latest-newsअजमेरउदयपुरकोटाजयपुरजोधपुरभरतपुरराजनीतिराजस्थान

राजस्थान निकाय चुनाव 2025: इस बार जनता चुनेगी 10,175 पार्षद

राजस्थान निकाय चुनाव 2025: इस बार जनता चुनेगी 10,175 पार्षद

शोभना शर्मा राजस्थान में इस साल के आखिर में होने वाले शहरी निकाय चुनाव 2025 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार प्रदेश की जनता 10,175 पार्षदों का चुनाव करेगी। परिसीमन और वार्डों के पुनर्गठन के बाद यह आंकड़ा तय हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश में सबसे कम वार्ड सलूंबर जिले में प्रस्तावित हैं, जहां केवल 25 वार्ड होंगे, जबकि जयपुर जिले में सबसे अधिक 680 वार्ड बनाए गए हैं।

प्रदेश में ज्यादातर नगर निकायों की सीमाओं का दायरा इस बार बढ़ा दिया गया है, जिससे वार्डों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। परिसीमन के बाद शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व और भौगोलिक विस्तार को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है।

निकाय चुनाव 2025 में संभागवार नगर निकायों की संख्या

  • जयपुर संभाग – 91 निकाय

  • अजमेर संभाग – 52 निकाय

  • जोधपुर संभाग – 41 निकाय

  • बीकानेर संभाग – 37 निकाय

  • भरतपुर संभाग – 32 निकाय

  • कोटा संभाग – 28 निकाय

  • उदयपुर संभाग – 28 निकाय

इन निकायों में प्रस्तावित वार्डों की संख्या जिले और नगर निकाय के आकार पर निर्भर करेगी, जिसमें जयपुर जिले में सबसे अधिक और सलूंबर में सबसे कम वार्ड होंगे।

दिसंबर 2025 में हो सकता है “एक राज्य, एक चुनाव”

राजस्थान के शहरी विकास एवं आवास मंत्री झाबरसिंह खर्रा ने जानकारी दी है कि राज्य सरकार पंचायतों के साथ-साथ नगर निकायों के चुनाव भी दिसंबर 2025 में एक ही दिन कराने की तैयारी में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निकायों का पुनर्सीमांकन पूरा हो चुका है और अब जल्द ही वार्डों का पुनर्सीमांकन नोटिफिकेशन जारी होगा। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची तैयार करने का अनुरोध किया जाएगा।

मंत्री के अनुसार, अगर मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है तो दिसंबर में “एक राज्य, एक चुनाव” के तहत सभी नगर निकायों में एक ही दिन चुनाव कराए जा सकते हैं। इससे प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टि से चुनाव प्रक्रिया को सरल और कुशल बनाने में मदद मिलेगी।

ओबीसी सीट निर्धारण पर अटकी प्रक्रिया

हालांकि, चुनाव की तैयारी के बीच एक महत्वपूर्ण चुनौती भी सामने है। मई 2025 में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश मदन लाल भाटी की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया गया था, जिसे ओबीसी आरक्षण सीट निर्धारण का कार्य सौंपा गया है। लेकिन अभी तक इस आयोग ने सीट निर्धारण के लिए आवश्यक सर्वे कार्य शुरू नहीं किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट नहीं देता, तब तक ओबीसी आरक्षित सीटों का निर्धारण संभव नहीं होगा। यह प्रक्रिया पूरी हुए बिना चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देना मुश्किल हो सकता है।

निकाय सीमाओं का विस्तार और असर

वार्डों के पुनर्सीमांकन के साथ कई नगर निकायों की सीमाएं बढ़ा दी गई हैं। इसका मतलब है कि इन निकायों में पहले से अधिक क्षेत्र और जनसंख्या शामिल हो गई है। इससे जहां जनता के लिए विकास योजनाओं का दायरा बढ़ेगा, वहीं प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी अधिक हो जाएंगी।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading