सिंह डोटासरा, शेखावाटी की राजनीति में नई तस्वीर

सीकर में मंच पर साथ दिखे राजेंद्र राठौड़ और गोविंद सिंह डोटासरा, शेखावाटी की राजनीति में नई तस्वीर

राजस्थान की राजनीति में कटुता और तीखी बयानबाजी आम बात है, खासकर जब बात भाजपा-कांग्रेस के नेताओं की हो। लेकिन 8 फरवरी 2026 को सीकर में एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। राज्य के दो बड़े प्रतिद्वंद्वी—भाजपा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा—एक मंच पर न सिर्फ साथ दिखे, बल्कि बेहद आत्मीयता और सहजता के साथ बातचीत करते नजर आए। इन दोनों नेताओं के बीच विधानसभा से लेकर चुनावी मंचों तक अक्सर तीखी नोकझोंक होती रही है, लेकिन सीकर कार्यक्रम में जो तस्वीर सामने आई वह राजनीतिक परिपक्वता और शिष्टाचार का प्रतीक कही गई।

शेखावाटी के दो दिग्गज, सदन की तल्खी के बाद मंच पर मुस्कुराहट

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र की राजनीति में राठौड़ और डोटासरा का प्रभाव किसी परिचय का मोहताज नहीं। दोनों नेताओं ने वर्षों तक एक-दूसरे के विरुद्ध चुनावी मोर्चे संभाले हैं। सदन की कार्यवाही के दौरान उनकी बहसें और तीखे तंज अक्सर सुर्खियों में रहे हैं। लेकिन सीकर में नजारा बिल्कुल अलग था। कार्यक्रम में पहुंचते ही दोनों नेता एक-दूसरे से गले मिले और लंबे समय तक हँसी-मज़ाक करते हुए बातचीत करते रहे। तस्वीरें सामने आते ही लोग कहने लगे कि यह राजस्थान की राजनीति की खूबसूरती है—जहाँ विचारधारा अलग हो सकती है, पर आपसी सम्मान की कमी नहीं होती।

मंच पर शब्दों की बाजीगरी और हल्का-फुल्का तंज

कार्यक्रम के दौरान जब दोनों नेताओं को संबोधन का अवसर मिला, तो उनकी शैली ने दर्शकों को खूब आनंदित किया।

डोटासरा का चुटीला अंदाज़

गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने पारंपरिक राजस्थानी अंदाज़ में राठौड़ की हंसी-मजाक भरी चुटकी ली। उनकी बातें सुनकर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। डोटासरा ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश किया और कहा कि चुनावी लड़ाइयों से ऊपर भी एक संबंध बना रहता है।

राठौड़ की हाजिरजवाबी

राजेंद्र राठौड़ ने भी डोटासरा के तंज का मुस्कुराते हुए जवाब दिया। उन्होंने हल्के अंदाज़ में ऐसी टिप्पणी की जिसे सुनकर डोटासरा भी अपनी हँसी नहीं रोक पाए। राठौड़ का अंदाज़ एक बार फिर लोगों को याद दिला गया कि वे हाजिरजवाबी के माहिर माने जाते हैं और किसी भी मंच को जीवंत बनाने की क्षमता रखते हैं। मंच पर दोनों के बीच की यह नोकझोंक राजनीतिक कटुता से दूर शालीनता और पारस्परिक सम्मान का प्रदर्शन थी।

राजनीति में शिष्टाचार की मिसाल

इस मुलाकात का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि यह दिखाता है कि राजस्थान की राजनीति में प्रतिस्पर्धा जरूर है, लेकिन व्यक्तिगत रिश्तों में दूरियाँ नहीं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि राठौड़ और डोटासरा की यह गर्मजोशी बताती है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वस्थ संवाद और सम्मान हमेशा बने रहना चाहिए। एक वर्ग का मानना है कि दोनों नेताओं का यह व्यवहार आने वाले समय में राजनीतिक संस्कृति के लिए सकारात्मक संकेत है।

सोशल मीडिया पर चर्चा: “ये रिश्ता क्या कहलाता है?”

कार्यक्रम की तस्वीरें वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने इसे “राजनीति में परिपक्वता” बताया, तो कुछ ने मजाक में पूछा— “क्या पर्दे के पीछे कोई नई रणनीति तैयार हो रही है?” कुछ ने इसे आगामी निकाय और पंचायत चुनाव से पहले की “रणनीतिक शांति” माना। हालाँकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह मुलाकात केवल एक सामाजिक कार्यक्रम का हिस्सा थी और इसमें अनावश्यक राजनीतिक अर्थ नहीं जोड़ने चाहिए। फिर भी जनता और समर्थकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि इतने वर्षों के तीखे राजनीतिक संघर्ष के बाद यह सहजता किस ओर इशारा करती है।

सीकर कार्यक्रम में राठौड़–डोटासरा की जुगलबंदी

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि दोनों नेताओं की उपस्थिति ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। उनकी बातचीत, मंच से दिए गए हल्के-फुल्के तंज और परस्पर हंसी-मज़ाक ने साफ दिखाया कि राजनीतिक विरोध हमेशा व्यक्तिगत संबंधों में दीवार नहीं बनता। लोगों का कहना था कि यह मुलाकात साबित करती है कि दोनों नेता न सिर्फ अनुभवशील हैं, बल्कि यह भी जानते हैं कि राजनीति में कब तलवारें चलानी हैं और कब गले मिलना है। मंच पर चाहे जितनी भी टांग खींची गई हो, दोनों की आँखों और व्यवहार में एक-दूसरे के प्रति सम्मान स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

सीकर का यह कार्यक्रम राजस्थान की राजनीति का वह रूप दिखाता है, जहाँ कटुता से परे एक दोस्ती और भाईचारे की झलक भी मिलती है।
राजेंद्र राठौड़ और गोविंद सिंह डोटासरा की यह मुलाकात न सिर्फ चर्चा का विषय बनी, बल्कि इसने राजनीतिक संस्कृति के सकारात्मक पक्ष को भी उजागर किया।

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