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Rajasthan Budget 2026-27: सचिन पायलट का सरकार पर हमला, कहा- किसानों और युवाओं को नहीं मिली राहत

Rajasthan Budget 2026-27: सचिन पायलट का सरकार पर हमला, कहा- किसानों और युवाओं को नहीं मिली राहत

राजस्थान की वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बुधवार, 11 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश किया। यह बजट भजनलाल शर्मा सरकार के कार्यकाल का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार जैसे क्षेत्रों के लिए कई घोषणाएँ शामिल की गईं। लेकिन बजट पेश होने के तुरंत बाद ही कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी, और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सरकार पर जनता की उम्मीदों को तोड़ने का आरोप लगाया। पायलट ने बजट को निराशाजनक, असंतुलित और जनता के हितों से दूर बताया।

“जनता नाउम्मीद हो चुकी है”—सचिन पायलट

मीडिया से बातचीत में सचिन पायलट ने कहा कि राज्य में बार-बार बड़ी-बड़ी घोषणाएँ की जाती हैं, लेकिन धरातल पर उनका कोई असर दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि जनता बजट से उम्मीदें लगाती है, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगती है। पायलट ने कहा, “जनता भी नाउम्मीद हो चुकी है। बार-बार घोषणाएँ होती हैं और बजट के दिन सारी उम्मीदें धराशाई हो जाती हैं। इस बजट से न तो किसान को कुछ मिलने वाला है और न ही युवा वर्ग को।” उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि बजट केवल भाषणों में सीमित है और राज्य के वास्तविक विकास में इसका योगदान नगण्य है।

“यह बजट अजीब और असंतुलित लग रहा है”—पायलट का आरोप

सचिन पायलट ने बजट की दिशा, उद्देश्य और वित्तीय प्रबंधन पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट में महंगाई कम करने की बात कही गई, लेकिन सरकार का वित्तीय प्रबंधन बिल्कुल उलझा हुआ है। उन्होंने कहा — “सरकार कह रही है कि वित्तीय प्रबंधन बहुत अच्छा है, लेकिन सच्चाई यह है कि राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है, कर्ज बढ़ रहा है और 35-40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण सरकार को और लेना पड़ेगा।” पायलट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद सहयोग के बजाय “राजा-प्रजा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके अनुसार यह सरकार की मानसिकता को दर्शाता है कि वह जनता को बराबरी नहीं, बल्कि अधीनता में देखती है।

किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए राहत न होने का आरोप

सचिन पायलट ने बजट को लेकर सबसे बड़ा आरोप यह लगाया कि सरकार ने उन वर्गों को प्राथमिकता नहीं दी, जो आज परेशानियों से जूझ रहे हैं। उनके अनुसार—

1. किसान

  • कृषि क्षेत्र के लिए ठोस राहत की घोषणा नहीं की गई।

  • किसान कर्जमाफी, फसल बीमा सुधार और सिंचाई संसाधनों पर कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया।

2. युवा

  • रोजगार सृजन पर घोषित योजनाएँ लागू होने की संभावना कम है।

  • भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता पर कोई ठोस रोडमैप नहीं दिया गया।

3. महिलाएँ

  • महिला सुरक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट कमजोर है। पायलट ने कहा कि सरकार ने लंबा बजट भाषण तो पढ़ दिया, लेकिन वास्तविक योजनाओं में दम नहीं है। उन्होंने कहा— “जो लोग आज परेशान हैं—किसान, नौजवान, महिलाएँ और मध्यमवर्ग—सरकार ने इनकी कोई चिंता नहीं की है।”

पायलट ने सत्ताधारी दल के विधायकों की उपेक्षा का आरोप भी लगाया

सचिन पायलट ने कहा कि बजट में न केवल विपक्ष के मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है बल्कि स्वयं भाजपा के विधायकों की भी कई महत्वपूर्ण मांगों को शामिल नहीं किया गया। उनके अनुसार— “सत्ताधारी दल के कई प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों के विकास के लिए योजना मांग की होगी, लेकिन सरकार ने उनकी भी बात नहीं मानी। यह दर्शाता है कि सरकार केवल औपचारिकता निभा रही है।”

दीया कुमारी ने क्या कहा बजट प्रस्तुत करते समय?

वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बजट भाषण की शुरुआत में केंद्र सरकार की प्रेरणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के मंत्र को आधार बनाकर यह बजट तैयार किया गया है। दीया कुमारी ने कहा कि बजट का उद्देश्य—

  • आर्थिक समृद्धि

  • समावेशी विकास

  • सतत विकास

  • राज्य के संसाधनों का प्रभावी उपयोग

जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वित्तीय प्रबंधन पर उठे बड़े सवाल

सचिन पायलट ने वित्तीय प्रबंधन को सबसे बड़ी विफलता बताया। उनके अनुसार—

  • राज्य का राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ रहा है।

  • बजट में घोषित कई योजनाओं के लिए धनराशि का स्पष्ट स्रोत नहीं दिया गया है।

  • राज्य सरकार पर पहले से ही बड़े पैमाने पर ऋण है और अब अतिरिक्त कर्ज लेने की जरूरत पड़ेगी।

उनका कहना था कि ऐसे में महंगाई बढ़ेगी और आम जनता पर वित्तीय बोझ और अधिक पड़ेगा।

क्या बजट धरातल पर उतरेगा?

पायलट सहित विपक्ष का मानना है कि बजट में घोषणाएँ तो हैं, लेकिन उन्हें लागू करने की क्षमता और इच्छाशक्ति सरकार में नहीं दिखाई देती। वे आरोप लगाते हैं कि सरकार पिछले दो वर्षों में अपने किसी भी बड़े वादे को पूरा नहीं कर पाई है। इसलिए उन्हें विश्वास नहीं है कि यह बजट भी किसी बदलाव का कारण बनेगा।

बजट पर राजनीतिक टकराव तेज

Rajasthan Budget 2026-27 ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। जहाँ सरकार बजट को विकास का मार्ग बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे जनता की उम्मीदों के साथ धोखा बताया है।

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