राजस्थान में कांग्रेस ने आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जयपुर स्थित आवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विस्तृत मंथन किया। यह बैठक कई घंटों तक चली और इसमें संगठनात्मक मजबूती से लेकर चुनावी रणनीति तक कई महत्वपूर्ण पहलुओं को गहराई से समझा गया। कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पार्टी इन स्थानीय चुनावों को केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए पूरे संगठन को सक्रिय मोड में लाएगी। बैठक में निकाय और पंचायत चुनावों में टिकट वितरण का फार्मूला, जिलाध्यक्षों की भूमिका, स्थानीय समीकरण और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर फोकस रहा।
गहलोत आवास पर विचार-विमर्श: संगठन को ज़मीनी स्तर पर मजबूत करने की तैयारी
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि संगठन को बूथ स्तर पर सक्रिय करना चुनावी सफलता की कुंजी होगा। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि किसी भी स्थानीय चुनाव की जीत का आधार बूथ स्तर पर मजबूत नेटवर्क और प्रभावी टीम वर्क होता है। इसलिए प्रत्येक ब्लॉक, ग्राम पंचायत और नगर निकाय तक पार्टी कार्यकर्ताओं को पुनर्गठित करने, प्रशिक्षण देने और उन्हें जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
गहलोत आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बातचीत को कांग्रेस के पुनर्गठन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि राज्य में कुछ क्षेत्रों में संगठनात्मक ढांचे को फिर से बनाने और स्थानीय नेतृत्व को अधिक अधिकार देने का निर्णय भी लिया गया है। विशेषकर उन क्षेत्रों में संगठनात्मक कमियों को चिन्हित कर वहां नए नेतृत्व को तैयार करने पर बल दिया जाएगा।
विधानसभा सत्र और विपक्ष की भूमिका पर भी चर्चा
इस बैठक में केवल स्थानीय चुनाव ही नहीं, बल्कि वर्तमान विधानसभा सत्र में विपक्ष के रूप में कांग्रेस की भूमिका पर भी रणनीति तैयार की गई। तय किया गया कि किन मुद्दों को आक्रामक रूप से उठाया जाए और किस प्रकार सरकार को सदन में घेरा जाए। बैठक में महंगाई, बेरोजगारी, ग्रामीण विकास की चुनौतियाँ, मनरेगा एक्ट में प्रस्तावित बदलाव और स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति जैसे मुद्दों को मुख्य विपक्षीय एजेंडा बनाने पर सहमति बनी।
कांग्रेस का मानना है कि राज्य की वास्तविक समस्याओं को उजागर कर ही जनता का भरोसा जीता जा सकता है। इसलिए पार्टी ने तय किया है कि वह सरकार की जिम्मेदारियों और खामियों को जोरदार तरीके से सामने रखेगी और प्रदेश के हितों से जुड़े हर विषय पर मुखर होगी।
पंचायत–निकाय चुनावों के लिए व्यापक रणनीति तैयार
कांग्रेस नेतृत्व इस बार पंचायत और निकाय चुनावों को सिर्फ स्थानीय चुनाव के तौर पर नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक संदेश देने वाले अवसर के रूप में देख रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी चाहती है कि ये चुनाव अगले बड़े राजनीतिक मुकाबलों के लिए वातावरण तैयार करें। इसीलिए टिकट वितरण के फार्मूले पर खास ध्यान दिया जा रहा है। चर्चा में यह स्पष्ट किया गया कि उम्मीदवार चयन में स्थानीय समीकरण, सामाजिक समीकरण और संगठन की सिफारिशें निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा से कांग्रेस में आने के इच्छुक कुछ नेताओं के नामों पर भी बैठक में विचार हुआ। हालांकि यह साफ संदेश दिया गया कि दलबदलुओं को टिकट देने से पहले उनके कार्य, कैडर की प्रतिक्रिया और स्थानीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता का मूल्यांकन किया जाएगा। कांग्रेस ने यह भी दोहराया कि पार्टी में टिकट योग्यता, कार्यकर्ता समर्थन और सार्वजनिक छवि के आधार पर ही दिया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई चर्चा
इस बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दोनों ने अपनी-अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर बैठक की तस्वीरें साझा कीं। डोटासरा ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया, जबकि अशोक गहलोत ने स्पष्ट रूप से लिखा कि यह मुलाकात आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि रंधावा और डोटासरा के साथ हुई यह चर्चा चुनावी रणनीति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गहलोत की इस पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में नई सरगर्मी ला दी, क्योंकि कांग्रेस इसे चुनावी तैयारी का शुरुआती चरण मान रही है और पार्टी कार्यकर्ताओं को लेकर एकजुटता का संदेश देना चाहती है।
चुनावी माहौल को गर्माने की तैयारी
राजस्थान कांग्रेस की इस रणनीतिक बैठक से यह संकेत साफ है कि पार्टी आगामी पंचायत और निकाय चुनावों को गंभीरता से ले रही है। संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की भूमिका, मुद्दों का चयन और विपक्षी रणनीति—सभी पहलुओं पर गहराई से योजना बनाकर कांग्रेस इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रख रही है। कांग्रेस अब स्थानीय चुनावों को ज़मीनी समर्थन के परीक्षण के रूप में देख रही है, जो आने वाले बड़े राजनीतिक मुकाबलों के लिए भी अहम संकेत देंगे।


