शोभना शर्मा। राजस्थान की सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने वाली मिड डे मील योजना एक बार फिर बड़े घोटाले के कारण सुर्खियों में है। इस योजना में 2000 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मामले की जांच के बाद केस दर्ज किया है, जिसमें कुल 21 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इस मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है, क्योंकि आरोपियों में भाजपा नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह यादव के दोनों बेटे शामिल हैं।
एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार, राजेंद्र सिंह यादव के बेटों मधुर यादव और त्रिभुवन यादव पर कॉनफैड के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर मिड डे मील योजना में बड़े स्तर पर घोटाला करने के आरोप हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सरकारी फंड के दुरुपयोग, सप्लाई में गड़बड़ी और फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। यह घोटाला बच्चों के पोषण से जुड़ी एक अहम योजना से संबंधित होने के कारण और भी गंभीर माना जा रहा है।
राजेंद्र सिंह यादव मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। 66 वर्षीय राजेंद्र यादव का जन्म नैनीताल जिले के किच्छा गांव में हुआ था, जो पहले उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। उत्तराखंड के गठन के बाद यह क्षेत्र नए राज्य में शामिल हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई नैनीताल से ही की। उनका परिवार व्यवसाय से जुड़ा रहा है। उनके पिता भी बिजनेसमैन थे और उनके दोनों बेटे भी लंबे समय से व्यापारिक गतिविधियों में सक्रिय हैं।
करीब बीस साल पहले राजेंद्र सिंह यादव राजस्थान आए और जयपुर के पास कोटपूतली में बस गए। यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। कोटपूतली आने के बाद वे कांग्रेस पार्टी से जुड़े और सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर कोटपूतली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें अच्छी संख्या में वोट मिले, लेकिन वे मात्र 893 मतों के अंतर से हार गए।
इसके बाद राजेंद्र सिंह यादव लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 24,687 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने 13,876 मतों से जीत हासिल की। हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बेहद करीबी मुकाबले में सिर्फ 321 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
राजेंद्र सिंह यादव पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। लगातार दूसरी बार विधायक बनने के बाद उन्हें गहलोत मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। शुरुआत में उन्हें मोटर गैराज, भाषा, आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। बाद में वे उच्च शिक्षा मंत्री और गृह राज्य मंत्री भी बने। इसके अलावा वे बांसवाड़ा, डूंगरपुर और नागौर जैसे जिलों के प्रभारी मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
करीब तीन साल पहले मिड डे मील योजना में गड़बड़ियों को लेकर पहला बड़ा विवाद सामने आया था। उस समय आयकर विभाग ने राजेंद्र यादव के कोटपूतली, जयपुर और उत्तराखंड सहित एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस वक्त वे गहलोत सरकार में मंत्री थे। आयकर विभाग की कार्रवाई में लगभग 2.90 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई थी और करीब 110 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा हुआ था। बाद में उनके बेटों ने लगभग 17 करोड़ रुपये की राशि सरेंडर की थी।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में राजेंद्र सिंह यादव भी शामिल थे। मार्च 2024 में उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा जॉइन कर ली थी। उस समय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दबाव के चलते उन्होंने पार्टी बदली है। हालांकि भाजपा में शामिल होने के बाद भी उन्हें या उनके परिवार को इस मामले में कोई राहत नहीं मिली।


