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रबी सीजन 2026 : राजस्थान में सरसों-चना खरीद 25 मार्च से

रबी सीजन 2026 : राजस्थान में सरसों-चना खरीद 25 मार्च से

राजस्थान में रबी सीजन 2026 के तहत किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने सरसों-चना की फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी है। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने बताया कि भारत सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद राजफेड के माध्यम से यह खरीद जल्द शुरू की जाएगी। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालयों के अनुसार ऑनलाइन पंजीकरण और खरीद की तिथियां तय कर दी गई हैं। मंत्री गौतम कुमार दक के अनुसार किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने के लिए पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में चार क्षेत्रीय कार्यालयों में पंजीकरण और खरीद शुरू होगी, जबकि दूसरे चरण में शेष चार कार्यालयों में यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

15 मार्च से शुरू होगा ऑनलाइन पंजीकरण

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार कोटा, अजमेर, भरतपुर और श्रीगंगानगर क्षेत्रीय कार्यालयों में किसानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया 15 मार्च से शुरू होगी। इन क्षेत्रों में पंजीकरण पूरा होने के बाद 25 मार्च से सरसों और चने की खरीद शुरू कर दी जाएगी।

वहीं जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर क्षेत्रीय कार्यालयों में किसानों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया 20 मार्च से शुरू की जाएगी। इन क्षेत्रों में पंजीकरण के बाद 1 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद शुरू की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह है कि सभी जिलों में व्यवस्थित तरीके से खरीद प्रक्रिया संचालित हो और किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो।

सरसों और चने का समर्थन मूल्य घोषित

सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने बताया कि भारत सरकार ने सरसों और चने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले ही घोषित कर दिया है। इसके अनुसार सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि चने का समर्थन मूल्य 5875 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

राजस्थान में इस सीजन में सरसों की खरीद की सीमा 13.78 लाख मीट्रिक टन निर्धारित की गई है। इसके साथ ही चने की खरीद के लिए 5.53 लाख मीट्रिक टन की सीमा तय की गई है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बाजार में मिलने वाली कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी और उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा।

दो एजेंसियां करेंगी खरीद का संचालन

राज्य में समर्थन मूल्य पर खरीद का संचालन दो प्रमुख एजेंसियों के माध्यम से किया जाएगा। सहकारिता मंत्री के अनुसार कुछ क्षेत्रों में राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ यानी एनसीसीएफ द्वारा खरीद की जाएगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में नेफेड के माध्यम से खरीद कार्य संपन्न कराया जाएगा।

अजमेर, जोधपुर, बीकानेर और कोटा क्षेत्रीय कार्यालयों के अंतर्गत आने वाले 19 जिलों में एनसीसीएफ के माध्यम से खरीद की व्यवस्था की गई है। वहीं जयपुर, उदयपुर, श्रीगंगानगर और भरतपुर क्षेत्रीय कार्यालयों के अंतर्गत आने वाले 22 जिलों में नेफेड द्वारा किसानों से फसल खरीदी जाएगी। जिलेवार खरीद की सीमा और अन्य जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करवा दी गई है।

क्यूआर कोड और ई-मित्र से होगा पंजीकरण

सरकार ने किसानों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को भी सरल बनाने का प्रयास किया है। सहकारिता मंत्री ने बताया कि किसान स्वयं क्यूआर कोड स्कैन करके भी अपना पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अलावा राज्य के ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है।

समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए किसानों की आधार आधारित बायोमीट्रिक पहचान अनिवार्य होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल वास्तविक किसान ही अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकें और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।

60 दिनों में पूरी होगी खरीद प्रक्रिया

भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद एक निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाती है। इसी के तहत नैफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से सरसों और चने की खरीद 60 दिनों की अवधि में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने राजफेड को निर्देश दिए हैं कि सभी खरीद केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं। इसमें किसानों के बैठने की व्यवस्था, तौल व्यवस्था, गुणवत्ता जांच और भुगतान से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से संचालित करने पर जोर दिया गया है।

किसानों के लिए हेल्पलाइन और निर्देश

राजफेड ने किसानों की सुविधा के लिए कॉल सेंटर भी स्थापित किया है। किसानों को किसी प्रकार की जानकारी या सहायता की आवश्यकता होने पर वे 18001806001 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। यहां उन्हें पंजीकरण, खरीद प्रक्रिया और अन्य संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

सहकारिता मंत्री ने किसानों से यह भी अपील की है कि वे अपनी फसल को साफ-सुथरा करके और अच्छी तरह छानकर ही खरीद केंद्रों पर लाएं। इससे गुणवत्ता मापदंडों के अनुसार फसल की जांच आसान होगी और किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

सरकार का मानना है कि समर्थन मूल्य पर यह खरीद व्यवस्था किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलेगा और कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।

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