मनीषा शर्मा। राजस्थान में स्कूलों और मदरसों में राष्ट्रगीत वंदेमातरम् को अनिवार्य रूप से गाने के आदेश के बाद सियासत तेज हो गई है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने 7 नवंबर को वंदेमातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर प्रदेशभर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एक साथ गीत गाने का कार्यक्रम आयोजित किया था। इस आदेश के बाद राज्य की राजनीति में नए विवाद ने जन्म ले लिया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस आदेश को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला बोला। वहीं, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस और विरोध करने वालों को कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का विरोध करना न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि यह देशभक्ति की भावना के खिलाफ है।
मदन दिलावर का बयान – “वंदेमातरम् का विरोध करने वाले मूर्ख”
राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि जो लोग वंदेमातरम् गाने का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में राष्ट्र और राष्ट्रगीत की गरिमा को नहीं समझते। दिलावर ने कहा, “जहां मेरे विधायक बैठते हैं, उस विधानसभा में से कोई यह कह दे कि वंदेमातरम् या ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान गलत है, तो उससे बड़ा मूर्ख कोई नहीं होगा।”
उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने जिस तरह इस अभियान की आलोचना की है, उससे यह साफ झलकता है कि उनमें राष्ट्रप्रेम की भावना नहीं है। दिलावर ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा राष्ट्रवाद को दिखावे के तौर पर अपनाया है, लेकिन वास्तव में उसे कभी आत्मसात नहीं किया।
कांग्रेस का पलटवार – बीजेपी पर राजनीति करने का आरोप
इस आदेश के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रगीत का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बीजेपी सरकार को घेरते हुए कहा कि बीजेपी राष्ट्रवाद की आड़ में तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति कर रही है।
अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा वंदेमातरम् और राष्ट्रगान को सम्मान दिया है। लेकिन बीजेपी इस तरह के आयोजनों का इस्तेमाल जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए करती है।
देशभर में मनाई गई वंदेमातरम् की 150वीं वर्षगांठ
दरअसल, 7 नवंबर को राष्ट्रगीत वंदेमातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्यों में इसे बड़े स्तर पर मनाया गया। राजस्थान में भी शिक्षा विभाग के आदेश पर सभी स्कूलों में सामूहिक रूप से वंदेमातरम् गाया गया।
इस आयोजन का उद्देश्य छात्रों में राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना और देश की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देना था। लेकिन इस कार्यक्रम के राजनीतिक रूप लेने से इसका केंद्र राष्ट्रभक्ति से हटकर सियासी बहस बन गया।
सियासी माहौल में बढ़ी गर्मी
वंदेमातरम् पर यह विवाद अब राजस्थान की सियासत में नया मोड़ ले आया है। एक ओर बीजेपी इसे राष्ट्र गौरव और संस्कृति से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे धार्मिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक चाल बता रही है।


