शोभना शर्मा। राजस्थान सरकार ने पुलिस महकमे में एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए नौ पुलिस निरीक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी है। यह फैसला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा राज्य सेवा में कार्यरत अधिकारियों की कार्यशैली, ईमानदारी और कार्य निष्पादन की गहन समीक्षा के बाद लिया गया। इस फैसले के तहत जिन पुलिस निरीक्षकों पर गंभीर आरोप थे, उन्हें सेवा काल पूरा होने से पूर्व ही जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया है।
गृह विभाग की ओर से बुधवार, 6 अगस्त को इसकी आधिकारिक पुष्टि की गई। बताया गया कि यह कदम राज्य सेवा की शुद्धता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने कुल 37 विचाराधीन प्रकरणों का निस्तारण करते हुए इनमें से 9 पुलिस निरीक्षकों को सेवा से बाहर करने की सिफारिश को मंजूरी दी।
सरकार ने क्यों दिया कंपलसरी रिटायरमेंट?
राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जिन अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है, उनकी कार्यशैली, कार्य निष्पादन, सत्यनिष्ठा, विभागीय जांच और वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्टों की समीक्षा के आधार पर यह निर्णय लिया गया। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उच्च स्तरीय समिति ने इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार कर्मचारियों की अक्षमता और भ्रष्टाचार को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रही है। इसीलिए केवल पुलिस महकमे ही नहीं, बल्कि अन्य प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।
IAS और RAS अधिकारियों पर भी कार्रवाई की शुरुआत
पुलिस निरीक्षकों के अलावा, एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी के खिलाफ नियम विरुद्ध भू-आवंटन मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री ने अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 की धारा 8 के अंतर्गत इस कार्रवाई की मंजूरी दी है।
इसी क्रम में राज्य सरकार ने छह अन्य अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति दी है। इनमें राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) और लेखा सेवा के अधिकारी शामिल हैं। इन पर भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच की अनुमति भी प्रदान की गई है।
सेवारत अधिकारियों पर विभागीय जांच
मुख्यमंत्री शर्मा ने विभागीय अनुशासन बनाए रखने के लिए सेवारत 13 अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए हैं। इन अधिकारियों की वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकी गई हैं। यह कार्रवाई राजस्थान सेवा नियमों के अंतर्गत सीसीए नियम 16 के तहत की गई है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी गिरी गाज
राज्य सरकार केवल वर्तमान अधिकारियों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि पूर्व अधिकारियों के लंबित मामलों का भी निस्तारण किया गया है। पेंशन नियमों के तहत पांच सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने का निर्णय लिया गया है। इनमें से एक अधिकारी को भ्रष्टाचार में दोषी पाए जाने पर उनकी संपूर्ण पेंशन स्थायी रूप से रोक दी गई है। इसके अतिरिक्त नौ मामलों में 14 सेवानिवृत्त अधिकारियों पर प्रमाणित आरोप सिद्ध होने पर अनुशासनात्मक जांच रिपोर्ट को स्वीकृति प्रदान की गई है।
क्या होता है कंपलसरी रिटायरमेंट?
कंपलसरी रिटायरमेंट यानी अनिवार्य सेवानिवृत्ति एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी कर्मचारी को सेवा काल पूर्ण होने से पहले ही जबरन सेवा से हटाया जाता है। यह बर्खास्तगी जैसी ही होती है, लेकिन इसे रिटायरमेंट के रूप में लागू किया जाता है, जिससे कर्मचारी को सेवा से बाहर करने का कारण सरकारी नियमों के अनुरूप औपचारिक रूप देता है। यह कदम तब उठाया जाता है जब कर्मचारी की कार्यक्षमता असंतोषजनक हो, भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हों या उनके खिलाफ गंभीर विभागीय जांच चल रही हो।