राजस्थान के अजमेर जिले में हर साल आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले ने इस बार भी विदेशी और घरेलू पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया है। इस साल मेले का सबसे बड़ा आकर्षण पंजाब के मोहाली से आए 11 करोड़ के घोड़े ‘कर्मदेव’ और सैंड आर्टिस्ट अजय रावत द्वारा बनाए गए रेत के विशाल कलाकृतियां रही हैं। मेला न केवल राजस्थान के लोककला और संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि पशुपालन और पर्यटन के क्षेत्र में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान मिली है। पुष्कर मेला 15 नवंबर तक चलेगा, जिसमें अब तक 5000 से अधिक पशु पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें ऊंट, घोड़े और अन्य पशु शामिल हैं।
कर्मदेव: 11 करोड़ का महंगा घोड़ा
पंजाब के मोहाली से आए गुरु प्रताप सिंह गिल ने पुष्कर मेले में ‘कर्मदेव’ नामक घोड़े को प्रदर्शित किया है, जिसकी ऊंचाई 72 इंच है और उम्र 4 साल 3 महीने है। कर्मदेव के साथ-साथ उनके फार्म का अन्य महंगा घोड़ा ‘ब्रह्मदेव’ भी चर्चा में है, जिसकी कीमत भी 11 करोड़ आंकी गई है। इन दोनों घोड़ों की ख़ास बात यह है कि दोनों पंचकल्याणक हैं और जोधपुर में हुए रंसी शो में पुरस्कार भी जीत चुके हैं। हालाँकि, गुरु प्रताप सिंह गिल का कहना है कि वे इनकी कीमत जानने के बावजूद इन्हें बेचना नहीं चाहते, और यह उनकी शान के प्रतीक हैं। कर्मदेव के वंश में उसके पिता ‘द्रोणा’ और दादा ‘शानदार’ जैसे प्रसिद्ध घोड़े शामिल हैं।
सैंड आर्ट: रेत पर उकेरी गई अनोखी कलाकृतियाँ
पुष्कर मेले में इस बार राजस्थान के सैंड आर्टिस्ट अजय रावत द्वारा बनाई गई रेत की कलाकृतियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हैं। अजय रावत पिछले 15 सालों से बालू कला में महारत हासिल किए हुए हैं और यह कला किसी आधुनिक डिजिटल माध्यम से समझाई जा सकती है। रावत ने इस बार अपनी कलाकृतियों में क्यूआर कोड जोड़े हैं, जिन्हें स्कैन कर दर्शक इन कलाकृतियों के इतिहास और संदेश के बारे में जानकारी ले सकते हैं। रावत बताते हैं कि एक सैंड आर्ट को तैयार करने में उनकी टीम को 24 से 36 घंटे का समय लगता है और इस बार उन्होंने राजस्थान और भारत की संस्कृति से प्रेरित 30 से अधिक सैंड आर्ट प्रस्तुत किए हैं।
विदेशी पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण
पुष्कर मेला सिर्फ भारतीय पर्यटकों के लिए ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। जर्मनी से आए एक पर्यटक दंपति ने बताया कि यह उनका भारत का पहला दौरा है और पुष्कर मेले की भव्यता ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया है। ऊंट की सवारी से लेकर सैंड आर्ट का अनुभव उनकी यात्रा का एक विशेष हिस्सा बना। पुष्कर मेले में विदेशी पर्यटकों के ठहरने के लिए टेंट सिटी का भी निर्माण किया गया है, जहां वे आराम से राजस्थानी आतिथ्य का अनुभव कर सकते हैं।
5000 से अधिक पशुओं की मौजूदगी
पशुपालन विभाग के अनुसार, पुष्कर मेले में अब तक 5000 से अधिक पशुओं का पंजीकरण हो चुका है, जिसमें 1831 ऊंट और 3328 घोड़े शामिल हैं। पशु मेलों में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से व्यापारी और पशुपालक अपने ऊंट, घोड़े और अन्य पशु लाते हैं, जिनमें से कई की बोली करोड़ों में लगती है। पुष्कर का यह मेला पशुपालन उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां पशुओं की खरीद-फरोख्त होती है और उनकी नस्ल, कद-काठी और स्वास्थ्य के आधार पर उनकी कीमतें तय की जाती हैं।
पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम
पुष्कर मेला अपने पारंपरिक नृत्य, संगीत, ऊंट परेड और दीपदान जैसे कार्यक्रमों के कारण भी प्रसिद्ध है। मेले में कालबेलिया नृत्य, घुमर और अन्य पारंपरिक लोक नृत्य आयोजित किए जाते हैं। ऊंटों की परेड और प्रतियोगिताएं इस मेले के आकर्षण को और बढ़ाती हैं, जो न केवल राजस्थान के सांस्कृतिक पहलुओं को दर्शाती हैं बल्कि पर्यटकों को रोमांचक अनुभव भी प्रदान करती हैं।


