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राजस्थान शिक्षा मंत्री ने जर्जर स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण के लिए मांगी विधायक निधि की 20% राशि

राजस्थान शिक्षा मंत्री ने जर्जर स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण के लिए मांगी विधायक निधि की 20% राशि

मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति को सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के सभी विधायकों को पत्र लिखकर उनसे MLA फंड का 20 प्रतिशत हिस्सा जर्जर विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए उपलब्ध कराने की अपील की है। राज्य सरकार का कहना है कि सरकारी स्कूलों की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और बड़े पैमाने पर मरम्मत व निर्माण कार्य किए बिना बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

सर्वे रिपोर्ट में सामने आई गंभीर स्थिति

शिक्षा मंत्री द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया कि राज्य सरकार के निर्देश पर तकनीकी टीमों द्वारा सभी राजकीय विद्यालय भवनों का विस्तृत सर्वे करवाया गया। इस सर्वे की रिपोर्ट ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के 3,768 विद्यालयों के भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में पाए गए हैं, जिन्हें तुरंत नए सिरे से निर्माण की आवश्यकता है।

इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 83,783 कक्ष और 16,765 शौचालय पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं और इन्हें तुरंत बदलना आवश्यक है। इन भवनों की मौजूदा स्थिति न केवल सुरक्षा के लिहाज़ से खतरनाक है, बल्कि बच्चों की सीखने की प्रक्रिया पर भी प्रभाव डालती है।

कमजोर भवनों की मरम्मत बेहद जरूरी

जर्जर भवनों के अलावा, रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया कि 2,19,902 कक्ष और 29,753 शौचालय ऐसी स्थिति में हैं जिनकी तुरंत मरम्मत जरूरी है। आगामी मौसम और भारी बारिश को देखते हुए सरकार ने कमजोर भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है।

शिक्षा मंत्री ने पत्र में स्पष्ट कहा कि इस वर्ष मानसून की भारी बारिश ने कई स्कूलों की संरचना को और कमजोर कर दिया है। ऐसे में जर्जर कक्षों को नए कक्षों से बदलना और कमजोर भवनों की मरम्मत करना अत्यंत आवश्यक है। यह कार्य न केवल बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि शिक्षण-अध्यापन की निरंतरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

MLA फंड से लिए जाएंगे 20 प्रतिशत राशि

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहले ही इसकी घोषणा कर चुके हैं कि ‘विधायक शिक्षा का साथी’ योजना के तहत प्रत्येक विधायक को अपने विकास कोष का 20 प्रतिशत हिस्सा विद्यालयों की मरम्मत व निर्माण पर खर्च करना होगा। इसी घोषणा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा मंत्री ने विधायकों से यह अपेक्षा जताई है कि वे अपने क्षेत्र के जर्जर विद्यालय भवनों के पुनर्निर्माण के लिए कम-से-कम एक करोड़ रुपये स्वीकृत करें।

सरकार का मानना है कि केवल सरकारी बजट से इतने विशाल स्तर पर निर्माण कार्य करना संभव नहीं है, इसलिए विधायक निधि का सहयोग इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है। स्थानीय स्तर पर विधायकों की सीधी भागीदारी से स्कूलों की आवश्यकताओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने आगे कहा कि विधायकों का यह सहयोग न केवल स्कूलों की स्थिति सुधारने में मदद करेगा, बल्कि यह बच्चों के समग्र विकास और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बेहतर भवन, सुरक्षित कक्ष, स्वच्छ शौचालय और मजबूत आधारभूत संरचना से छात्रों के सीखने के वातावरण को बेहतर बनाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि MLA फंड का यह उपयोग राजस्थान के शिक्षा तंत्र को प्रभावी बनाएगा और सरकारी स्कूलों को एक सुरक्षित, सुदृढ़ और आधुनिक स्वरूप देने में मदद करेगा। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे को खराब भवन या अव्यवस्थित माहौल का सामना न करना पड़े।

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