राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की सही मात्रा को लेकर सरकार ने बड़ा निरीक्षण अभियान चलाया है। उपभोक्ताओं को निर्धारित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराने और पेट्रोल पंपों पर माप एवं वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से विधिक माप विज्ञान विभाग ने राज्यभर में विशेष जांच अभियान संचालित किया। 13 मई से 18 मई तक चले इस अभियान के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कुल 226 पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान कई स्थानों पर अनियमितताएं सामने आने के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए 103 नोजल सीज कर दिए, जबकि 110 पेट्रोल पंपों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं था, बल्कि पेट्रोल पंप संचालकों को मशीनों के नियमित रखरखाव, सही कैलिब्रेशन और माप संबंधी नियमों के प्रति जागरूक करना भी था। विभाग का कहना है कि अधिकतर पेट्रोल पंपों पर ईंधन वितरण व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई और उपभोक्ताओं को सही मात्रा में पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराया जा रहा था। हालांकि कुछ स्थानों पर तकनीकी और माप संबंधी खामियां मिलने के बाद कार्रवाई करना आवश्यक माना गया।
निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक मामले शॉर्ट डिलीवरी से जुड़े पाए गए। विभाग के अनुसार कुल 60 मामलों में पेट्रोल या डीजल निर्धारित मात्रा से कम दिया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि कुछ पेट्रोल पंपों पर 40 मिलीलीटर से लेकर 120 मिलीलीटर तक की कमी दर्ज की गई। विभाग ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए संबंधित नोजल तुरंत सीज कर दिए और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को कम मात्रा में ईंधन देना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि कई पेट्रोल पंप निर्धारित नियमों के अनुसार जरूरी दस्तावेज प्रदर्शित नहीं कर रहे थे। कुल 56 पेट्रोल पंपों पर सत्यापन प्रमाण पत्र प्रदर्शित नहीं किए गए थे, जबकि 16 मामलों में अप्रमाणित माप उपकरणों का उपयोग पाया गया। अधिकारियों के अनुसार पेट्रोल पंपों पर सत्यापन प्रमाण पत्र का सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होना अनिवार्य है ताकि उपभोक्ता यह सुनिश्चित कर सकें कि मशीनों की समय-समय पर जांच की गई है। अप्रमाणित उपकरणों के इस्तेमाल को भी नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया है।
विधिक माप विज्ञान विभाग का कहना है कि कई बार मशीनों में तापमान, तकनीकी संवेदनशीलता और कैलिब्रेशन की स्थिति के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित सीमा से अधिक अंतर पाए जाने पर कार्रवाई अनिवार्य होती है। इसी कारण निरीक्षण अभियान के दौरान जिन नोजलों में गड़बड़ी मिली, उन्हें तुरंत बंद कर सीज किया गया ताकि आगे उपभोक्ताओं को नुकसान न हो।
राज्य सरकार उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा को लेकर लगातार सख्त रुख अपना रही है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच आम उपभोक्ता पहले से ही आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यदि उन्हें निर्धारित मात्रा से कम ईंधन मिलता है तो यह सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान का मामला बन जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने विशेष निरीक्षण अभियान चलाया ताकि पेट्रोल पंपों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाया जा सके और उपभोक्ताओं का विश्वास कायम रखा जा सके।
विभाग ने पेट्रोल पंप संचालकों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे प्रतिदिन “5 लीटर माप” के माध्यम से मशीनों की जांच सुनिश्चित करें। अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया मशीनों की सटीकता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। साथ ही डिस्पेंसिंग यूनिट्स का समय-समय पर कैलिब्रेशन और तकनीकी रखरखाव भी आवश्यक बताया गया है। विभाग का कहना है कि यदि मशीनों का नियमित रखरखाव किया जाए तो शॉर्ट डिलीवरी जैसी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस अभियान के दौरान विभाग ने आम लोगों को भी जागरूक रहने की सलाह दी है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी पेट्रोल पंप पर कम मात्रा में ईंधन दिए जाने का संदेह हो तो वे मौके पर उपलब्ध “5 लीटर माप” से जांच की मांग कर सकते हैं। यह सुविधा उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उपलब्ध कराई गई है। विभाग का कहना है कि जागरूक उपभोक्ता ही पारदर्शी व्यापार व्यवस्था को मजबूत बना सकते हैं।
राजस्थान में पेट्रोल पंपों पर हुई इस व्यापक कार्रवाई को उपभोक्ता हितों की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी ऐसे विशेष निरीक्षण अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे। इसका उद्देश्य केवल अनियमितताओं पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि व्यापार व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और उपभोक्ताओं का भरोसा कायम रखना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निरीक्षण अभियान से पेट्रोल पंप संचालकों में जवाबदेही बढ़ेगी और मशीनों के रखरखाव को लेकर गंभीरता आएगी। साथ ही उपभोक्ताओं को भी अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक होने का अवसर मिलेगा। राज्य सरकार और विधिक माप विज्ञान विभाग का यह अभियान आने वाले समय में ईंधन वितरण व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


