राजस्थान की राजनीति में उस समय नया तूफान खड़ा हो गया, जब बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में वापसी का ऐलान करने वाले पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के ठिकानों पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मालवीया ने सीधे तौर पर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह कार्रवाई उन्हें राजनीतिक दबाव में लेने की कोशिश है, जबकि सत्ता पक्ष से जुड़े कथित भ्रष्ट विधायकों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
तीन ठिकानों पर ACB की कार्रवाई
मंगलवार 13 जनवरी को जयपुर से आई ACB की टीम ने बांसवाड़ा जिले में महेंद्रजीत मालवीया से जुड़े तीन ठिकानों पर जांच कार्रवाई की। टीम ने बागीदौरा क्षेत्र स्थित भैरवजी फिलिंग स्टेशन, कलिंजरा स्थित भैरवजी कृपा फिलिंग स्टेशन और बागीदौरा क्षेत्र में मौजूद एक क्रशर प्लांट पर दस्तावेजों की गहन जांच की।
जानकारी के अनुसार, दोनों पेट्रोल पंप महेंद्रजीत सिंह मालवीया के नाम दर्ज हैं, जबकि क्रशर प्लांट उनके पुत्र के नाम पर बताया जा रहा है।
सुबह से दोपहर तक चली जांच और पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक ACB की टीम मंगलवार सुबह करीब 9 बजे जयपुर पासिंग कार से बागीदौरा स्थित पेट्रोल पंप पहुंची। उस समय पंप का मैनेजर मौजूद नहीं था, जिसके चलते टीम को लगभग एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। मैनेजर के पहुंचने के बाद जमीन से जुड़े कागजात, पेट्रोल पंप के संचालन और आर्थिक लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई।
इसके बाद टीम क्रशर प्लांट पहुंची, जहां जमीन के स्वामित्व और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। दोपहर करीब 1 बजे टीम एक बार फिर पेट्रोल पंप पर लौटी और अतिरिक्त पूछताछ की। इसके बाद कलिंजरा स्थित पेट्रोल पंप पर भी इसी तरह की जांच की गई। दोनों स्थानों पर ACB की टीम करीब आधा-आधा घंटे तक रुकी।
छापेमारी की टाइमिंग पर उठे सवाल
ACB की इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, महेंद्रजीत मालवीया ने हाल ही में जयपुर में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में दोबारा शामिल होने का ऐलान किया था। उन्होंने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को पत्र सौंपकर पार्टी में वापसी की इच्छा जताई थी। इस घोषणा के महज 48 घंटे के भीतर ACB की टीम उनके ठिकानों पर पहुंच गई।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मालवीया ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि अगर चार गाड़ियां भेजकर जांच करवाई गई है, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि छापेमारी में आखिर मिला क्या। उनका आरोप है कि पंचायत राज चुनावों से पहले उन्हें कमजोर करने और दबाव में लेने के लिए यह रणनीति अपनाई जा रही है।


