राजस्थान के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने दो बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत करीब 92,497 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इन परियोजनाओं में जयपुर मेट्रो फेज-2 और HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड से जुड़ी संशोधित लागत शामिल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस वार्ता में इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से राजस्थान के शहरी और औद्योगिक ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।
जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना को लेकर लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था, जिसे अब केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद गति मिल गई है। इस परियोजना के तहत प्रहलादपुरा से तोड़ी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस रूट पर कुल 36 स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें से 34 एलिवेटेड और 2 अंडरग्राउंड होंगे। परियोजना की कुल लागत 13,038 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है और इसे पूरा करने में लगभग साढ़े पांच साल का समय लगने का अनुमान है। यह परियोजना शहर के तेजी से बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ आधुनिक शहरी परिवहन प्रणाली को मजबूत करेगी।
इस मेट्रो परियोजना का क्रियान्वयन राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMRCL) द्वारा किया जाएगा, जो केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त उपक्रम है। फेज-2 का सीधा इंटरचेंज फेज-1 से खासा कोठी स्टेशन पर होगा, जिससे यात्रियों को निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी। यह कनेक्टिविटी जयपुर के विभिन्न हिस्सों को एक साथ जोड़ते हुए शहर के विकास को नई गति प्रदान करेगी।
मेट्रो का यह नया कॉरिडोर शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों को कवर करेगा, जिनमें तोड़ी मोड़, हरमाड़ा, विद्याधर नगर, चोमू पुलिया, सिंधी कैंप, सिविल लाइंस, दुर्गापुरा, जयपुर एयरपोर्ट, सीतापुरा और प्रहलादपुरा जैसे इलाके शामिल हैं। इसके अलावा यह लाइन सैटेलाइट टाउन और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों जैसे जैतपुरा और रीको के हुक्कन इंडस्ट्रियल एरिया तक भी पहुंच बनाएगी। इससे न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में जयपुर शहर के ट्रैफिक पर बड़ा असर डालेगी। अनुमान है कि वर्ष 2055 तक यह मेट्रो लाइन करीब 2.4 लाख वाहनों को सड़कों से कम कर सकती है, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलने से शहर की जीवनशैली और पर्यावरणीय स्थिति में सुधार होगा।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड की संशोधित परियोजना लागत को भी मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लागत 79,459 करोड़ रुपये तय की गई है, जिसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की इक्विटी हिस्सेदारी 19,600 करोड़ रुपये होगी। राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में स्थित यह रिफाइनरी 9 एमएमटीपीए क्षमता के साथ तैयार है और जुलाई 2026 में इसके व्यावसायिक संचालन शुरू होने की संभावना है।
यह रिफाइनरी परियोजना न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत पहले से ही 258 एमएमटीपीए की क्षमता के साथ दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, और इस नई परियोजना के शुरू होने से यह क्षमता और मजबूत होगी। रिफाइनरी के लिए मुंद्रा से कच्चे तेल की पाइपलाइन भी पूरी तरह चालू हो चुकी है, जिससे संचालन में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी।
इस परियोजना के तहत पेट्रोल, डीजल, एलपीजी के साथ-साथ पॉलीप्रोपाइलीन, एलएलडीपीई, एचडीपीई, बेंजीन और ब्यूटाडीन जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इसमें विश्व स्तरीय पॉलीप्रोपाइलीन प्लांट और देश का सबसे बड़ा पॉलीइथिलीन प्लांट शामिल है, जिससे देश में पेट्रोकेमिकल सेक्टर को नई मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना से देश में 26 प्रतिशत तक का पेट्रोकेमिकल इंटेंसिटी इंडेक्स हासिल किया जा सकेगा, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
रोजगार और आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। निर्माण के दौरान इस रिफाइनरी से लगभग एक लाख लोगों को रोजगार मिला, जबकि इसके संचालन के दौरान करीब 10 हजार प्रत्यक्ष और बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, यह परियोजना केंद्र और राज्य सरकारों के लिए हर साल करीब 21 हजार करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न करने की क्षमता रखती है।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी इस रिफाइनरी को आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। इसमें जीरो लिक्विड इफ्लुएंट डिस्चार्ज तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर रखा जा सकेगा। इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17 है, जो देश में दूसरा सबसे अधिक है और यह इसकी तकनीकी उन्नतता को दर्शाता है।


