राजस्थान के कोटा जिले के रामगंज मंडी क्षेत्र में लंबे समय से बनी सिंचाई संकट की समस्या के समाधान की दिशा में अब ठोस प्रयास तेज हो गए हैं। इस क्षेत्र की लगभग 12 हजार हेक्टेयर असिंचित भूमि को मध्यप्रदेश स्थित गांधी सागर बांध से पानी उपलब्ध कराने की योजना पर दोनों राज्यों के स्तर पर गंभीरता से काम शुरू हो चुका है। यह पहल क्षेत्र के किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है, जो वर्षों से जल संकट और घटते कृषि उत्पादन की समस्या से जूझ रहे हैं।
इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने मध्यप्रदेश के इंदौर में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट से मुलाकात कर इस प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में दोनों राज्यों के अधिकारियों ने भी भाग लिया और योजना के तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। दिलावर के साथ राजस्थान जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर अपना पक्ष रखा।
बैठक के दौरान दिलावर ने रामगंज मंडी क्षेत्र की स्थिति को विस्तार से रखते हुए बताया कि यह इलाका डार्क जोन में शामिल है, जहां भूमिगत जल स्रोत लगभग समाप्ति की स्थिति में पहुंच चुके हैं। इसके कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि वर्षों से असिंचित पड़ी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में करीब 2 हजार हेक्टेयर भूमि के लिए भी कोई प्रभावी सिंचाई योजना तैयार नहीं हो सकी है, क्योंकि पर्याप्त जल स्रोत उपलब्ध नहीं हैं। इस स्थिति के चलते किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और कृषि उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
मदन दिलावर ने इस समस्या के समाधान के लिए गांधी सागर बांध से पानी लाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के भानपुरा क्षेत्र से सटे इलाकों में पहले से ही इस बांध की नहरों के माध्यम से सिंचाई की जा रही है। इन नहरों से निकलने वाला अतिरिक्त पानी यदि उचित योजना के तहत रामगंज मंडी तक पहुंचाया जाए, तो यहां की लगभग 12 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जा सकता है। यह प्रस्ताव न केवल तकनीकी रूप से संभव माना जा रहा है, बल्कि इससे दोनों राज्यों के बीच जल संसाधनों के बेहतर उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है।
दिलावर ने यह भी सुझाव दिया कि गांधी सागर से मध्यप्रदेश के रीवा बैराज तक एक नई फीडर चैनल विकसित की जाए, जिससे पानी को आगे बढ़ाकर राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके। इस योजना के तहत जल के बेहतर प्रबंधन और वितरण के जरिए क्षेत्र के किसानों को स्थायी समाधान प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि यह परियोजना साकार होती है, तो न केवल सिंचाई की समस्या दूर होगी, बल्कि सूखे की स्थिति में भी काफी हद तक सुधार आएगा।
इस प्रस्ताव पर मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सकारात्मक रुख दिखाया और अपने विभाग के अधिकारियों को योजना का गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस परियोजना के सभी तकनीकी पहलुओं का मूल्यांकन कर एक व्यावहारिक और प्रभावी समाधान तलाशा जाएगा। सिलावट ने यह भी कहा कि दोनों राज्यों के बीच समन्वय बनाकर इस तरह की योजनाओं को आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों को सीधा लाभ मिल सके।
गौरतलब है कि इस परियोजना को लेकर पहले भी उच्च स्तर पर चर्चा हो चुकी है। हाल ही में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहनलाल यादव ने रामगंज मंडी क्षेत्र का दौरा किया था, जहां इस योजना पर प्रारंभिक बातचीत हुई थी। उस दौरान मुख्यमंत्री ने इस पहल को उपयोगी बताते हुए संबंधित विभागों को इसे आगे बढ़ाने के संकेत दिए थे। अब जब दोनों राज्यों के बीच औपचारिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, तो क्षेत्र के किसानों में नई उम्मीद जागी है।
इस पूरी पहल को केवल एक सिंचाई परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और कृषि सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि यह योजना सफल होती है, तो इससे न केवल रामगंज मंडी बल्कि आसपास के अन्य क्षेत्रों को भी लाभ मिल सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि, फसल उत्पादन में सुधार और जल संकट में कमी आने की संभावना है।


