मनीषा शर्मा। सोमवार को शासन सचिवालय में आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना की राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता प्रमुख शासन सचिव, आयुष विभाग सुबीर कुमार ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच अंतर विभागीय समन्वय स्थापित करना और योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करना था। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राज्य के सभी जिलों में प्रत्येक जिले की पांच पंचायतों में लागू किया जाएगा। इसके लिए कुल 210 आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के जरिए लोगों में स्वास्थ्य संवर्धन और रोगों की रोकथाम करना है।
योजना की विशेषताएं
इस परियोजना के तहत मरीज की प्रकृति (वात-पित्त-कफ) के आधार पर उनकी स्वास्थ्य स्थिति को समझा जाएगा। इसके बाद उन्हें रोगों की रोकथाम के लिए पूर्व में ही औषधि और डाइट चार्ट उपलब्ध कराया जाएगा। यह संभवतः प्रदेश का पहला प्रोजेक्ट है, जिसमें रोगों के उपचार से पहले ही उनकी रोकथाम पर बल दिया जाएगा। सुबीर कुमार ने कहा कि योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करना होगा ताकि आमजन तक इसका लाभ शीघ्र पहुंचे।
विशेष पहल: महिलाओं और बच्चों पर ध्यान
बैठक में प्रमुख शासन सचिव ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत महिलाओं और बच्चियों में खून की कमी (एनीमिया) को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक औषधियों का वितरण किया जाना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि:
6 माह से 5 साल तक के बच्चों को स्वर्ण प्राशन दिया जाए। यह एक विशेष आयुर्वेदिक औषधि है जो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।
गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व पोषण युक्त लड्डू उपलब्ध कराए जाएं।
प्रसूता महिलाओं को ‘जापे वाले लड्डू’ दिए जाएं ताकि उन्हें प्रसव के बाद शारीरिक पोषण और ऊर्जा मिल सके।
पंचायत स्तर पर भागीदारी
योजना को सफल बनाने के लिए राज्यपाल ने जोर दिया कि ग्राम स्तर पर सरपंचों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक सरपंच से लिखित सहमति ली जाएगी और जिन गांवों में मॉडल सरपंच कार्यरत हैं, उन्हें विशेष रूप से इस योजना में सम्मिलित किया जाएगा।
विभागों का समन्वय
इस परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कई विभागों के बीच समन्वय की आवश्यकता होगी। इसमें शामिल हैं:
पंचायती राज विभाग
आयुष विभाग
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग
महिला एवं बाल विकास विभाग
शिक्षा विभाग
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग
वन विभाग
प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि जिला स्तर और ब्लॉक स्तर पर भी शीघ्र समितियां गठित की जाएंगी।
18 सूचकांक और 11 लाख रुपये का प्रोत्साहन
राज्य सरकार ने योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए 18 सूचकांक (इंडिकेटर्स) तय किए हैं। जो ग्राम पंचायतें इन सूचकांकों को पूरा करेंगी, उन्हें 11 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। यह प्रोत्साहन राशि ग्राम पंचायतों को और बेहतर ढंग से योजना लागू करने के लिए प्रेरित करेगी।
बैठक में मौजूद अधिकारी
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से पंचायती राज विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग, एकीकृत बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, आयुष विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, यूनिसेफ और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
योजना का महत्व
आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने की एक अनूठी पहल है। यह योजना न केवल रोगों की रोकथाम पर जोर देती है, बल्कि महिलाओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को भी विशेष महत्व देती है। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है तो यह पूरे देश में एक मॉडल प्रोजेक्ट बन सकती है, जिससे आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को नई पहचान मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम उठाया जाएगा।


