शोभना शर्मा। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में 19 सितंबर से लापता चल रही 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से संबंधित हैबियस कॉर्पस याचिका का निपटारा करते हुए उसे उसके माता-पिता को सौंप दिया है। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट शर्त रखी कि लड़की की 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले उसकी इच्छा के विरुद्ध शादी नहीं कराई जाएगी। यह आदेश 6 नवंबर 2025 को जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ द्वारा पारित किया गया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार या जबरन शादी की कोई सूचना मिलती है, तो माता-पिता के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
याचिका का पृष्ठभूमि: लापता बेटी की तलाश में मां ने लगाई गुहार
यह मामला चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। यहां रहने वाली मीना (परिवर्तित नाम) ने अपनी 16 वर्षीय लापता बेटी की बरामदगी के लिए हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी। याचिका में राज्य सरकार, चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक, भदेसर थानाधिकारी और नाहरगढ़ निवासी एक अन्य व्यक्ति को भी पक्षकार बनाया गया था। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया कि उनकी नाबालिग बेटी कई दिनों से घर से गायब है और उसे बरामद कर सुरक्षित रूप से माता-पिता को सौंपा जाए। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को लड़की की तलाश के आदेश दिए और जब वह बरामद हुई, तो उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
कोर्ट में नाबालिग ने रखा अपना पक्ष
अदालत में पेश की गई 16 वर्षीय नाबालिग ने न्यायाधीशों से सीधे बातचीत की। उसने बताया कि उसके माता-पिता उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे थे और जबरन उसकी शादी कराने की कोशिश कर रहे थे। लड़की ने यह भी कहा कि वह अभी 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर चुकी है और उसकी मर्जी के बिना विवाह कराना गलत है। नाबालिग ने अदालत से कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ तभी जाना चाहती है, जब वे यह वचन दें कि 18 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले उसकी शादी उसकी सहमति के बिना नहीं की जाएगी। उसने यह भी कहा कि उसे डर है कि अगर वह घर लौटती है, तो उसके साथ दुर्व्यवहार हो सकता है।
माता-पिता ने दिया कोर्ट में वचन
नाबालिग की मां के वकील ने अदालत को बताया कि कॉर्पस के माता-पिता ने यह वचन दिया है कि वे बेटी के साथ अच्छा व्यवहार करेंगे और उसकी इच्छा के विपरीत कोई विवाह नहीं कराएंगे। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि नाबालिग की भलाई और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड में दर्ज करते हुए इसे शपथ के समान मानते हुए नाबालिग को उसकी मां की अभिरक्षा में सौंपने का आदेश दिया।
अदालत का फैसला और निर्देश
जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि नाबालिग को उसके माता-पिता के पास भेजा जा सकता है, लेकिन यह सख्त शर्त रहेगी कि 18 वर्ष की आयु से पहले उसकी सहमति के बिना कोई शादी नहीं होगी। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में यह पाया गया कि माता-पिता या परिवार ने नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार किया है या जबरन शादी कराई है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि नाबालिग की सुरक्षा और भलाई पर स्थानीय प्रशासन नजर रखे।


