मनीषा शर्मा। Rajasthan High Court ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के सरकारी आवासों में नियम विरुद्ध तरीके से रह रहे कर्मचारियों के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से कहा है कि वह ऐसे सभी कर्मचारियों की जानकारी शपथ पत्र के साथ अदालत में पेश करे, जिन्होंने निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बावजूद यूनिवर्सिटी के आवास खाली नहीं किए हैं। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो पेनल्टी की राशि सीधे रजिस्ट्रार की सैलरी से वसूली जाएगी। अदालत ने 30 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने राजस्थान यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
मामले की सुनवाई जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ में हुई। अदालत ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वह यह बताएं — कितने कर्मचारी और अधिकारी ऐसे हैं जो नियत समय सीमा खत्म होने के बाद भी सरकारी क्वार्टर में रह रहे हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है और क्या पेनल्टी या नोटिस जारी किए गए हैं। कोर्ट ने रजिस्ट्रार को आदेश दिया कि वे यह जानकारी शपथ पत्र के साथ पेश करें ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि रजिस्ट्रार ने इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की तो रजिस्ट्रार की तनख्वाह से पेनल्टी की राशि वसूली जाएगी।
कर्मचारी सुभाष राठी की याचिका पर सुनवाई
यह मामला यूनिवर्सिटी कर्मचारी सुभाष राठी की याचिका पर सुनवाई के दौरान उठा। उन्होंने आरोप लगाया था कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनके साथ भेदभावपूर्ण कार्रवाई की है। राठी ने कहा कि यूनिवर्सिटी परिसर में कई अन्य कर्मचारी और अधिकारी भी समय सीमा से अधिक समय तक आवासों में रह रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने केवल उन्हीं पर कार्रवाई की। याचिकाकर्ता का कहना था कि उनके खिलाफ 1.5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है, जबकि अन्य कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
कोर्ट ने दिखाई सख्ती, रजिस्ट्रार पर डाली जिम्मेदारी
अदालत ने रजिस्ट्रार से पूछा कि यदि ऐसे अन्य कर्मचारी भी अवैध रूप से आवास में रह रहे हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने कहा कि सरकारी संपत्ति का नियम विरुद्ध उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने रजिस्ट्रार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर निर्धारित समय में रिपोर्ट और कार्रवाई नहीं की गई तो जो पेनल्टी अवैध रूप से रह रहे कर्मचारियों से वसूल की जानी है, वह सीधे रजिस्ट्रार की सैलरी से काटी जाएगी। अदालत ने यह भी जोड़ा कि “कानून का एक ही पैमाना होगा, किसी एक कर्मचारी को निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है।”
30 दिन में करनी होगी कार्रवाई, अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को
अदालत ने निर्देशों की पालना के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन को 30 दिन का समय दिया है। इस अवधि में रजिस्ट्रार को शपथ पत्र के साथ पूरी जानकारी पेश करनी होगी कि किन कर्मचारियों ने समय सीमा खत्म होने के बाद भी आवास खाली नहीं किया है और उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है। मामले की अगली सुनवाई की तारीख 31 अक्टूबर तय की गई है। अदालत ने कहा है कि अगली पेशी में प्रशासन की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का आदेश पारित किया जाएगा।
डेढ़ लाख की पेनल्टी बनी विवाद की जड़
दरअसल, याचिकाकर्ता सुभाष राठी को 28 सितंबर 2022 को यूनिवर्सिटी परिसर में डी-9 आवास एक वर्ष के लिए आवंटित हुआ था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद भी वे आवास में बने रहे, जिसके बाद रजिस्ट्रार ने उन पर 1.5 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई। राठी का कहना था कि उनके साथ अन्य कर्मचारियों की तुलना में भेदभाव किया गया है। उन्होंने बताया कि कई कर्मचारी वर्षों से आवास में रह रहे हैं लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा राठी को आवास आवंटित होने के बाद से उन्हें एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) भी नहीं दिया गया, जो नियमों के खिलाफ है।
सरकारी आवासों पर अवैध कब्जे पर सख्त रुख
अदालत का यह आदेश सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से यूनिवर्सिटी के सरकारी आवासों पर कर्मचारियों का अनधिकृत कब्जा बना हुआ है। कई मामलों में रिटायरमेंट या ट्रांसफर के बाद भी आवास खाली नहीं किए गए। अब अदालत के आदेश के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन को यह बताना होगा कि उन्होंने ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की और कितने कर्मचारियों से पेनल्टी या किराया वसूला गया।
प्रशासनिक जवाबदेही तय
इस मामले में अदालत ने सिर्फ कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि प्रशासन पर भी जवाबदेही तय की है। रजिस्ट्रार को सीधे जिम्मेदार ठहराना इस बात का संकेत है कि अदालत चाहती है कि प्रशासनिक लापरवाही पर भी अंकुश लगाया जाए। यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो सीधे शीर्ष अधिकारियों की सैलरी से पेनल्टी वसूली जाएगी। यह आदेश भविष्य में अन्य सरकारी संस्थानों के लिए भी नजीर बन सकता है।


