मनीषा शर्मा। 2020 में राजस्थान में राजनीतिक संकट उस समय गहराया जब तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपने खेमे के विधायकों के साथ कांग्रेस से बगावत कर दी। उस समय यह आरोप लगा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट खेमे के विधायकों और अपने खेमे के नेताओं की बातचीत को फोन टैपिंग के जरिए सुना। इस मामले में अशोक गहलोत के तत्कालीन OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) लोकेश शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने फोन टैपिंग के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी मामले में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने सोमवार को उन्हें गिरफ्तार किया। हालांकि, गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें जमानत मिल गई।
लोकेश शर्मा की भूमिका: गहलोत और पायलट खेमे की बातचीत का खुलासा
फोन टैपिंग मामले में लोकेश शर्मा ने पहले ही क्राइम ब्रांच को अपना बयान दिया था। लोकेश शर्मा ने स्वीकार किया कि अशोक गहलोत द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑडियो को उन्होंने आगे फॉरवर्ड किया था। उन्होंने दावा किया कि गहलोत खेमे और पायलट खेमे के विधायकों के फोन सर्विलांस पर रखे गए थे। हर रोज विधायकों की बातचीत की जानकारी गहलोत खेमे तक पहुंचाई जाती थी।
गिरफ्तारी और जमानत का घटनाक्रम
- दिल्ली बुलाया गया: 25 नवंबर 2024 को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने लोकेश शर्मा को पूछताछ के लिए बुलाया।
- गिरफ्तारी: पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
- जमानत: गिरफ्तारी के तुरंत बाद कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत के आधार पर रिहा कर दिया।
कोर्ट में अग्रिम जमानत:
21 नवंबर 2024 को लोकेश शर्मा ने सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की।
फोन टैपिंग विवाद में सचिन पायलट की भूमिका
इस विवाद के केंद्र में अशोक गहलोत और सचिन पायलट का राजनीतिक टकराव था।
- सचिन पायलट का दावा:
उन्होंने गहलोत खेमे पर उनके विधायकों की जासूसी करने का आरोप लगाया।- गहलोत खेमे का तर्क:
गहलोत समर्थकों ने कहा कि यह कदम राजस्थान सरकार को गिराने की साजिश को रोकने के लिए उठाया गया था।क्राइम ब्रांच की जांच: सबूत और सहयोग
लोकेश शर्मा ने कहा है कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया और सभी जरूरी सबूत पहले ही क्राइम ब्रांच को सौंप दिए हैं। उन्होंने अपनी भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि उनका मुख्य काम केवल ऑडियो फॉरवर्ड करना था। साथ ही, उन्होंने कहा कि आगे की जांच में भी वह पूरा सहयोग करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषण: कांग्रेस और बीजेपी के लिए मुद्दा
यह विवाद कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
कांग्रेस के अंदरूनी टकराव:गहलोत और पायलट खेमे के बीच विवाद ने पार्टी की एकता को कमजोर किया।
बीजेपी की रणनीति:बीजेपी इस मुद्दे को गहलोत सरकार की छवि खराब करने के लिए इस्तेमाल कर रही है।
लोकतंत्र का सवाल:फोन टैपिंग जैसे मामलों ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।


