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राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला: ACB ने बढ़ाया दायरा, 10 गिरफ्तार, IAS सुबोध अग्रवाल की तलाश तेज

राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला: ACB ने बढ़ाया दायरा, 10 गिरफ्तार, IAS सुबोध अग्रवाल की तलाश तेज

राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में भ्रष्टाचार की परतें खुलने का सिलसिला लगातार जारी है। करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले में एसीबी, ईडी और सीबीआई एक साथ जांच कर रहे हैं। मंगलवार को हुई व्यापक छापेमारी के बाद इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। एसीबी ने मंगलवार को चीफ इंजीनियर सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने वाले मुख्य आरोपी मुकेश पाठक को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से देर रात पकड़ा गया।

इन गिरफ्तारी के बाद बुधवार को सभी नौ आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। एसीबी ने पांच दिन की रिमांड मांगी, लेकिन कोर्ट ने तीन दिन की रिमांड मंजूर की। बचाव पक्ष ने कोर्ट में यह दलील दी कि वे टेंडर कभी एक्जीक्यूट ही नहीं हुए और सभी स्तर पर वर्क ऑर्डर की जांच की गई थी। इसके बावजूद कोर्ट ने जांच एजेंसी के तर्कों पर सहमति जताते हुए तीन दिन का पुलिस रिमांड दिया।

IAS सुबोध अग्रवाल की खोज, मोबाइल बंद करके गायब

घोटाले की जांच में सबसे अहम मोड़ तब आया जब एसीबी की टीम ने मंगलवार शाम रिटायर्ड IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल के जयपुर और दिल्ली स्थित आवासों पर दबिश दी। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि वे सोमवार रात करीब नौ बजे घर से निकल गए और उन्होंने तभी मोबाइल फोन भी बंद कर दिया था।

सूत्रों के अनुसार, सुबोध अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और एसीबी डीजी को पत्र भेजकर खुद को निर्दोष बताया है। लेकिन एसीबी ने उनके खिलाफ जांच तेज कर दी है और उनकी लोकेशन ट्रैक की जा रही है। एसीबी टीम विभाग के एसई जितेंद्र शर्मा और तत्कालीन एससी मुकेश गोयल की भी तलाश में जुटी है। माना जा रहा है कि ये अधिकारी पूरे घोटाले की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

फर्जी प्रमाण पत्रों से करोड़ों के टेंडर हासिल करने का आरोप

जांच कमेटी की रिपोर्ट ने जल जीवन मिशन प्रोजेक्ट में हुए भ्रष्टाचार की गंभीरता को साफ कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इरकॉन कंपनी के नाम पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार किए गए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर दो हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट कार्यों के लिए टेंडर आवंटित किए गए।

2023 में जलदाय विभाग को जयपुर रीजन प्रथम, जयपुर रीजन द्वितीय, नागौर प्रोजेक्ट और अन्य प्रोजेक्ट विंगों में घटिया निर्माण और फर्जी अनुभव दस्तावेज जमा करने की कई शिकायतें मिली थीं। आरोप है कि शाहपुरा की श्रीगणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्रीश्याम ट्यूबवेल कंपनी ने इरकॉन के नाम से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर लगभग 900 करोड़ के टेंडर हासिल किए थे।

किरोड़ी लाल मीणा के धरने से मामला राजनीतिक रूप से गर्माया

इस मामले की शुरुआत 20 जून 2023 को मानी जाती है, जब राजधानी जयपुर के अशोक नगर थाने के बाहर सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इस घोटाले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर दो दिन तक धरना दिया। इसके बाद मामला बेहद तेज़ी से राजनीतिक रूप लेता गया और कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से आरोपों और प्रतिक्रिया का दौर शुरू किया। विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भी यह मुद्दा प्रमुख राजनीतिक हथियार बना रहा।

ईडी की गिरफ्तारी और सुप्रीम कोर्ट की जमानत

24 अप्रैल 2025 को ईडी ने इस मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को करीब आठ घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी भी राज्य की राजनीति में बड़ा मोड़ मानी गई थी। बाद में तीन दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री को जमानत दी। फिलहाल वे जमानत पर हैं और जांच आगे बढ़ रही है।

एक बार फिर गिरफ्तारी का दौर शुरू, 15 ठिकानों पर छापे

इस सप्ताह एसीबी ने दिल्ली, छत्तीसगढ़ और झारखंड में लगभग 15 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इसके दौरान दस लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें कई चीफ इंजीनियर, वित्तीय सलाहकार और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में हुए इस कथित घोटाले ने राजस्थान प्रशासन और राजनीति दोनों में गहरी चोट छोड़ी है। एसीबी और अन्य जांच एजेंसियां लगातार कागजात, डिजिटल डेटा और वित्तीय लेनदेन खंगाल रही हैं, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच और भी गंभीर मोड़ ले सकती है।

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