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राजस्थान शिक्षा गुणवत्ता में तीसरे स्थान पर, दो वर्षों में बड़ी छलांग

राजस्थान शिक्षा गुणवत्ता में तीसरे स्थान पर, दो वर्षों में बड़ी छलांग

मनीषा शर्मा। राजस्थान ने शिक्षा गुणवत्ता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा गुणवत्ता रैंकिंग में राज्य तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि दिखाती है कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नीतियां, नवाचार और शैक्षिक सुधार कितने प्रभावी साबित हुए हैं। पहले राजस्थान 12वें स्थान पर था, लेकिन अब लंबी छलांग लगाते हुए शीर्ष तीन राज्यों में शामिल हो गया है।

यह जानकारी शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने टोंक जिले के एक निजी रिसोर्ट में आयोजित पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की आमुखीकरण कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बच्चों के जीवन में मानवीय मूल्यों और व्यवहारिक ज्ञान का विकास भी होना चाहिए।

शिक्षा को मानवीय मूल्यों और व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ने पर जोर

मंत्री दिलावर ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों के चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास से जुड़ा है। शिक्षा तभी संपूर्ण मानी जाएगी जब वह बच्चों को न केवल योग्य, बल्कि नैतिक और जिम्मेदार नागरिक भी बनाए। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ बच्चों में व्यवहारिक शिक्षा, जीवन कौशल और सामाजिक समझ विकसित करनी होगी, ताकि वे किसी भी स्तर पर पीछे न रहें।

राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में कई नवाचारी कदम उठाए हैं। इसका परिणाम है कि बच्चों में नैतिक मूल्यों के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।

सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम

मदन दिलावर ने कहा कि राजस्थान का 12वें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार शिक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनकी सरकार का उद्देश्य है कि ऐसा वातावरण तैयार हो जहां बच्चे अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य और देश का नाम रोशन करें।

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों में सर्वांगीण शिक्षा—शारीरिक, मानसिक, नैतिक, सामाजिक और व्यवहारिक—का विकास अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे ही बच्चों के भविष्य की नींव तैयार करते हैं।

तीन दिवसीय कार्यशाला में मानवीय मूल्यों पर विशेष फोकस

प्रधानाचार्यों की इस तीन दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला में शिक्षकों को समाज की समस्याओं के समाधान में मानवीय मूल्यों की महत्ता के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

मंत्री ने बताया कि प्रेम, करुणा, सत्य, अहिंसा, सम्मान और जिम्मेदारी जैसे गुण किसी भी समाज की आधारशिला होते हैं। यदि बच्चों में बचपन से ही ये गुण विकसित किए जाएं तो वे मजबूत नैतिक निर्णय लेने में सक्षम होंगे और पर्यावरण व समाज के प्रति सकारात्मक योगदान कर सकेंगे।

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