भारत में वर्ष 2026 की जनगणना प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद किसी जनसंख्या आंकड़े या प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नहीं, बल्कि उस जनगणना प्रपत्र को लेकर है जिसके माध्यम से घर-घर जाकर नागरिकों की जानकारी एकत्र की जा रही है। राजस्थान की राजनीति में इस मुद्दे ने अचानक गर्माहट पैदा कर दी है। बाड़मेर-जैसलमेर से सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने जनगणना फॉर्म के 12वें कॉलम को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
दरअसल पूरा विवाद जनगणना प्रपत्र में दिए गए उस कॉलम को लेकर है, जिसमें जातिगत श्रेणियों का उल्लेख किया गया है। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल का आरोप है कि फॉर्म में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए स्पष्ट विकल्प दिए गए हैं, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के लिए अलग से कोई कॉलम नहीं रखा गया। उनका कहना है कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले वर्ग को ‘अन्य’ की श्रेणी में डालना सामाजिक और राजनीतिक रूप से गंभीर मामला है। उन्होंने इसे OBC वर्ग के साथ भेदभाव बताते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में जातिगत जनगणना को लेकर गंभीर है तो उसे सभी वर्गों की स्पष्ट और पारदर्शी गणना करनी चाहिए।
उम्मेदाराम बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में कहा कि संसद में जातिगत जनगणना पर सहमति जताने के बावजूद जनगणना प्रपत्र में OBC के लिए अलग कॉलम शामिल नहीं करना सरकार की कथनी और करनी के बीच के अंतर को उजागर करता है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि “घर की कोई जाति नहीं होती।” सांसद ने सवाल उठाया कि यदि सरकार यह मानती है कि घर की कोई जाति नहीं होती, तो फिर जनगणना के दौरान परिवारों से जुड़ी विस्तृत सामाजिक और आर्थिक जानकारी क्यों जुटाई जा रही है। उनका कहना है कि जब SC और ST वर्ग का अलग वर्गीकरण किया जा रहा है, तब OBC समुदाय को उस प्रक्रिया से बाहर रखना समझ से परे है।
राजस्थान की राजनीति में यह मुद्दा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में OBC वर्ग का बड़ा वोट बैंक है। जाट, गुर्जर, बिश्नोई, यादव और अन्य पिछड़ी जातियां लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर सक्रिय रही हैं। ऐसे में उम्मेदाराम बेनीवाल का यह बयान सीधे तौर पर OBC समुदाय को एकजुट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकता है, खासकर तब जब जातिगत जनगणना की मांग पहले से ही कई राज्यों में जोर पकड़ चुकी है।
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों और युवाओं के बीच भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के कारण OBC वर्ग जातिगत जनगणना को अपने अधिकारों और भविष्य से जोड़कर देख रहा है। युवाओं का मानना है कि यदि वास्तविक जनसंख्या के आंकड़े सामने आएंगे तो आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई नीतियों का रास्ता खुल सकता है। यही वजह है कि जनगणना प्रपत्र में OBC वर्ग के लिए अलग कॉलम नहीं होने पर कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
उम्मेदाराम बेनीवाल ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जनगणना प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रपत्र के 12वें कॉलम में तत्काल संशोधन किया जाए। उनका कहना है कि अधूरी और अस्पष्ट गणना से देश के सबसे बड़े सामाजिक वर्ग की वास्तविक स्थिति कभी सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व की बात करती है तो उसे OBC वर्ग की अलग और स्पष्ट गणना सुनिश्चित करनी चाहिए।
इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रूप भी लेना शुरू कर दिया है। सांसद ने अपनी पोस्ट में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge को भी टैग किया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि विपक्ष आने वाले समय में इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठा सकता है। माना जा रहा है कि संसद के आगामी सत्र में भी यह विषय चर्चा का केंद्र बन सकता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पहले से ही जातिगत जनगणना की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं। ऐसे में जनगणना प्रपत्र का यह विवाद राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।


