शोभना शर्मा। जालोर जिले के लिए खेल जगत से एक बड़ी और गर्व की खबर सामने आई है। जिले के कानीवाड़ा गांव के रहने वाले राघवेंद्र सिंह चौहान ने 10 मीटर राइफल शूटिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित 68वीं नेशनल राइफल शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 10 मीटर राइफल शूटिंग इवेंट में क्वालिफाइंग स्कोर हासिल कर यह उपलब्धि अपने नाम की। इस सफलता के बाद जालोर जिले से लेकर पूरे राजस्थान में खेल प्रेमियों के बीच उत्साह और खुशी का माहौल है।
नेशनल लेवल के कड़े मुकाबले में हासिल की बड़ी कामयाबी
68वीं नेशनल राइफल शूटिंग चैंपियनशिप देश की सबसे प्रतिष्ठित शूटिंग प्रतियोगिताओं में से एक मानी जाती है। इस प्रतियोगिता में देशभर से टॉप लेवल के शूटर्स हिस्सा लेते हैं, जहां हर एक अंक के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिलता है। ऐसे माहौल में 10 मीटर राइफल शूटिंग जैसे तकनीकी और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण इवेंट में क्वालिफाइंग स्कोर हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
राघवेंद्र सिंह चौहान ने इस नेशनल लेवल के मुकाबले में अपनी तकनीक, धैर्य और एकाग्रता का बेहतरीन प्रदर्शन किया। अनुभवी और नामी खिलाड़ियों के बीच उन्होंने खुद को साबित करते हुए यह दिखा दिया कि सीमित संसाधनों और कड़े कॉम्पिटिशन के बावजूद मेहनत और अनुशासन से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
कानीवाड़ा गांव से नेशनल मंच तक का सफर
मिली जानकारी के अनुसार राघवेंद्र सिंह चौहान जालोर जिले के कानीवाड़ा गांव के निवासी हैं। एक छोटे से गांव से निकलकर नेशनल लेवल की प्रतियोगिता में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन राघवेंद्र ने अपने समर्पण और लगन से इस चुनौती को पार किया। उनका यह सफर उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर खेलों में बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना देखते हैं।
पढ़ाई के साथ शूटिंग में भी संतुलन
वर्तमान में राघवेंद्र सिंह चौहान राजस्थान यूनिवर्सिटी, जयपुर में बीए फाइनल ईयर के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने निशानेबाजी को भी पूरी गंभीरता से जारी रखा। शूटिंग जैसे खेल में नियमित प्रैक्टिस, फिजिकल फिटनेस और मेंटल स्ट्रेंथ की जरूरत होती है। इसके बावजूद राघवेंद्र ने अपने समय का सही प्रबंधन करते हुए शिक्षा और खेल दोनों में संतुलन बनाए रखा।
कम संसाधनों और सीमित सुविधाओं के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। लगातार अभ्यास, आत्मविश्वास और सीखने की ललक ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। नेशनल लेवल पर क्वालिफाइंग स्कोर हासिल कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि टैलेंट और मेहनत किसी भी परिस्थिति में रास्ता बना सकती है।
सफलता का श्रेय माता-पिता और कोच को
अपनी इस उपलब्धि का श्रेय राघवेंद्र सिंह चौहान ने अपने माता-पिता, शिक्षकों और कोच को दिया है। उनका कहना है कि परिवार का सहयोग और कोच का मार्गदर्शन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा है। उन्होंने बताया कि भविष्य में वह और अधिक मेहनत कर नेशनल लेवल पर बेहतर प्रदर्शन के साथ-साथ इंटरनेशनल लेवल पर भी देश और राज्य का नाम रोशन करना चाहते हैं।
राइफल शूटिंग: मानसिक संतुलन और अनुशासन का खेल
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि 10 मीटर राइफल शूटिंग जैसे इवेंट में सफलता केवल शारीरिक क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मेंटल बैलेंस, अनुशासन और निरंतर अभ्यास इसकी सबसे बड़ी कुंजी होती है। हर शॉट के दौरान खिलाड़ी को अपनी सांस, शरीर की स्थिरता और मानसिक स्थिति पर पूरा नियंत्रण रखना होता है।
राघवेंद्र सिंह चौहान ने इस इवेंट में जिस तरह से खुद को साबित किया है, वह उनकी मानसिक मजबूती और तकनीकी तैयारी को दर्शाता है। यही वजह है कि उन्हें आने वाले समय में एक उभरते हुए प्रतिभाशाली शूटर के रूप में देखा जा रहा है।
जिले में खुशी की लहर, युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
राघवेंद्र की इस सफलता के बाद उनके परिवार, कोच, शिक्षक, दोस्तों और खेल प्रेमियों ने खुशी जताते हुए उन्हें बधाइयां दी हैं। कानीवाड़ा गांव समेत पूरे जालोर जिले में गर्व और उत्साह का माहौल है। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ जिले के लिए गौरव की बात है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो खेल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।


