राहुल को लेना चाहिए राजनीति से ब्रेक :प्रशांत किशोर

मनीषा शर्मा। लोकसभा चुनाव 2024 (Loksabha Election 2024) में यदि इस बार भी कांग्रेस पार्टी (Congress Party)उम्मीद के अनुसार नतीजे हासिल नहीं कर पाती है, तो राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को राजनीति से ब्रेक लेने के बारे में सोचना चाहिए यह सुझाव दिया है राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने।

प्रशांत किशोर ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि राहुल गांधी पिछले 10 सालों से कांग्रेस को जीतने का असफल प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद न तो वे राजनीति से अलग हो रहे हैं और ना ही किसी और को कांग्रेस पार्टी का चेहरा बनने दे रहे हैं। यह लोकतांत्रिक नहीं है। राहुल गांधी को 5 साल का ब्रेक लेकर किसी और को मौका देना चाहिए। इसमें कोई बुराई नहीं है। उनकी मां ने ऐसा ही किया था।

प्रशांत किशोर ने दी है राहुल गांधी को चार महत्वपूर्ण सलाह

  1. प्रशांत ने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में है जबकि कांग्रेस के नेता मणिपुर और मेघालय का दौरा करते रहते हैं अगर कांग्रेस यूपी बिहार और मध्य प्रदेश में नहीं जीती है तो उसके वायनाड से चुनाव जीतने का भी कोई फायदा नहीं है। अकेले केरल को जीतकर आप पूरे देश को नहीं जीत सकते।
  2. प्रशांत किशोर की दूसरी सलाह के हिसाब से दुनिया भर के अच्छे नेताओं की एक विशेषता है कि वह जानते हैं कि उनमें क्या कमी है। वह अपनी कमियों को दूर करने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन राहुल गांधी को लगता है कि वह सब कुछ जानते हैं। राहुल गांधी को लगता है कि उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो उन्हें सही लगता है।वहीं उन्हें पूरा कर सके। जबकि यह संभव ही नहीं है।
  3. प्रशांत किशोर ने कहा कि 2019 में चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का फैसला किया था। उन्होंने तब यह भी लिखा था कि वह किसी और को पार्टी की जिम्मेदारी देंगे। लेकिन उन्होंने जो कहा उसके विपरीत काम किया। राहुल को जिद नहीं करनी चाहिए कि बार-बार असफल होने के बावजूद वे ही पार्टी का नेतृत्व करेंगे। क्योंकि पार्टी और उसके समर्थक किसी भी व्यक्ति विशेष से बड़े हैं।
  4. प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी के दावों पर भी सवाल उठाया है। जिसमें राहुल अक्सर चुनाव में मिली हार के लिए चुनाव आयोग न्यायपालिका और मीडिया पर आरोप लगाते रहते हैं। प्रशांत ने कहा कि यह आंशिक रूप से सच हो सकता है। लेकिन यह पूरा सच नहीं है। 2014 के चुनाव में 244 सीटों से घटकर कांग्रेस सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गई थी। जब कांग्रेस सत्ता में थी तब भाजपा का विभिन्न संस्थानों पर बहुत कम प्रभाव था।
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