मनीषा शर्मा। राजस्थान की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राज्य सरकार में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कांग्रेस सांसद मुरारी लाल मीणा और दौसा विधायक डीसी बैरवा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चित्र को फाड़ना बेहद निंदनीय कृत्य है। उन्होंने टिप्पणी की कि मोदी जी का चित्र फाड़ देने से कोई व्यक्ति समाज का बड़ा हितैषी या “भागीरथ” नहीं बन सकता। उनके अनुसार भाजपा केवल एक राष्ट्रीय दल ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है, और इस तरह की हरकतें लोकतांत्रिक संवाद के बजाय टकराव को बढ़ावा देती हैं।
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि इस प्रकार के कदम राजनीतिक असहमति जताने का सही तरीका नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना का स्थान होता है, लेकिन प्रतीकों और संवैधानिक पदों से जुड़े सम्मान को चोट पहुंचाना गलत संदेश देता है। मंत्री ने विपक्षी नेताओं से अपेक्षा जताई कि वे जनता के मुद्दों पर रचनात्मक बहस करें, न कि उत्तेजक गतिविधियों का सहारा लें।
जनसुनवाई पर उठे सवाल
कृषि मंत्री ने जनसुनवाई के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि कई नेता चुनाव हारने के बाद जनता के बीच दिखाई तक नहीं देते, जबकि कुछ जन-प्रतिनिधि लगातार लोगों की समस्याएं सुनकर उन्हें सरकार तक पहुंचाते हैं। ऐसे प्रयासों पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय रहता है, तो उसकी आलोचना करने के बजाय सहयोग किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने सांसद मुरारी लाल मीणा और विधायक डीसी बैरवा के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में परहेज बरतना चाहिए था।
“समाज में दूरी बढ़ाने वाला कदम”
दौसा में हाल ही में घटित घटनाक्रम को लेकर किरोड़ी लाल मीणा ने स्पष्ट कहा कि डाक बंगले का ताला तोड़ने का प्रयास और प्रधानमंत्री के चित्र को फाड़ने जैसी गतिविधियां ईर्ष्या और राजनीतिक असहिष्णुता से प्रेरित लगती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कृत्य समाज में दूरियां पैदा करते हैं, जबकि लोकतंत्र का मूल संदेश सामाजिक समरसता और संवाद बढ़ाना है।
मंत्री के अनुसार, राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जिम्मेदार नेताओं को यह समझना होगा कि उनके हर कदम का सीधा प्रभाव समाज के माहौल पर पड़ता है। यदि जन-प्रतिनिधि ही आक्रामक रवैया अपनाएंगे, तो आम नागरिकों के बीच भी टकराव की भावना बढ़ सकती है। इसीलिए उन्होंने सभी दलों से शालीनता और लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
कड़ी चेतावनी, बढ़ती सियासी गर्माहट
अपने बयान के अंत में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि वे इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, और यदि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा सामने आई, तो “नहले का जवाब दहले से” दिया जाएगा। इस बयान के बाद दौसा की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी चुनावी माहौल और दलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का संकेत भी देता है। जहां भाजपा इसे सम्मान और अनुशासन के प्रश्न के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे जनता से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज करने के आरोपों से जोड़ सकती है।
दौसा के स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस विवाद ने आम लोगों का ध्यान फिर से राजनीतिक टकराव की ओर खींच लिया है। वहीं, प्रशासन स्तर पर भी यह प्रयास किए जा रहे हैं कि भविष्य में ऐसी कोई स्थिति न बने जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री के चित्र को लेकर शुरू हुआ विवाद अब व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। कृषि मंत्री की चेतावनी से यह साफ दिखाई देता है कि आने वाले दिनों में दौसा की सियासत और भी तेज हो सकती है, जबकि जनता यह उम्मीद कर रही है कि नेताओं का ध्यान अंततः विकास और जनसमस्याओं के समाधान पर केंद्रित रहे।


