मनीषा शर्मा। राजस्थान के हजारों मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAAY) के तहत पंजीकृत राजस्थान के मरीज गुजरात के अधिकृत अस्पतालों में भी फ्री और कैशलेस इलाज की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने ‘आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी’ लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत 15 दिसंबर से यह व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।
इस फैसले से खासतौर पर उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जो कैंसर, किडनी, हार्ट डिजीज और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए गुजरात के अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। अब तक राजस्थान के आयुष्मान कार्ड धारकों को गुजरात में इलाज के दौरान भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें बिना भुगतान के इलाज मिल सकेगा।
सांसद के पत्र के बाद मिला समाधान
दरअसल, उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने 20 नवंबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया था कि राजस्थान के आयुष्मान कार्ड धारकों को गुजरात में योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि दक्षिण राजस्थान के बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए गुजरात जाते हैं। सांसद ने आग्रह किया था कि राजस्थान सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि मरीजों को दूसरे राज्य में भी फ्री इलाज की सुविधा मिल सके।
मुख्यमंत्री ने इस पत्र पर गंभीरता से विचार करते हुए 12 दिसंबर को प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके बाद सरकार ने तुरंत आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी लागू करने का निर्णय लिया, जिससे अब राजस्थान के आयुष्मान कार्ड धारक गुजरात में भी कैशलेस इलाज करवा सकेंगे।
गंभीर रोगियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले से उन मरीजों को सबसे अधिक लाभ होगा, जिन्हें जटिल और महंगे इलाज की जरूरत होती है। कैंसर, किडनी ट्रांसप्लांट, हार्ट सर्जरी और न्यूरोलॉजी से जुड़े इलाज के लिए कई मरीज गुजरात के बड़े निजी और सरकारी अस्पतालों में जाते हैं। अब योजना के तहत पंजीकृत मरीजों को 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवरेज मिलेगा, जिससे इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी।
इससे न केवल मरीजों की आर्थिक परेशानी कम होगी, बल्कि समय पर और बेहतर इलाज सुनिश्चित हो सकेगा। खास बात यह है कि मरीजों को गुजरात में इलाज कराने के लिए किसी अलग प्रकार के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। राजस्थान का आयुष्मान कार्ड ही इलाज के लिए मान्य होगा।
सांसद को मिली थीं लगातार शिकायतें
सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने अपने पत्र में यह भी बताया था कि उन्हें लोकसभा क्षेत्र के कई लोगों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। मरीजों का कहना था कि राजस्थान आयुष्मान योजना और आयुष्मान वय वंदना कार्ड होने के बावजूद गुजरात में इलाज के लिए उन्हें भुगतान करना पड़ता है। कई मामलों में निजी अस्पतालों ने योजना को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिससे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा था।
इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सांसद ने राजस्थान के आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए गुजरात के निजी अस्पतालों में भी फ्री इलाज की सुविधा लागू करने का आग्रह किया था, जिसे अब सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
राजस्थान में 1.34 करोड़ परिवार योजना से जुड़े
राजस्थान में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना का दायरा काफी बड़ा है। वर्तमान में राज्य में करीब 1.34 करोड़ परिवार इस योजना में पंजीकृत हैं। योजना के तहत हर दिन औसतन 8200 मरीजों को इलाज की सुविधा मिल रही है, जिस पर लगभग 9.42 करोड़ रुपये प्रतिदिन खर्च किए जा रहे हैं। यह योजना प्रदेश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में से एक बन चुकी है।
स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी लागू करना राजस्थान सरकार का एक दूरदर्शी निर्णय है। इससे न केवल मरीजों को दूसरे राज्य में बेहतर इलाज का विकल्प मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी व्यापक होगी। यह फैसला राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
कुल मिलाकर, 15 दिसंबर से लागू होने वाली यह व्यवस्था राजस्थान के मरीजों के लिए एक बड़ा सहारा साबित होगी। गुजरात में फ्री कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार मिल सकेगा।


