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पुष्कर पशु मेला 2025: देसी खेलों से लेकर ऊंट नृत्य तक, परंपरा और उत्सव का अनोखा संगम

पुष्कर पशु मेला 2025: देसी खेलों से लेकर ऊंट नृत्य तक, परंपरा और उत्सव का अनोखा संगम

मनीषा शर्मा, अजमेर। विश्वविख्यात पुष्कर पशु मेला 2025 इन दिनों अपने पूरे शबाब पर है। एक ओर नए मेला मैदान में ऊंट, घोड़े, भैंस और गायों की खरीद-फरोख्त जोरों पर चल रही है, वहीं पुराने मेला मैदान में देसी खेल, पशु प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दर्शकों का मन मोह रही हैं। पुष्कर का यह मेला न केवल देश-विदेश के व्यापारियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह राजस्थान की लोक संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन का जीवंत प्रदर्शन भी है। हालांकि धार्मिक रूप से मेला 2 नवंबर से औपचारिक रूप से शुरू होगा, लेकिन इससे पहले ही पुष्कर की रौनक अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
सैकड़ों ऊंटों की कतारें, विदेशी पर्यटकों की भीड़, रेतीले मैदान में देसी खेलों का रोमांच और ढोल-नगाड़ों की थाप पुष्कर को एक जीवंत सांस्कृतिक उत्सव में बदल चुके हैं।

विदेशी पर्यटक हुए देसी खेलों के रंग में रंगे

शनिवार को मेला मैदान में आयोजित लंगड़ी टांग दौड़ प्रतियोगिता ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। इस प्रतियोगिता में कुल 11 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें तीन देसी और आठ विदेशी युवतियां शामिल थीं। रेतीले मैदान में एक टांग पर संतुलन बनाते हुए दौड़ना विदेशी प्रतिभागियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। कई विदेशी प्रतिभागी रास्ते में गिर भी पड़ीं, लेकिन उनकी हंसी और जोश ने दर्शकों को खूब आनंदित किया। वहीं, देसी प्रतिभागियों ने अपनी लय और संतुलन से प्रतियोगिता में बाजी मारी। नागौर की पिंकू ने शानदार प्रदर्शन कर पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि पुष्कर की प्रगति दूसरे स्थान पर रहीं। इस रोमांचक मुकाबले ने मेला मैदान में उत्साह का माहौल बना दिया।

सतोलिया और गिल्ली-डंडा ने याद दिलाया देसी खेलों का पुराना दौर

लंगड़ी टांग के बाद मेला मैदान में सतोलिया और गिल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक खेलों का आयोजन हुआ। इन खेलों में देशी और विदेशी टीमों के 7-7 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। खेल शुरू होने से पहले आयोजकों ने विदेशी खिलाड़ियों को खेल के नियमों की जानकारी दी और डेमो मैच भी कराया ताकि वे भारतीय पारंपरिक खेलों को सही ढंग से समझ सकें। खेल शुरू होते ही मैदान में उत्साह और रोमांच का माहौल बन गया। देसी खिलाड़ियों ने अपनी फुर्ती, कौशल और अनुभव से विदेशी खिलाड़ियों को मात दी। भले ही विदेशी टीमें मैच हार गईं, लेकिन उनका उत्साह देखने लायक था। हर स्ट्राइक, हर थ्रो और हर रन पर तालियों की गूंज ने पूरे मेला मैदान को उत्सवमय बना दिया।

ऊंट श्रृंगार और ऊंट नृत्य बने मेले का आकर्षण

पुष्कर मेले का मुख्य आकर्षण हर साल की तरह इस बार भी ऊंट श्रृंगार और ऊंट नृत्य प्रतियोगिता रही। राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए ऊंट पालकों ने अपने ऊंटों को रंग-बिरंगे वस्त्र, गहनों और गोरबंध से सजाकर मंच पर पेश किया। ऊंटों की सुंदरता, उनके श्रृंगार की बारीकियां और उनकी चाल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

ऊंट श्रृंगार प्रतियोगिता में

  • सीकर के मांगीलाल ने पहला स्थान प्राप्त किया,

  • चावडिया के अशोक सिंह दूसरे स्थान पर रहे,

  • और गुमान सिंह तीसरे स्थान पर रहे।

इसके बाद आयोजित ऊंट नृत्य प्रतियोगिता में जब ढोल की थाप बजी तो रेतीले मैदान पर ऊंटों का नृत्य देख दर्शक दंग रह गए। ऊंटों ने अपने प्रशिक्षकों के इशारों पर संतुलन और लय के साथ अद्भुत नृत्य प्रस्तुत किया।

इस प्रतियोगिता में

  • झुंझुनू के नेकी राम पहले,

  • सीकर के शीशपाल दूसरे,

  • और झुंझुनू के कपिल तीसरे स्थान पर रहे।

दर्शकों ने तालियों से इन प्रस्तुतियों का स्वागत किया, जबकि विदेशी सैलानियों ने हर पल को अपने कैमरों में कैद किया।

धार्मिक आस्था और पर्यटन का संगम

पुष्कर केवल व्यापार और मनोरंजन का केंद्र नहीं, बल्कि आस्था और श्रद्धा का प्रतीक भी है। मेले में आए श्रद्धालु पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर यहां स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सरोवर के घाटों पर आरती, भजन और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालु आध्यात्मिक अनुभूति में डूबे दिखाई देते हैं।

संस्कृति और पर्यटन का वैश्विक मंच बना पुष्कर

पुष्कर पशु मेला आज केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि भारत की लोक संस्कृति का अंतरराष्ट्रीय परिचायक बन चुका है। यहां हर साल हजारों विदेशी पर्यटक आते हैं, जो भारतीय परंपराओं, लोक संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प और पशु प्रतियोगिताओं का अनुभव लेकर जाते हैं। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा मेले के आयोजन को और आकर्षक बनाने के लिए कई सांस्कृतिक कार्यक्रम, हस्तशिल्प प्रदर्शनियां और लोकनृत्य प्रस्तुतियां भी आयोजित की जा रही हैं।

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