राजस्थान की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी का स्तर और नेताओं की भाषा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के एक बयान ने प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। जयपुर स्थित अपने आवास पर देर रात आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मदन राठौड़ ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल पर तीखा हमला बोला था। राठौड़ ने बेनीवाल की भाषा और राजनीतिक शैली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें “संस्कार प्राप्त करने की जरूरत” है। इसके बाद से राजस्थान की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
मदन राठौड़ ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि राजनीति में शब्दों की मर्यादा लगातार गिरती जा रही है और कुछ नेता गाली-गलौज तथा विवादित भाषा का इस्तेमाल कर तालियां बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि कुछ नेता राजनीति को इस स्तर तक ले जा रहे हैं कि जनता का नेताओं से विश्वास उठने लगा है। उन्होंने सीधे तौर पर हनुमान बेनीवाल का जिक्र करते हुए कहा कि मंत्रीमंडल और मुख्यमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना निंदनीय है। राठौड़ ने यह भी कहा कि ऐसे बयानों से लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा प्रभावित होती है और राजनीति में शुद्धिकरण की जरूरत है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लगातार कई पोस्ट कर पलटवार किया। पिछले 24 घंटों के भीतर बेनीवाल ने बीजेपी नेताओं के पुराने बयान, वायरल ऑडियो और वीडियो साझा करते हुए बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। बेनीवाल ने अपने पहले पोस्ट में राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक के वायरल ऑडियो का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए ऑडियो के आपत्तिजनक हिस्से को हटाकर साझा किया गया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यही बीजेपी के संस्कार हैं।
इसके बाद बेनीवाल ने अखबार में प्रकाशित एक रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें मंत्री गौतम दक के कथित वायरल ऑडियो और विवादित बयान का जिक्र था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीजेपी के नेता और मंत्री इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तब पार्टी नेतृत्व चुप क्यों रहता है। बेनीवाल ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि बीजेपी को पहले अपने नेताओं की भाषा और आचरण पर ध्यान देना चाहिए।
तीसरे पोस्ट में हनुमान बेनीवाल ने सीधे मदन राठौड़ को टैग करते हुए विधायक निधि और कथित कमीशनखोरी के मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेतृत्व अपनी ही पार्टी के विवादित नेताओं को बचाने का काम कर रहा है। बेनीवाल ने सवाल किया कि क्या भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नेताओं का समर्थन करना ही बीजेपी के संस्कार हैं। इस पोस्ट के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया।
इसके अलावा बेनीवाल ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वे मीडिया के सामने शिक्षकों के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को साझा करते हुए बेनीवाल ने कहा कि सत्ता के अहंकार में बीजेपी नेता शब्दों की मर्यादा भूल चुके हैं और उन्हें दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले खुद आत्ममंथन करना चाहिए।
इस पूरे विवाद में कांग्रेस भी सक्रिय हो गई है। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं को दूसरों को संस्कार सिखाने से पहले अपने मंत्रियों और नेताओं के बयान देखने चाहिए। खाचरियावास ने कहा कि यदि बीजेपी के मंत्रियों के ऑडियो वायरल हो रहे हैं और उनमें महिलाओं तथा समाज के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल हो रहा है, तो उस पर भी प्रदेश नेतृत्व को जवाब देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि हनुमान बेनीवाल संतों और धार्मिक मुद्दों को लेकर अपनी बात रख रहे थे, लेकिन बीजेपी ने राजनीतिक हमला बोलकर पूरे मुद्दे को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की। खाचरियावास ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से पार्टी के चरित्र और नेताओं की कार्यशैली पर जवाब देने की मांग की। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि उन्हें संबंधित ऑडियो मिल गया तो वे उसे सार्वजनिक भी करेंगे।
राजस्थान की राजनीति में यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह राजनीतिक नैतिकता, भाषा की मर्यादा और नेताओं के सार्वजनिक आचरण पर भी सवाल खड़े कर रहा है। बीजेपी और आरएलपी के बीच लंबे समय से राजनीतिक टकराव चलता रहा है, लेकिन इस बार मामला व्यक्तिगत टिप्पणियों और सोशल मीडिया वार तक पहुंच गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे के पुराने बयान और वीडियो सामने ला रहे हैं।
दिलचस्प बात यह भी रही कि जब इस पूरे विवाद पर बीजेपी के अन्य नेताओं से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो अधिकांश नेता खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। पार्टी के कई नेताओं ने कैमरे के सामने बयान देने से इनकार कर दिया। इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि पार्टी फिलहाल इस विवाद को ज्यादा बढ़ाने से बचना चाहती है।


