राज्य की एसडीओ सहित अन्य राजस्व अदालतों (Revenue Court) में मुकदमों की ऑनलाइन फाइलिंग की नई व्यवस्था को लेकर विरोध शुरू हो गया है। इस प्रक्रिया के खिलाफ बुधवार को राजस्व बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार करते हुए प्रदर्शन किया। वकीलों का कहना है कि बिना तैयारी और पूर्व संवाद के लागू की गई ई-फाइलिंग प्रणाली न केवल अधिवक्ताओं बल्कि आम पक्षकारों के हितों के भी प्रतिकूल है।
बिना परामर्श लागू की गई नई व्यवस्था
राजस्व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकरलाल चौधरी ने बताया कि ऑनलाइन मुकदमे दाखिल करने की प्रक्रिया लागू करने से पहले बार एसोसिएशन से किसी भी तरह की चर्चा या परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि न तो राजस्व बार की सहमति ली गई और न ही राजस्थान रेवेन्यू कोर्ट मैन्युअल में कोई आवश्यक संशोधन किया गया। बार अध्यक्ष के अनुसार, बिना कानूनी ढांचे में बदलाव किए इस तरह की व्यवस्था लागू करना न्यायिक प्रक्रिया को जटिल बना सकता है और इससे भविष्य में कई व्यावहारिक समस्याएं खड़ी होंगी।
काश्तकारों को होगी सबसे ज्यादा परेशानी
वकीलों ने कहा कि राजस्व अदालतों और राजस्व मंडल में आने वाले अधिकांश मामले काश्तकारों और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों से जुड़े होते हैं। इन पक्षकारों को ई-फाइलिंग जैसी डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। ऐसे में वे या तो बिचौलियों पर निर्भर होंगे या फिर उनके मामलों में तकनीकी त्रुटियों के कारण देरी होगी। राजस्व बार का कहना है कि डिजिटल जानकारी के अभाव में फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की आशंका भी बढ़ सकती है। गलत दस्तावेज अपलोड होने या बिना जानकारी के मुकदमे दाखिल होने से काश्तकारों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
न्यायिक कार्य बहिष्कार का फैसला
इन सभी मुद्दों को लेकर राजस्व बार एसोसिएशन ने सांकेतिक न्यायिक कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया। बुधवार को अधिवक्ताओं ने अदालतों में पेशी नहीं की और नई ई-फाइलिंग व्यवस्था के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। बार एसोसिएशन का कहना है कि उनका उद्देश्य न्यायिक कामकाज को बाधित करना नहीं है, बल्कि सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उससे जुड़े सभी पक्षों से संवाद जरूरी है।
जिला स्तरीय बार से मांगा समर्थन
राजस्व बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रदेश भर की जिला स्तरीय बार एसोसिएशन को पत्र लिखकर ई-फाइलिंग व्यवस्था के विरोध में समर्थन मांगा गया है। बार का मानना है कि यदि सभी जिलों से एकजुट होकर आवाज उठाई जाएगी, तो सरकार को इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वकीलों ने संकेत दिए हैं कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
हजारों मामलों की सुनवाई पर असर
न्यायिक कार्य बहिष्कार के चलते जिले भर में हजारों राजस्व मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई है। कई मामलों में तारीखें आगे बढ़ गई हैं, जिससे पहले से लंबित मुकदमों का बोझ और बढ़ने की आशंका है। वकीलों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आम नागरिकों को न्याय मिलने में और देरी होगी, जिसका जिम्मेदार प्रशासन होगा।
समाधान की मांग
राजस्व बार एसोसिएशन ने मांग की है कि ई-फाइलिंग व्यवस्था लागू करने से पहले रेवेन्यू कोर्ट मैन्युअल में आवश्यक संशोधन, अधिवक्ताओं को प्रशिक्षण और काश्तकारों के लिए सरल प्रक्रिया तय की जाए। इसके साथ ही बार एसोसिएशन के साथ औपचारिक चर्चा कर व्यावहारिक समस्याओं का समाधान निकाला जाए। फिलहाल, अधिवक्ताओं के विरोध और कार्य बहिष्कार से यह साफ हो गया है कि राजस्व अदालतों में ई-फाइलिंग की राह इतनी आसान नहीं होगी और सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से कदम उठाने होंगे।


