मनीषा शर्मा। राजस्थान में बजट सत्र को लेकर बड़ी घोषणा हो गई है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि सोलहवीं विधानसभा का पांचवां अधिवेशन 28 जनवरी से शुरू होगा। इस अधिसूचना के साथ ही सरकार, विभागों और विधायकों के बीच बजट तैयारी की गतिविधियां और तेज हो गई हैं।
इससे पहले भजनलाल सरकार पहले ही जनता से बजट सुझाव मांग रही है। अलग-अलग जिलों में बैठकों का दौर जारी है, जहां विधायकों, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से सुझाव लेकर प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं।
कब तक चलेगा सत्र
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बताया कि यह अधिवेशन करीब एक महीने तक चलेगा। सत्र की शुरुआत परंपरा के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। इसी अधिवेशन के दौरान राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेगी।
देवनानी ने कहा कि इस बार भी डिप्टी सीएम दिया कुमारी बजट पेश करेंगी, और सरकार की योजनाओं, प्राथमिकताओं और विकास कार्यक्रमों का खाका विधानसभा में रखा जाएगा।
बजट के साथ और किन मुद्दों पर चर्चा
विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार यह सत्र केवल बजट तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
सत्र के दौरान निम्न संसदीय कार्य प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे—
प्रश्नकाल और पूरक प्रश्न
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
विशेष उल्लेख प्रस्ताव
विधायी कार्य और नए विधेयक
स्थगन प्रस्ताव और बहस
देवनानी ने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों के पास अपने-अपने मुद्दे रखने का अवसर रहेगा, और नागरिकों से जुड़े विषयों पर व्यापक विमर्श कराया जाएगा।
सर्वदलीय बैठक की तैयारी
अधिवेशन शुरू होने से पहले विधानसभा में सर्वदलीय बैठक भी बुलाई जाएगी। इसका उद्देश्य सत्र को सुचारू, गरिमामय और परिणामकारी बनाना है। इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं विधानसभा अध्यक्ष करेंगे।
आम तौर पर ऐसी बैठकों में सत्र के एजेंडे, बैठने की व्यवस्था, समय प्रबंधन और कार्य संचालन पर सभी दलों से सुझाव लिए जाते हैं, जिससे सत्र बिना अनावश्यक व्यवधान के चल सके।
सरकार का फोकस: जनभागीदारी और जिम्मेदारी
बजट से पहले जनता से सुझाव लेने की शुरुआत को सरकार जनभागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मान रही है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी निकायों तक, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, सड़क और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है।
राज्यपाल की अधिसूचना के बाद अब नजरें इस बात पर हैं कि बजट में किन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है और विपक्ष किन मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाता है। कुल मिलाकर, 28 जनवरी से शुरू होने वाला यह सत्र राज्य की नीति और दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


