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PTI भर्ती घोटाला: डमी कैंडिडेट और फर्जी डिग्री का खुलासा, SOG ने 2 अभ्यर्थी और 2 यूनिवर्सिटी पर दर्ज किया केस

PTI भर्ती घोटाला: डमी कैंडिडेट और फर्जी डिग्री का खुलासा, SOG ने 2 अभ्यर्थी और 2 यूनिवर्सिटी पर दर्ज किया केस

राज्य में भर्ती परीक्षाओं की शुचिता पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने 2022 PTI भर्ती परीक्षा से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास करने और फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल करने के मामले में SOG ने दो अभ्यर्थियों और भोपाल की दो यूनिवर्सिटी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। SOG की इस कार्रवाई के बाद शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में चल रहे संगठित फर्जीवाड़े की परतें एक बार फिर खुलती नजर आ रही हैं।

हस्ताक्षर और फोटो से खुली डमी कैंडिडेट की पोल

SOG के अनुसार, आरोपी अभ्यर्थी अनिल पाटीदार ने अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति को परीक्षा में बैठाया। DIG परिस देशमुख ने बताया कि जांच के दौरान परीक्षा केंद्र के अटेंडेंट रजिस्टर में दर्ज हस्ताक्षरों और परीक्षा के दौरान रिकॉर्ड की गई फोटो का मिलान किया गया। जांच में सामने आया कि परीक्षा केंद्र पर किए गए हस्ताक्षर वर्तमान हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते। इससे स्पष्ट हुआ कि अनिल पाटीदार ने स्वयं परीक्षा नहीं दी, बल्कि डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास की।

डिग्री में गड़बड़ी, बैकडेट कर दिखाया दो साल का कोर्स

SOG की जांच में यह भी सामने आया कि अनिल पाटीदार ने आवेदन पत्र में जेएस यूनिवर्सिटी की बीपीएड (BPEd) डिग्री होने का उल्लेख किया था, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान उसने रवींद्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल की बीपीएड डिग्री प्रस्तुत की। डिग्री में बीपीएड कोर्स की अवधि दो साल बताई गई थी, जबकि वास्तव में यह कोर्स एक वर्ष का ही होता है। जांच में सामने आया कि बैकडेट में डिग्री जारी कर बीपीएड को दो वर्षीय दर्शाया गया, जिससे आरोपी ने नियमों का उल्लंघन करते हुए पीटीआई भर्ती में चयन का लाभ हासिल किया।

रवींद्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय पर भी केस दर्ज

SOG ने इस मामले में रवींद्र नाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल को भी आरोपी बनाते हुए मुकदमा दर्ज किया है। जांच एजेंसी का मानना है कि बिना वैधानिक प्रक्रिया के डिग्री जारी कर भर्ती नियमों को प्रभावित किया गया।

दूसरा आरोपी भी डमी कैंडिडेट से पास

इसी तरह, रीडमल राम देवासी के खिलाफ भी शिकायत सामने आई थी। जांच में यह पुष्टि हुई कि उसने भी स्वयं परीक्षा नहीं दी, बल्कि डमी अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठाया। SOG की पड़ताल में सामने आया कि रीडमल राम ने श्रीसत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस, भोपाल के प्रशासन से मिलीभगत कर फर्जी तरीके से बैकडेट में डिग्री हासिल की। इसके बाद उसने डमी कैंडिडेट के जरिए परीक्षा पास कर पीटीआई भर्ती में चयन पाया।

श्रीसत्य साईं यूनिवर्सिटी भी आरोपी, 67 डिग्रियों पर सवाल

इस मामले में SOG ने श्रीसत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंस को भी एफआईआर में आरोपी बनाया है। अब तक की जांच में सामने आया है कि कुल 67 अभ्यर्थियों की डिग्रियां इसी यूनिवर्सिटी से जुड़ी हुई हैं। इनमें से करीब 40 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने आवेदन पत्र में किसी अन्य यूनिवर्सिटी की डिग्री दर्शाई, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के समय श्रीसत्य साईं यूनिवर्सिटी की डिग्री प्रस्तुत की। इस संदेह के आधार पर SOG ने यूनिवर्सिटी परिसर में रेड कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।

भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

SOG की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि भर्ती परीक्षाओं में डिग्री सत्यापन और परीक्षा संचालन की निगरानी कितनी प्रभावी है। डमी कैंडिडेट और फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल करने जैसे मामलों से न केवल योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन होता है, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

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