राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड से जुड़ी OMR शीट गड़बड़ी के मामले में कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेहद गंभीर बताया है और पिछले दो वर्षों में हुई सभी भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
गहलोत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय पर सामने आई है, जब हाल ही में कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने सार्वजनिक मंच से दावा किया था कि भजनलाल शर्मा सरकार के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। मंत्री ने कहा था कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान लगातार पेपर लीक हुए, जबकि वर्तमान सरकार में भर्ती परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी रही हैं। इसी बयान के जवाब में गहलोत ने मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
एक्स पर गहलोत का बयान, व्यवस्था पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि कर्मचारी चयन बोर्ड में ओएमआर शीट बदलने का मामला पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि एसओजी की रिपोर्ट के अनुसार यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2018 से शुरू होकर 2026 तक चलता रहा। यह तथ्य अपने आप में दर्शाता है कि यह कोई एक-दो साल की चूक नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही गंभीर गड़बड़ी है। गहलोत ने लिखा कि जब इतने लंबे समय तक यह खेल चलता रहा, तो यह मानना कठिन है कि इसकी जानकारी किसी को नहीं थी। इससे न केवल बोर्ड की कार्यप्रणाली, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
वही स्टाफ, वही सिस्टम, फिर भरोसा कैसे?
गहलोत ने इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि जिन कर्मचारियों की भूमिका इस ओएमआर शीट घोटाले में सामने आई है, वे वर्ष 2024 और 2025 में भी कर्मचारी चयन बोर्ड में पदस्थ थे और सक्रिय रूप से कार्य कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जब वही स्टाफ और वही सिस्टम इन वर्षों में भी भर्ती परीक्षाओं का संचालन कर रहा था, तो उन परीक्षाओं की शुचिता पर संदेह स्वाभाविक है। गहलोत ने यह भी उल्लेख किया कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लंबे समय से यह शिकायत कर रहे हैं कि हाल के वर्षों में भर्ती परीक्षाओं की कट-ऑफ असामान्य रूप से अधिक रही है। इससे अभ्यर्थियों के मन में यह आशंका पैदा हो रही है कि कहीं न कहीं चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी हो सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, इन शंकाओं का समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है, ताकि युवाओं का भरोसा सिस्टम में बना रह सके।
सरकार से सभी परीक्षाओं की जांच की मांग
अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि नए खुलासे के बाद 2024 और 2025 में आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की गंभीर और गहन जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि यह जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और निर्दोष अभ्यर्थियों के साथ अन्याय न हो। गहलोत ने यह भी कहा कि युवाओं का भविष्य इन परीक्षाओं से जुड़ा हुआ है और यदि इन पर से विश्वास उठ गया, तो इसका सामाजिक और मानसिक प्रभाव बहुत गहरा होगा। इसलिए सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर फैसला लेना चाहिए।
कांग्रेस शासन में सख्त कानून और कार्रवाई का दावा
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी जैसे मामलों से निपटने के लिए देश का सबसे सख्त कानून बनाया था। इस कानून में दोषियों के लिए उम्रकैद की सजा, संपत्ति जब्ती और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया था। गहलोत के अनुसार, कांग्रेस शासनकाल में एसओजी ने 250 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया था और कई मामलों में पेपर लीक माफियाओं की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि युवाओं के हित में जहां जरूरत पड़ी, वहां परीक्षाएं रद्द करने जैसे कठोर फैसले भी लिए गए।
दोषी कोई भी हो, सजा तय हो: गहलोत
अशोक गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्याय के मामले में राजनीति आड़े नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे कांग्रेस का शासन हो या भाजपा का, जिसने भी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की है, उसे कानून के तहत सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नए सख्त कानून का उद्देश्य ही यही है कि भविष्य में कोई भी भर्ती प्रक्रिया से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। गहलोत ने उम्मीद जताई कि वर्तमान सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निष्पक्ष जांच के आदेश देगी।
युवाओं के भरोसे की परीक्षा
ओएमआर शीट गड़बड़ी का यह मामला केवल एक प्रशासनिक या कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लाखों युवाओं के भरोसे से जुड़ा हुआ प्रश्न है। भर्ती परीक्षाएं युवाओं के लिए जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होती हैं। ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी न केवल उनके करियर को प्रभावित करती है, बल्कि व्यवस्था के प्रति उनके विश्वास को भी तोड़ देती है।


