मनीषा शर्मा। राजस्थान यूनिवर्सिटी के साइंस विभाग में इस समय एक गंभीर घटना सामने आई है जहाँ फर्स्ट सेमेस्टर के ३५ छात्र-छात्राओं के साथ रैगिंग की गई। आरोप है कि यह रैगिंग उनके ही थर्ड सेमेस्टर के साथी छात्रों द्वारा पिछले एक सप्ताह से की जा रही थी। इस दौरान फर्स्ट सेमेस्टर के छात्रों को क्लास में बंद कर डांस करने और एक्टिंग करवा कर मानसिक एवं भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया गया। कुछ छात्रों ने इस उत्पीड़न की शिकायत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्र नेताओं से की। शनिवार को एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की और साथ ही रैगिंग का शिकार हुए छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की।
एबीवीपी का रुख और छात्र नेताओं की मांगें
एबीवीपी के छात्र नेता रोहित मीणा ने कहा: “राजस्थान यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में छात्रों के साथ रैगिंग को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यदि दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो एबीवीपी बड़ा आंदोलन करेगी।” उनका कहना था कि थर्ड ईयर के छात्रों ने फर्स्ट सेमेस्टर के छात्रों को लगातार उनके नाम और हॉबीज पूछकर डांस करवाया और कई बार एक्टिंग करवाई। पिछले सात दिनों से लगातार यह मानसिक प्रताड़ना जारी रही, जिससे छात्र भयभीत हो गए।
प्रशासन और प्रोफेसर का रुख
एबीवीपी इकाई मंत्री धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि जब वे कॉलेज पहुंचे, तब भी रैगिंग जारी थी। उन्होंने यह आरोप लगाया कि जब कुछ छात्रों ने इसका विरोध किया, तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन पर दबाव बनाकर उन्हें डराने का प्रयास किया।धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि एंटी-रैगिंग कमेटी को इस मामले की जांच सौंपी गई है, लेकिन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग अब अनिवार्य हो गई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन छात्रों ने आवाज उठाई है, उनकी सुरक्षा प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की जाए क्योंकि पहले भी उन्हें रैगिंग करने वाले छात्रों द्वारा डराया जा चुका है। वहीं प्रोफेसर ज्योति शर्मा ने कहा: “अगर किसी छात्र को डांस करवा लिया गया तो क्या इतनी बड़ी बात हो जाती है? यह सामान्य घटनाओं में आता है। आप बेवजह इसे तूल दे रहे हैं।” उनके मुताबिक ऐसे मामले देश भर की यूनिवर्सिटियों में सामान्यतया घटित होते रहते हैं, और इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की आवश्यकता नहीं।
मामला: रैगिंग की प्रकृति और छात्रों की प्रतिक्रिया
फर्स्ट सेमेस्टर के छात्रों ने बताया कि उन्हें शारीरिक रूप से परेशान नहीं किया गया, लेकिन मानसिक दवाब देकर सार्वजनिक अपमानित किया गया। उनमें से कुछ ने बताया कि उन्होंने कभी-कभी रोकने की कोशिश भी की, लेकिन थर्ड ईयर के छात्रों द्वारा डराने-धमकाने का माहौल बना दिया गया था जिससे वह दबे हुए थे। यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि रैगिंग का असर भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा होता है। विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक वातावरण में छात्रों को सुरक्षित और सम्मानपूर्वक पढ़ने का अधिकार होना चाहिए।