मनीषा शर्मा। ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने एक अहम भ्रम को दूर कर दिया है। जनरल यानी अनरिजर्व्ड टिकट को लेकर यह सवाल लगातार उठ रहा था कि क्या UTS मोबाइल एप से बुक किए गए टिकट का प्रिंटआउट रखना अनिवार्य है। अब रेलवे मंत्रालय ने इस पर साफ और आधिकारिक जवाब देते हुए कहा है कि UTS एप से बुक किए गए टिकट का प्रिंट निकालना बिल्कुल जरूरी नहीं है। यात्री अपने मोबाइल फोन में एप के ‘शो टिकट’ विकल्प के जरिए टिकट दिखाकर पूरी तरह वैध तरीके से यात्रा कर सकते हैं।
वायरल वीडियो के बाद आई रेलवे की सफाई
यह स्पष्टीकरण एक वायरल वीडियो के बाद सामने आया, जिसमें एक टिकट चेकिंग स्टाफ (TTE) एक यात्री से UTS एप से बुक किए गए टिकट की प्रिंटेड कॉपी मांगता नजर आ रहा था। इस वीडियो के वायरल होते ही यात्रियों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई थी। कई लोग यह सोचने लगे थे कि कहीं रेलवे ने मोबाइल टिकट के नियमों में बदलाव तो नहीं कर दिया है और अब डिजिटल टिकट का भी प्रिंट रखना जरूरी हो गया है। रेलवे मंत्रालय ने इस भ्रम को खत्म करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसा कोई नियम नहीं है, जिसके तहत UTS एप से बुक किए गए टिकट का प्रिंटआउट अनिवार्य हो।
रेल मंत्रालय का आधिकारिक बयान
रेल मंत्रालय ने कहा कि UTS यानी Unreserved Ticketing System एप के ‘शो टिकट’ सेक्शन में दिखाई देने वाला टिकट यात्रा के लिए वैध प्रमाण है। यात्री जिस मोबाइल डिवाइस से टिकट बुक करता है, उसी डिवाइस पर डिजिटल टिकट दिखाकर सफर कर सकता है। टीटीई या अन्य चेकिंग स्टाफ को वही डिजिटल टिकट दिखाना पूरी तरह मान्य है।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई यात्री खिड़की से जनरल टिकट खरीदता है या ऑनलाइन बुकिंग के बाद उसका प्रिंट निकाल लेता है, तो उसे वह फिजिकल टिकट यात्रा के दौरान साथ रखना होगा। लेकिन UTS एप से बुक किए गए टिकट के मामले में प्रिंट की कोई बाध्यता नहीं है।
TTE द्वारा प्रिंट मांगना गलत
रेल मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी कहा कि UTS एप के टिकट के बावजूद किसी यात्री से प्रिंटेड कॉपी की मांग करना गलत है। डिजिटल इंडिया के तहत रेलवे ने यात्रियों को पेपरलेस सुविधा देने के लिए यह व्यवस्था लागू की है, ताकि लोगों को टिकट के प्रिंट और उसे संभालने की झंझट से राहत मिल सके।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, UTS एप का उद्देश्य ही यही है कि यात्री लाइन में लगे बिना और कागज के टिकट के बिना आसानी से जनरल टिकट बुक कर सकें।
यात्रियों को क्या रखना होगा ध्यान
रेलवे ने यात्रियों को यह भी सलाह दी है कि यात्रा के दौरान मोबाइल फोन में बैटरी पर्याप्त होनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर टिकट आसानी से दिखाया जा सके। साथ ही, टिकट उसी डिवाइस पर दिखाना जरूरी है, जिससे उसे बुक किया गया है। स्क्रीनशॉट या किसी अन्य मोबाइल में ट्रांसफर किया गया टिकट मान्य नहीं माना जाएगा।
वंदे भारत ट्रेनों में रीजनल डिश की शुरुआत
इसी बीच, यात्रियों के सफर को और बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने वंदे भारत ट्रेनों में एक नई पहल शुरू की है। अब इन प्रीमियम ट्रेनों में यात्रियों को उनके रूट के अनुसार क्षेत्रीय और पारंपरिक व्यंजन परोसे जाएंगे। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक और खान-पान की विविधता को बढ़ावा देना है।
अलग-अलग रूट पर मिलेंगी स्थानीय डिश
नई व्यवस्था के तहत पटना–रांची वंदे भारत ट्रेन में यात्रियों को चंपारण पनीर परोसा जाएगा, जबकि पटना–हावड़ा रूट पर चंपारण चिकन मेन्यू में शामिल किया गया है। गुजरात के रूट पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेनों में मेथी थेपला और मसाला लौकी जैसी स्थानीय डिश उपलब्ध कराई जा रही हैं।
केरल की वंदे भारत ट्रेनों में अप्पम, केरल पराठा और पारंपरिक पालाडा पायसम जैसे व्यंजन मिलेंगे। पश्चिम बंगाल के रूट पर कोशा पनीर और आलू पोतोल भाजा को मेन्यू में जगह दी गई है।
दक्षिण और पूर्व भारत के स्वाद भी शामिल
दक्षिण भारत के रूट पर चलने वाली वंदे भारत ट्रेनों में दोंडाकाया करम पोडी फ्राई और आंध्र कोडी कूरा जैसी डिशेज परोसी जाएंगी। वहीं, ओडिशा जाने वाली ट्रेनों में आलू फूलकोपी जैसे स्थानीय स्वाद यात्रियों को मिलेंगे।
रेलवे का कहना है कि इस पहल से यात्रियों को सफर के दौरान घर जैसा स्वाद मिलेगा और देश की विविध सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी।
यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने की कोशिश
भारतीय रेलवे लगातार यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है। एक ओर UTS एप के जरिए पेपरलेस टिकटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों में स्थानीय भोजन की सुविधा देकर यात्रा को यादगार बनाने की कोशिश की जा रही है। रेलवे का मानना है कि ये दोनों पहलें यात्रियों की सुविधा, समय की बचत और बेहतर अनुभव के लिहाज से अहम साबित होंगी।


