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पुष्कर मेला 2025: SBI की अनोखी पहल, श्रद्धालुओं को मिल रहे ताजे नोट और सिक्के

पुष्कर मेला 2025: SBI की अनोखी पहल, श्रद्धालुओं को मिल रहे ताजे नोट और सिक्के

शोभना शर्मा, अजमेर।  राजस्थान का प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेला 2025 इन दिनों अपने पूरे रंग और उत्साह के साथ चल रहा है। ऊंट, घोड़े और पशु व्यापार के साथ-साथ यहां लोक-संस्कृति, आस्था और पर्यटन का संगम दिखाई दे रहा है। लेकिन इस बार मेले में एक अनोखी पहल ऐसी हुई है, जिसने न केवल श्रद्धालुओं बल्कि व्यापारियों और स्थानीय लोगों का भी दिल जीत लिया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की पुष्कर शाखा ने श्रद्धालुओं और सैलानियों की सुविधा के लिए मेले में एक “फ्रेश करेंसी कैंप” लगाया है, जहां लोगों को ताजे नोट और सिक्के वितरित किए जा रहे हैं। यह पहल जितनी सरल दिखती है, उतनी ही प्रभावशाली साबित हो रही है, क्योंकि मेले की भीड़भाड़ और छोटे लेन-देन के बीच छोटे नोटों और सिक्कों की हमेशा से कमी महसूस की जाती रही है।

मेले में SBI का आकर्षक करेंसी कैंप

मेले के मुख्य मार्ग पर स्थापित SBI का कैंप इन दिनों आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कैंप में दस और बीस रुपये के नए नोट तथा एक, दो और पांच रुपये के सिक्के वितरित किए जा रहे हैं। काउंटर पर सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं। श्रद्धालु, व्यापारी और बच्चे सभी उत्साह के साथ नोट बदलवाने पहुंच रहे हैं। कैंप के चारों ओर चहल-पहल का नजारा देखने लायक है। जहां एक ओर बच्चे मुस्कुराते हुए चमकदार सिक्के जेब में डाल रहे हैं, वहीं महिलाएं नए नोटों को देखकर प्रसन्नता जाहिर कर रही हैं। पुरुष व्यापारी अपने ऊंटों, गायों और भैंसों के सौदे के लिए इन छोटे नोटों का उपयोग कर रहे हैं। कई वर्षों से व्यापारी शिकायत करते आए हैं कि मेले में छोटे नोट और सिक्कों की कमी के कारण खरीद-बिक्री में असुविधा होती है। इस बार एसबीआई की पहल ने यह समस्या समाप्त कर दी है।

दस और बीस के नए नोटों ने बढ़ाई मेले की रौनक

फ्रेश करेंसी कैंप में दस और बीस रुपये के नए नोटों का विशेष भंडार रखा गया है। लोग नए नोट पाने के लिए उत्साहित हैं क्योंकि मेले में इनका उपयोग सबसे अधिक होता है। छोटे दुकानदारों, चाय-नाश्ते वालों, खिलौना विक्रेताओं और चूड़ी बेचने वाली महिलाओं को अब छुट्टे पैसों की दिक्कत नहीं रही। इस सुविधा से न केवल व्यापार में आसानी हुई है, बल्कि खरीद-बिक्री की रफ्तार भी तेज हो गई है। पहले जहां छुट्टे पैसों की कमी के चलते झगड़े और बहसें हो जाती थीं, अब वहां सौहार्द और सुविधा का माहौल है। हर कोई आसानी से अपने नोट बदलवा कर मनचाही खरीदारी कर पा रहा है।

सिक्कों के प्रचार के साथ डिजिटल जागरूकता का भी संदेश

एसबीआई के शाखा प्रबंधक देवेंद्र शर्मा ने बताया कि यह पहल केवल सुविधा के लिए नहीं बल्कि सिक्कों के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी की गई है।
उन्होंने कहा, “लोग सिक्कों को लेकर हिचकिचाते हैं, लेकिन अब हम चाहते हैं कि छोटे लेन-देन में सिक्कों का प्रयोग बढ़े। इससे न केवल अर्थव्यवस्था में तरलता बनी रहती है, बल्कि आमजन को भी सुविधा होती है।” कैंप में बैंक कर्मियों ने श्रद्धालुओं को डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई भुगतान प्रणाली की जानकारी भी दी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि एसबीआई केवल मुद्रा विनिमय तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और धार्मिक आयोजनों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने की दिशा में भी कार्यरत है।

श्रद्धालुओं और व्यापारियों ने दी सकारात्मक प्रतिक्रिया

कैंप के आसपास उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि लोगों ने इस पहल को कितनी गंभीरता से स्वीकार किया है। पुष्कर के स्थानीय व्यापारी घनश्याम शर्मा ने बताया कि “हर साल सिक्कों की कमी से परेशानी होती थी। ग्राहक छुट्टे पैसे मांगते थे तो देना मुश्किल हो जाता था। अब सब कुछ आसान हो गया है। कारोबार सुचारु रूप से चल रहा है।” इसी तरह जयपुर से आई श्रद्धालु नीलम गुप्ता ने कहा कि “हमने यहां पूजा के बाद प्रसाद और चूड़ियां खरीदीं। पहले छुट्टे के झंझट में आधा समय निकल जाता था, लेकिन अब बैंक के कैंप से छोटे नोट मिल गए तो बहुत सुविधा हुई।”

मेला बना आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र

पुष्कर मेला जहां एक ओर धार्मिक आस्था का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर है। हर साल हजारों व्यापारी, हस्तशिल्पी और पशुपालक यहां आते हैं और अपने उत्पाद बेचते हैं। ऐसे में मुद्रा विनिमय की सहज उपलब्धता व्यापार के लिए वरदान साबित हो रही है। एसबीआई की इस पहल ने न केवल श्रद्धालुओं और व्यापारियों को सुविधा दी है, बल्कि मेले में सकारात्मक आर्थिक माहौल भी तैयार किया है। अब छोटे दुकानदारों को बड़े नोट तोड़ने की परेशानी नहीं होती और ग्राहक भी बिना झंझट के खरीदारी कर रहे हैं।

बैंकिंग सेवा के सामाजिक दायित्व का उदाहरण

पुष्कर मेले में एसबीआई का यह फ्रेश करेंसी कैंप केवल बैंकिंग सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व (Social Responsibility) का उदाहरण भी है। इस पहल ने दिखाया है कि वित्तीय संस्थान केवल शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण और धार्मिक आयोजनों में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। प्रबंधक देवेंद्र शर्मा ने कहा कि, “हमारा उद्देश्य केवल करेंसी वितरण नहीं, बल्कि जनता तक सहज बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना है। हम चाहते हैं कि मेला केवल धार्मिक आयोजन न होकर आर्थिक रूप से भी सशक्त बने।”

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