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पवन खेड़ा पर छापेमारी से सियासत गरमाई, कांग्रेस का भाजपा पर हमला

पवन खेड़ा पर छापेमारी से सियासत गरमाई, कांग्रेस का भाजपा पर हमला

असम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा  के घर पर असम पुलिस की छापेमारी के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है। इस पूरे मामले की शुरुआत असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर कथित तौर पर तीन पासपोर्ट रखने के आरोपों से हुई, जिसे लेकर पवन खेड़ा ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल उठाए थे। इसके बाद असम पुलिस द्वारा दिल्ली पहुंचकर की गई कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

राजस्थान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर पवन खेड़ा का समर्थन किया है और इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा असम चुनाव में संभावित हार से घबराकर इस तरह की कार्रवाई कर रही है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नहीं करती और पुलिस तथा सरकारी एजेंसियों का सहारा लेकर विपक्ष पर हमला करती है। गहलोत ने असम पुलिस की इस कार्रवाई को “कायराना” करार देते हुए कहा कि कांग्रेस ऐसे दबावों से डरने वाली नहीं है।

गहलोत ने आगे कहा कि भाजपा की राजनीति अब डराने और धमकाने तक सीमित हो गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, असम की जनता अब इन तरीकों को समझ चुकी है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।

इसी क्रम में राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी भाजपा पर तीखा प्रहार किया। डोटासरा ने कहा कि भाजपा अब खुलकर तानाशाही पर उतर आई है और विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पवन खेड़ा के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। डोटासरा ने यह भी कहा कि खेड़ा ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े मुद्दों को उजागर किया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है।

डोटासरा ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस का हर कार्यकर्ता इस मामले में एकजुट है और पार्टी किसी भी तरह के दबाव में आने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि सच्चाई को दबाने के लिए चाहे जितनी कोशिशें कर ली जाएं, लेकिन कांग्रेस इसे उजागर करती रहेगी।

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली  ने भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा। जूली ने कहा कि असम चुनाव में हार के डर से भाजपा बौखला गई है और अब पुलिस व सरकारी एजेंसियों के सहारे विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पवन खेड़ा के घर हुई छापेमारी को न केवल कायराना कदम बताया, बल्कि इसे भाजपा की तानाशाही का प्रमाण भी कहा।

जूली ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा जवाब देने के बजाय फर्जी मामलों और दमन की राजनीति कर रही है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में इस तरह की कार्रवाई न केवल गलत है, बल्कि इससे संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि असम की जनता इस पूरे घटनाक्रम को देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर देश में एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि भाजपा सरकार केंद्रीय और राज्य स्तर की जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए करती है, जबकि भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है। भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम करता है और जो भी जांच होती है, वह तथ्यों के आधार पर होती है।

हालांकि, पवन खेड़ा के घर पर हुई इस कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा दिया है। खासतौर पर ऐसे समय में जब विभिन्न राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं, इस तरह की घटनाएं राजनीतिक दलों के बीच टकराव को और बढ़ा सकती हैं। कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, जबकि भाजपा की ओर से अब तक इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक छापेमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण और स्पष्ट हो रहा है। जहां कांग्रेस इसे अपने खिलाफ साजिश के रूप में पेश कर रही है, वहीं भाजपा इसे कानून के दायरे में की गई कार्रवाई बता सकती है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है। क्या यह मामला केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा या फिर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर और अधिक गहराएगा। फिलहाल इतना तय है कि पवन खेड़ा के घर पर हुई इस छापेमारी ने सियासी माहौल को गरमा दिया है और आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी प्रमुखता से उठ सकता है।

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