राजस्थान की वित्त मंत्री दिया कुमारी ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश करते हुए कई अहम घोषणाएँ कीं। यह बजट विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी स्पष्ट किया कि यह बजट समाज के उन वर्गों को प्राथमिकता देता है, जिन्हें वास्तविक सहारे और सुविधाओं की आवश्यकता है। इसी क्रम में बजट में महिलाओं—विशेषकर सिंगल मदर और सुरोगेसी मदर—के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों के लिए अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
अनुकंपा नियुक्ति सूची में बड़ा बदलाव: अब पुत्रवधू भी पात्र
वित्त मंत्री दिया कुमारी ने अपने बजट भाषण में सबसे महत्वपूर्ण घोषणा अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित की। अब तक मृत सरकारी कर्मचारी की पुत्रवधू (Daughter-in-law) को अनुकंपा नियुक्ति के पात्र आश्रितों की सूची में शामिल नहीं किया जाता था। लेकिन नए बजट में सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि: मृत सरकारी कर्मचारी की पुत्रवधू को भी अब अनुकंपा नियुक्ति में शामिल किया जाएगा। यह बदलाव कई परिवारों के लिए अत्यंत राहत देने वाला कदम माना जा रहा है, क्योंकि कई मामलों में पुत्रवधू ही परिवार की मुख्य जिम्मेदारियां संभालती है, परंतु नियमों के कारण वह नौकरी के लिए पात्र नहीं होती थी। इस निर्णय से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया अधिक मानवीय और न्यायसंगत बनेगी।
Disability से जुड़े नियमों में भी संशोधन
अब तक यह प्रावधान था कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में स्थायी रूप से विकलांग (Permanent Disability) हो जाता है, तो उसके आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है। लेकिन नई घोषणा इससे भी एक कदम आगे जाती है। अब यदि कोई कर्मचारी राजकीय सेवा में रहते हुए किसी ऐसी Disability से गुजरता है, जिससे वह सरकारी काम करने में सक्षम नहीं रहता, तो भी उसके आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी। इस निर्णय का उद्देश्य उन परिवारों को सहारा देना है, जिनकी आय का एकमात्र स्रोत किसी कारणवश दिव्यांग हो जाता है।
सुरोगेसी मदर के लिए ऐतिहासिक मातृत्व अवकाश प्रावधान
बजट में महिलाओं से संबंधित सबसे मानवीय और उल्लेखनीय घोषणा सुरोगेसी प्रक्रिया से मां बनने वाली महिलाओं को लेकर थी।
सरकार ने दो श्रेणियों में मातृत्व अवकाश प्रदान किया है:
Surrogate Mother (जो गर्भ धारण करती है):
180 दिन का मातृत्व अवकाश
यह कदम उस महिला के स्वास्थ्य, रिकवरी और भावनात्मक स्थिरता की रक्षा के लिए आवश्यक माना गया है, जो बच्चे को जन्म देती है।
Commissioning Mother (जो बच्चा प्राप्त करती है):
90 दिन का मातृत्व अवकाश
यह अवधि उस मां के लिए महत्वपूर्ण है, जो नवजात को अपना पूर्ण समय दे सके और मातृत्व की शुरुआती जिम्मेदारियों को संभाल सके। राजस्थान सरकार का यह प्रावधान देश में प्रगतिशील मातृत्व नीतियों की दिशा में एक साहसिक कदम माना जा रहा है।
सिंगल मदर के लिए CCL नियमों में बड़ी राहत
अब तक सिंगल मदर (Single Mother) को Child Care Leave (CCL) एक वर्ष में केवल तीन स्पेल (टुकड़ों) में लेने की अनुमति थी। इससे छुट्टियों को योजना अनुसार लेना अक्सर कठिन हो जाता था। नई घोषणा के अनुसार:
सिंगल मदर अब CCL को 6 स्पेल में ले सकेंगी।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है कि सिंगल मदर पर नौकरी और बच्चों की पूरी जिम्मेदारी होती है। चाइल्ड के परीक्षा समय, बीमारी या किसी व्यक्तिगत स्थिति में स्पेल बढ़ने से उन्हें अधिक लचीलापन मिलेगा।
महिलाओं पर केंद्रित बजट की दिशा
बजट भाषण में दीया कुमारी ने कई बार स्पष्ट किया कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मानजनक जीवन के प्रति प्रतिबद्ध है। इस बजट में विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया:
कार्यरत महिलाओं के लिए नीति सुधार
मातृत्व से जुड़े अधिकारों का विस्तार
परिवार के आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा
समाज में महिला स्वावलंबन को बढ़ावा
इन घोषणाओं ने बजट को एक संवेदनशील और सामाजिक रूप से उन्मुख दस्तावेज के रूप में स्थापित किया है।
राज्य सरकार का संदेश: संवेदनशील शासन प्राथमिकता
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वित्त मंत्री दिया कुमारी दोनों ने यह संदेश दिया है कि सरकार जनता की परिस्थितियों और जरूरतों को समझते हुए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
चाहे वह अनुकंपा नियुक्ति का मानवीय निर्णय हो या मातृत्व अवकाश में बढ़ोतरी—ये सारे कदम राजस्थान को महिला-हितैषी और परिवार-हितैषी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।


