सवाई माधोपुर जिले के राठौद गांव में आयोजित बगड़ावत संगम महोत्सव इन दिनों सियासी चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वजह है गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष और बीजेपी नेता विजय बैंसला का मंच से दिया गया बयान, जिसमें उन्होंने अपनी ही पार्टी के विधायक पर खुलकर नाराजगी जाहिर की।
इस आयोजन में गुजरात से आए हार्दिक पटेल समेत गुर्जर समाज से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। मंच पर सामाजिक एकता और ऐतिहासिक विरासत की बात हो रही थी, लेकिन इसी दौरान विजय बैंसला का बयान राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर गया।
बीजेपी विधायक राजेंद्र गुर्जर पर सीधा तंज
कार्यक्रम के दौरान भाषण देते हुए विजय बैंसला ने देवली-उनियारा से बीजेपी विधायक राजेंद्र गुर्जर पर अप्रत्यक्ष नहीं बल्कि सीधे तौर पर निशाना साधा। बैंसला ने मंच से कहा कि जब उन्हें चुनाव में टिकट मिला तो राजेंद्र गुर्जर ने अपना फोन बंद कर लिया था।
उन्होंने कहा कि जिन राजेंद्र गुर्जर को कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने खुद हाथ पकड़कर टिकट दिलवाया था, वही उस समय संपर्क से बाहर हो गए। बैंसला ने यह भी जोड़ा कि राजेंद्र गुर्जर कभी संघर्ष समिति का हिस्सा रहे थे, ऐसे में उनका यह व्यवहार समझ से परे है। बैंसला के इस बयान के बाद मंच पर मौजूद लोग चौंक गए और कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
बयान के सियासी मायने क्यों अहम हैं
विजय बैंसला का यह बयान केवल व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके पीछे गहरे राजनीतिक संकेत देखे जा रहे हैं। गुर्जर आरक्षण आंदोलन ने राजस्थान की राजनीति में समय-समय पर बड़ा प्रभाव डाला है और इस आंदोलन से जुड़े कई नेता बाद में सक्रिय राजनीति में पहुंचे।
जब आंदोलन से जुड़े एक प्रमुख चेहरे द्वारा अपनी ही पार्टी के विधायक पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए जाते हैं, तो यह पार्टी के भीतर असंतोष का संकेत माना जाता है। खास बात यह है कि विजय बैंसला खुद साल 2023 के विधानसभा चुनाव में देवली-उनियारा सीट से मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उपचुनाव में वे टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन बीजेपी ने राजेंद्र गुर्जर को उम्मीदवार बनाया। इसी पृष्ठभूमि में बैंसला का यह बयान और अधिक अहम हो जाता है।
2023 चुनाव और पार्टी विरोधी गतिविधियों का संदर्भ
साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान गुर्जर समाज और बीजेपी के कुछ नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। उस समय कुछ नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप भी लगे थे। बैंसला का ताजा बयान उसी पुराने घटनाक्रम को फिर से चर्चा में ले आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान न केवल व्यक्तिगत अनुभव साझा करने तक सीमित है, बल्कि इसके जरिए पार्टी नेतृत्व को भी एक संदेश देने की कोशिश की गई है।
हार्दिक पटेल का सामाजिक एकता पर जोर
कार्यक्रम में मौजूद हार्दिक पटेल ने अपने संबोधन में गुर्जर समाज की विरासत, इतिहास और संस्कृति की प्रशंसा की। उन्होंने 24 बगड़ावत भाइयों की लोकगाथाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विलुप्त होती बगड़ावत परंपरा को पुनर्जीवित करेंगे और समाज को एकजुट करने का काम करेंगे। हार्दिक पटेल ने यह भी कहा कि लोग उनसे अक्सर पूछते हैं कि क्या पटेल और गुर्जर एक ही हैं। इस पर उनका जवाब हमेशा यही रहता है कि पटेल, पाटीदार, कुनबी, कुर्मी, मराठा, गुर्जर और कापू मूल रूप से एक ही सामाजिक धारा से जुड़े हैं। उनके इस बयान को सामाजिक समरसता और साझा पहचान के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर तेज बहस
विजय बैंसला के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होते ही अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे। कुछ लोग इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बता रहे हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत पीड़ा और पुराने अनुभवों की अभिव्यक्ति मान रहे हैं। फिलहाल, बगड़ावत संगम महोत्सव का यह बयान सामाजिक मंच से निकला जरूर है, लेकिन इसके राजनीतिक असर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का बीजेपी और गुर्जर समाज की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।


